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लहार कांग्रेस का अभेद्य किला भेदना भाजपा के लिए चुनौती

लहार विधानसभा क्षेत्र डॉ. गोविंदसिंह के आगे कांग्रेस के पास नहीं है कोई विकल्प

लहार कांग्रेस का अभेद्य किला भेदना भाजपा के लिए चुनौती
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अनिल शर्मा/भिण्ड। बुंदेलखण्ड की सीमाओं से लगा लहार विधानसभा क्षेत्र इन दिनों कांग्रेस का गढ़ बना हुआ है या यूं कहें कि लहार विधानसभा की गिनती मप्र के उन क्षेत्रों में है जो कांग्रेस के लिए अभेद्य किला बन चुके हैं। लगातार तीन पंच वर्षीय से प्रदेश में भाजपा सरकार है, लेकिन लहार में हुकूमत आज भी कांग्रेस की चलती है। इस विधानसभा क्षेत्र में पंच से लेकर जिला पंचायत व सेवा सहकारी संस्थाओं के नुमाइंदों से लेकर बैंक के संचालक, जनपद सदस्य व विपणन सहकारी संस्थाओं, मण्डी, नगरीय निकाय में कांग्रेस ही काबिज है।

लहार विधानसभा के इतिहास के पन्नों में झांकें तो यह क्षेत्र शुरुआत में कांग्रेस प्रभावित रहा है। मप्र स्थापना के बाद लगातार दो बार यहां कांग्रेस का ही विधायक चुना गया और अब तक हुए कुल 13 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नौ बार अपनी विजय पताका फहरा चुकी है, जिसमें सर्वाधिक पांच बार डॉ. गोविन्द सिंह ने कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया है। शुरुआती दौर में इस विधानसभा में जनसंघ मजबूत विपक्ष की भूमिका में रहा, जिसके फलस्वरूप ही 1967 में जनसंघ के विधायक सरयू प्रसाद त्रिपाठी चुने गए और 1972 में भी कड़ी टक्कर के साथ मात्र 400 वोटों से जनसंघ की पराजय हुई। जनसंघ की मजबूती के चलते ही 1985 में भाजपा के विधायक मथुरा प्रसाद महंत चुने गए। जबकि तब कांग्रेस की लहर थी। फिर अब भाजपा का लहार में दिनोंदिन कमजोर होना संगठन के लिए गहन अध्ययन का विषय है। इस विधानसभा सीट पर 1990 से एक ही व्यक्ति का कब्जा है जबकि प्रदेश में डेढ़ दशक से भाजपा का राज है।

यदि लहार विधानसभा क्षेत्र के चुनावी परिणाम के आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा का वोट बैंक काफी घटा है और पार्टी अपने वजूद को खोती जा रही है। इसके लिए संगठन को बढ़ाने की बजाय लहार में डॉ. गोविन्द सिंह चुनाव कैसे हार सकते हैं, इसकी व्यूह रचना बनाई गई। पार्टी ने तीन बार मथुरा प्रसाद महंत को प्रत्याशी बनाकर पूरा मौका दिया, लेकिन वे तीनों बार चुनाव हारे और बूथ कैप्चरिंग का रोना रोते रहे। लहार का 2003 का चुनाव काफी रोचक रहा। यहां से 1977 में जनता पार्टी से विधायक रहे रमाशंकर सिंह बसपा से चुनाव मैदान में उतरे और भाजपा ने अम्बरीश शर्मा को उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में नया खेल खेला गया और भाजपा डॉ. गोविन्द सिंह को हराने रमाशंकर के साथ लग गई और जिस भाजपा के 1998 में 40 हजार से अधिक बोट आए थे, वह साढ़े आठ हजार से अधिक बोटों में ही सिमट गई। फिर 2008 में उसी खेल की पुनरावृत्ति हुई। भाजपा ने टिकिट दिया मुन्नी त्रिपाठी को और डॉ. गोविन्द को हराने में लग गई रोमेश महंत के साथ। 2013 के चुनाव में भाजपा इसी असमंजस में बनी रही कि आखिरकार मुकाबला किससे है। वह अंतिम समय तक यह तय नहीं कर पाई कि रसाल सिंह की टक्कर है या रोमेश की, परिणाम स्वरूप फिर भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा।

मतदान केंद्र 304

कुल मतदाता 2,43,944

पुरुष मतदाता 1,35,161

महिला मतदाता 1,08,783

संभावित प्रत्याशी

भाजपा - रसाल सिंह, अम्बरीश शर्मा गुड्डू, चौ. राकेश सिंह, योगेन्द्र सिंह पप्पू।

कांग्रेस - डॉ. गोविन्द सिंह

2013 चुनाव परिणाम

नेताओं की रायडॉ. गोविन्द सिंह कांग्रेस 53,012

रसाल सिंह भाजपा 46,739

जीत का अंतर 6,273

लहार क्षेत्र के चहुमुखी विकास के लिए सर्वाधिक कार्य कराए गए हैं। क्षेत्र में कोई भी ऐसा गांव नहीं है, जहां पक्का पहुंचमार्ग न हो। शिक्षा के क्षेत्र में हाईस्कूल व इंटर कॉलेज खुलावए हैं। लहार क्षेत्र का इन्डोर स्टेडियम पूरे मप्र से हटकर बना हुआ है। जिसकी तारीफ केन्द्र सरकार की टीम ने भी लहार आकर की है। लहार नगर परिषद का कार्यालय भी सबसे सुंदर और आकर्षक बनवाया है। भिण्ड से लहार मार्ग बनवाने के साथ उप्र को जोडऩे वाला पहुंचमार्ग बनाया है। जिसमें 65 किमी की दूरी अब 35 किमी हो गई है। वहीं लहार सिविल अस्पताल भी बनकर तैयार है, जो यहां की प्रमुख मांग थी। सिंचाई सुविधाओं के मामले में लहार अग्रणी है। करेधन तालाब के लिए काफी बजट मंजूर कराया है। रतनपुरा से आलमपुर तक की 11 करोड़ की लागत से डबल सड़क बनी है। जनता के हर दुख-दर्द में उसके साथ रहता हूं, यदि विकास का संकल्प मजबूत हो तो कोई भी समस्या आड़े नहीं आती। लगातार चुनाव जीतने के पीछे जनता का ही प्यार है जो सफलता मिलती है।

डॉ. गोविंद सिंह, विधायक, कांग्रेस

लहार का विकास बिल्कुल नहीं हुआ है। लेकिन विधायक और उनके परिवार का विकास जरूर हो गया है। लहार क्षेत्र में आज भी बेरोजगारी की समस्या है। कई गांव की टूटी सड़कें विधायक निधि से ठीक कराई जा सकती हैं, लेकिन नहीं कराई गई हैं। सिंचाई हेतु लहार क्षेत्र के लिए बड़ी परियोजना बन सकती थी, जो नहीं बनी है। किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या सिंचाई की है क्योंकि वर्षा कम होने की वजह से पानी की किल्लत बढ़ जाती है। युवाओं को रोजगार मुहैया कराने की दिशा में कोई काम नहीं हुआ है।

रसालसिंह

निकटतम प्रत्याशी भाजपा

Updated : 2018-08-20T17:52:56+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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