आखिर क्या है भोजशाला विवाद? क्यों उठ रही है सरस्वती प्रतिमा स्थापना और नमाज बंद करने की मांग?

आखिर क्या है भोजशाला विवाद? क्यों उठ रही है सरस्वती प्रतिमा स्थापना और नमाज बंद करने की मांग?
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भोजशाला विवाद क्या है? हजार साल पुराना है, इसका इतिहास।

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला मामला बसंत पंचमी के चले फिर एकबार चर्चा में है। हाल ही में इंदौर हाईकोर्ट में इसके संबंध में एक याचिका दायर की गई है। इसमें भोजशाला में माता सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करने और पूरे परिसर की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करने की मांग की गई है। इसके साथ ही हिंदू पक्ष ने नमाज़ पढ़ने पर रोक लगाने की भी मांग की है। लेकिन क्या आप इसके विवाद के पीछे जानतें हैं ? अगर नहीं, तो हम आपको बताएंगे कि भोजशाला मामला क्या है और यह क्यों विवादों में है।

भोजशाला का इतिहास

भोजशाला का इतिहास हजार साल पुराना है। राजा भोज (1000–1055 ई.) ने 1034 ई. में इसे एक महाविद्यालय के रूप में स्थापित किया था। इसे हिंदू समाज में सरस्वती मंदिर के रूप में भी माना जाता है। जिसके बाद इसे कई बार तोड़ गया और फिर दुबारा बनाया गया।

  • माना जाता है कि 1305 ई. में अलाउद्दीन खिलजी ने भोजशाला को ध्वस्त किया था।
  • इसके बाद 1401 ई. में दिलावर खान गौरी ने इसके एक हिस्से में मस्जिद बनवाई थी।
  • इसके बाद 1514 ई. में महमूद शाह खिलजी ने दूसरे हिस्से में मस्जिद का निर्माण कराया।
  • फिर 1875 में यहां खुदाई की गई थी। इस खुदाई में सरस्वती देवी की प्रतिमा मिली थी। जिसे अंग्रेज मेजर किनकेड आपने साथ लंदन ले गए थे।

विवाद क्या है फिर?

हिंदू संगठन इसे राजा भोज कालीन इमारत मानते हैं और इसे सरस्वती मंदिर घोषित करने की मांग करते हैं। उनका तर्क है कि राजवंश काल में मुस्लिमों को केवल कुछ ही समय के लिए यहां पर नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। वहीं, मुस्लिम समाज का कहना है कि वे लंबे समय से यहां नमाज अदा कर रहे हैं। मुस्लिम इसे भोजशाला-कमाल मौलाना मस्जिद कहते हैं।



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विवाद की कानूनी प्रक्रिया

  • 1902 का सर्वे: आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने इस परिसर में हिंदू चिन्ह और संस्कृत के शब्द पाए थे।
  • 1933: तत्कालीन धार रियासत ने मुस्लिम समाज को नमाज की अनुमति दी।
  • 1995–1998: प्रशासन ने पूजा और नमाज के समय को तय किया। विवाद बढ़ने पर प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया।
  • 2003: कोर्ट ने हिंदुओं को पूजा की अनुमति दी।
  • 2013 और 2016: जब बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़े, तो तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हुई।

भोजशाला विवाद लगातार राजनीतिक विवाद होते रहते हैं। 2003 में भाजपा ने इसे चुनावी मुद्दा बनाकर विधानसभा चुनाव जीते। तब से हिंदू समाज की मांग है कि लंदन में रखी गई मां सरस्वती की प्रतिमा को वापस लाकर भोजशाला में स्थापित किया जाए। हाल ही में हाईकोर्ट ने भोजशाला के सर्वे पर आदेश सुरक्षित रखा है। याचिकाकर्ता हिंदू फार जस्टिस ट्रस्ट ने मांग की है कि परिसर का वैज्ञानिक सर्वे करवाया जाए, ताकि इतिहास और वर्तमान स्थिति स्पष्ट हो।

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