Top
Home > Lead Story > विपदा के भंवर में मध्यप्रदेश का खेवनहार शिवराज

"विपदा" के भंवर में मध्यप्रदेश का खेवनहार "शिवराज"

प्रदीप भटनागर

भोपाल। किसी जनप्रतिनिधि की सेवा भावना ही सही मायनों में उसके आंकलन का प्रमुख जरिया होता है, और जनता के प्रति विपरीत परिस्थितियों में उसकी कवायदें उस सेवा भावना को रेखांकित करती है। इस विषय में अगर गौर किया जाए, तो मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने समकक्षों की रेस में कोसों आगे नजर आ रहे हैं। कोरोना महामारी का मुकाबला कर रहे प्रदेश के लिए जहां पर सड़कों पर उतरने वाले पहले मुख्यमंत्री बने, तो समाज के पिछड़े और मजबूर तबके के लिए सरकार का खजाना खोलकर शिवराज सिंह ने यह जाहिर कर दिया, कि उनकी पहली और अंतिम प्राथमिकता सिर्फ और सिर्फ जनहित है।

मध्यप्रदेश मे लगभग एक महीने के राजनीतिक संकट के बाद जब शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली, उस वक्त प्रदेश का सिस्टम ही नहीं, बल्कि यहां का समाज एक नकारात्मकता से घिरा हुआ था। सिस्टम के संचालन पर जहां अस्थाई नेतृत्व संकट के बादल के तौर पर मंडरा रहा था, तो पूरे समाज को कोरोना का सामना करने के लिए एक मजबूत सरकार की जरुरत थी। कुर्सी संभालते वक्त शिवराज भी काफी हद तक अधूरे नजर आ रहे थे, इस महामारी से निपटने के लिए उन्हें न तो अपने मुताबिक तंत्र तैयार करने का समय मिला, और न अपनी टीम बनाने का। लेकिन इस सबके बावजूद वह शपथ लेने के साथ ही कोरोना के खिलाफ निर्णायक जंग में जुट गए, और उनकी कवायदों में कहीं भी वह अधूरापन देखने को नहीं मिला।

इस दौरान शिवराज सिंह चौहान जहां अपनी जनता की खैर कुशल जानने के लिए भोपाल की सड़कों पर तक उतर गए, तो सुबह 5 बजे से लेकर आधी आधी रात तक चलने वाली उनकी समीक्षा और रणनीतिक बैठकें भी प्रदेश और प्रदेश की जनता के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शा रही थी। एक शख्स जो पिछले 15 महीने से प्रदेश के सिस्टम से बिल्कुल दूर रहा हो, उसने इसके मुताबिक ढलने में 15 मिनट का भी समय नहीं लगाया, शायद इसके पीछे शिवराज सिंह का 13 साल का प्रशासनिक अनुभव ही था, जो इस विपरीत हालात में भी उन्हें कहीं से भी कमजोर नहीं कर पा रहा था।

सिर्फ मध्यप्रदेश के सिस्टम को पटरी पर लाना ही शिवराज के लिए चुनौती नहीं थी, बल्कि इसके साथ उन्हें उस मजबूर और बेबस वर्ग के बारे में भी सोचना था, जो कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण अपने घर में कैद होकर रह गया है, और दो जून रोटी भी उसकी पहुंच से बाहर हो गई है। इस वर्ग की तकलीफ को देखते हुए शिवराज सिंह ने तत्काल बड़े राहत पैकेज का ऐलान कर दिया, और यह बात भी जाहिर कर दी, कि साल, समय और सरकार बदली है, लेकिन मध्यप्रदेश की जनता के लिए शिवराज आज भी वही है, जो कल था। जिसकी पहली, अंतिम और एकमात्र प्राथमिकता अपनी जनता की सेवा और उसकी भलाई है।

मजदूर और कमजोर तबके लिए खोला खजाना

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए भारत में लागू 21 दिनों के लॉकडाउन का सबसे ज्यादा प्रभाव मजदूरों, श्रमिकों, फैक्ट्री वर्कर और प्रतिदिन की आय से जीवन यापन करने वालो पर पड़ा है। इस क्रम में शिवराज सरकार ने निर्माण श्रमिकों को मदद करने का फैसला लेते हुए रजिस्टर्ड श्रमिकों के खाते में एक-एक हजार रुपए ट्रांसफर किए। खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंत्रालय में एक क्लिक के जरिए सभी रजिस्टर्ड श्रमिकों के खाते में एक हजार रुपए ट्रांसफर किए। प्रदेश के कुल 8 लाख 85 हजार 89 रजिस्टर्ड मजदूरों के खातों में ये राशि भेजी गई, इस हिसाब से सभी श्रमिकों के खातों में कुल 88 करोड़ 50 लाख 89 हज़ार रुपए ट्रांसफर किए गए। इसके अलावा गरीब परिवारों के लिए भी शिवराज सरकार ने मुफ्त राशन देने का फैसला किया है। मुफ्त राशन की व्यवस्था सभी गरीबों के लिए हैं, चाहे उनके पास राशन कार्ड हो या न हो।

अन्य राज्यों में फंसे प्रदेशवासियों की मदद

लॉकडाउन के कारण अन्य राज्यों में फंसे मध्यप्रदेश के लोगों की मदद के लिए शिवराज सरकार पहले दिन से ही गंभीर नजर आई। ऐसे लोगों को घर लाने के लिए सीएम शिवराज सिंह ने एक खास पहल शुरू की,मध्यप्रदेश के ऐसे लोग जो प्रदेश के किसी दूसरे जिले या किसी दूसरे राज्य में फंसे हैं, उनको घर वापस लाने के लिए सरकार ने हर जिले में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। मुख्यमंत्री ने इसके आदेश सभी जिलाधीशों को भी दिए, साथ ही सरकार द्वारा हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। ऐसे लोग जो लॉकडाउन में प्रदेश के किसी भी हिस्से में फंसे हैं‌ वे हेल्पलाइन नंबर 104 और 181 नम्बर पर फोन कर घर वापस जाने के लिए सरकारी मदद ले सकते हैं। इसी तरह यदि प्रदेश के बाहर कहीं लोग फंसे हैं तो वे राज्य स्तरीय हेल्पलाइन नंबर 0755-2411180 पर फ़ोन कर सहायता प्राप्त कर सकते हैं। उनकी पूरी मदद की जाएगी। ये सभी राज्य कंट्रोल रूम, भोपाल के फोन नम्बर है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत तौर पर सभी मुख्यमंत्रियों को खत लिखकर मध्यप्रदेश के लोगों का ध्यान रखने की अपील भी की।

तत्काल कड़े फैसले लिए

कोरोना के संकट को टालने के लिए शिवराज सिंह चौहान ने कड़े फैसले लेने में कोई देर नहीं लगाई, मुख्यमंत्री बनने के साथ ही उन्होंने तत्काल भोपाल और जबलपुर में कर्फ्यू लगाने का फैसला लिया, तो वहीं इंदौर में भी टोटल लॉकडाउन किया गया। इसके अलावा प्रदेश के सिनेमा, स्कूल और मॉल बंद करने में भी शिवराज सरकार ने कोई भी देरी नहीं की। चौतरफा सवालों के बाद शराब की दुकानों को लेकर शिवराज सरकार के फैसले की भी हर कहीं तारीफ हुई। वहीं जेल में बंद कैदियों के ऊपर संक्रमण का खतरा देखते हुए शिवराज सरकार ने 5000 कैदियों को 60 दिन की इमरजेंसी पैरोल भी देने का फैसला लिया। सरकार के इन सभी फैसलों को कोरोना के खिलाफ उसकी निर्णायक जंग का हिस्सा माना जा रहा है।

इस वक्त शिवराज सिंह चौहान बिना मंत्रिमंडल के मध्यप्रदेश सरकार का संचालन कर रहे हैं। सवाल उठाने वाले भले ही इस सरकार को अधूरा बता रहे हैं, लेकिन यह अधूरापन जमीन पर कहीं भी नजर नहीं आ रहा। मध्यप्रदेश का तंत्र आज अन्य प्रदेशों के मुकाबले काफी सधा हुआ संचालित हो रहा है, जनता और सरकार के बीच एक सामंजस्य देखने को मिल रहा है। इसके साथ ही प्रदेश की जनता भी अपने इस नए मुखिया के साथ खड़ी नजर आ रही है, शायद उसे भी विश्वास है कि इस विपरीत हालात में मध्यप्रदेश के लिए शिवराज से बेहतर खेवनहार शायद ही कोई और साबित हो।

बदले तेवर के साथ विपदा का मुकाबला

यूं तो शिवराज सिंह चौहान को हमेशा से ही एक सहज छवि का राजनेता माना जाता रहा है, लेकिन उनका यह चौथा कार्यकाल उनकी इस पहचान पर भारी साबित पड़ता नजर आ रहा है और वह किसी भी तरह की अनियमितता पर सहज रुख अपनाते नहीं दिख रहे। कोरोना से जुड़े जरूरी तथ्यों को छिपाने पर तत्काल स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. प्रतीक हजेला की छुट्टी करना उनके बदले हुए तेवरों की पैरवी कर रहा है। इसके अलावा इन्दौर में मानव सेवा के कार्य के लिए समर्पित स्वास्थ्य, प्रशासनिक और पुलिस कर्मियों पर पत्थरबाजी के बाद शिवराज सिंह चौहान का रवैया भी हर कहीं चर्चा का विषय और चौंकाने वाला हुआ है। जिन्होंने पहले ट्वीट के जरिए संबंधित दोषियों के प्रति सरकार की सोच को जाहिर किया, और बाद में उन पर रासुका जैसा कड़ा कदम भी उठाया। इन सभी तस्वीरों को देखकर यह अंदाजा लगाया जा रहा है, कि शिवराज सिंह चौहान बदले हुए तेवरों के साथ इस विपदा का सामना कर रहे हैं और यह तेवर शायद आने वाले समय में उनकी बदली हुई पहचान में परिवर्तित हो जाएं।

Updated : 2020-04-04T05:33:15+05:30
Tags:    

Swadesh News

Swadesh Digital contributor help bring you the latest article around you


Next Story
Share it
Top