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पन्ना जिले में प्राकृतिक झरनों के निकट खुदाई से बंद हुए जल स्रोत

  • केन नदी का अस्तित्व मिटा रहा रेत माफिया बना ठेकेदार
  • पिपरिया के ठेकेदार को मिला 27 खदानों का टेंडर

पन्ना जिले में प्राकृतिक झरनों के निकट खुदाई से बंद हुए जल स्रोत

भोपाल, विशेष संवाददाता। विगत डेढ़ दशक में खनिज माफिया प्रदेशभर में इस कदर हाबी हुआ है कि दोनों हाथों से दौलत बंटोरने के लिए निरंकुश होकर प्रकृति को नष्ट करने पर तुल गया है। नदी हो या जंगल, पहाड़ हो या मैदान हर तरफ खनिज माफिया अपने पैर पसारता जा रहा है। पन्ना जिले में रेत माफिया द्वारा केन नदी के आसपास पहाड़ों के बीच स्थित प्राकृतिक झरनों के निकट खुदाई कर उन जल स्रोतों को नष्ट किया जा रहा है, जिससे केन नदी का प्रवाह अविरल रहा है। स्थानीय प्रशासन की मिली भगत और लापरवाही के चलते अब केन नदी के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।

पन्ना जिले में खनिज ठेकेदार द्वारा प्रकृति से किए जा रहे इस खिलवाड़ से दु:खी एक स्थानीय नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता ने 'मध्य स्वदेश' को माफिया की करतूतों के वीडियो और फोटो भेजे हैं। पन्ना जिले के इस नागरिक ने बताया कि ग्राम बरौली एवं ग्राम रामनई से केन नदी का जल प्रवाह हो रहा है, जिसमें यहां कई प्राकृतिक झरने जुड़े हैं। इन झरनों के स्रोतों को रेत माफिया द्वारा बड़ी-बड़ी मशीनों से खोदे जाने के कारण यहां से प्रस्फुटित झरनों के स्रोत नष्ट हो रहे हैं, जिससे केन नदी के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। साथ ही आसपास के कइ्र गांवों में पेयजल के लिए हाहाकार मचने लगा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब स्थानीय प्रशासन की मिली भगत चल रहा है। रेत ठेकेदार अवैध खनन कर रहा है तथा ग्रामीणों की गुहार न ठेकेदार सुन रहा है और न ही अधिकारी। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कुछ स्थानीय किसानों को संतुष्ट कर शासन और प्रशासन में बैठे अधिकारियों ने गऊचार की भूमि को भी खुदवाना शुरू कर दिया है, जिसमें वन्य जीवों और गांव के पशुओं को चारा-पानी मिलता है। माफिया ने यहां अलग रास्ते निर्माण कर अवैध खनन किया जा रहा है।

पोकलेन मशीनों ने गड्ढों में बदले ऊंचे पहाड़


पन्ना जिले के अजयगढ़ तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम बरौली एवं ग्राम रामनई के ग्रामीणों का कहना है कि अवैध रेत खनन और परिवहन कर रहे रेत ठेकेदार ने प्राकृतिक झरनों और शासकीय गऊचर की भूमि जिसका खसरा क्र. 34 व रकबा 4.04 हेक्टेयर, खसरा क्र. 2/1,2/2 रकबा 12.80 व 9.11 हे., खसरा क्र. 60 रकबा 3.39 हे. व खसरा क्र. 58 रकबा 0.99 हे. तथा खसरा क्र. व 57 रकबा 1.00 हेक्टेयर यह इस भूमि में गांव के पशु गाय, भैंस, बकरी इत्यादि चरते हैं। पोकलेन मशीनों से हुई खुदाई के कारण पशुओं के चरने की कोई जगह नहीं बची है जिससे पशु मर रहे हैं यह मप्र शासन की गउचर भूमि को रातदिन पोकलेन मशीनों द्वारा नष्ट किया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम रामनई और बरौली में उन ऊंचे ऊंचे मिट्टी के टीलों को खोदकर अवैध तरीके से रेत का खनन हो रहा है, जो केन नदी के प्राकृतिक जल स्रोत हैं।

3 किमी जंगल खोदकर बनाया रास्ता


ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा अवैध रूप से रेत खनन के लिए ग्राम बरौली से 3 किलो मीटर तक जंगलों के बीच से पेड़ों को काटकर रास्ता बना लिया है। इस रास्ते का निर्माण पूर्व माध्यमिक व प्राथमिक विद्यालय ग्राम बरौली के सामने से किया गया है, जिससे विद्यार्थीयों के साथ दुर्घटना से ग्रामीण आशंकित रहते हैं। रेत ठेकेदार ने हरिजन मोहल्ला के बीच से संकीर्ण रास्ते का भी निर्माण किया गया है। रेत ठेकेदारों के रेत से भरे ट्रक में कोई दिक्कत न हो इस लिए हरिजन मोहल्ले से बिजली के तार काट दिए गए हैं, मात्र एक तार ही छोड़ा है जिससे स्थानीय लोगों को भी असुविधा हो रही है

पिपरिया के ठेकेदार को मिला 27 खदानों का टेंडर

पन्ना जिले की सभी 27 रेत खदानों का ठेका पिपरिया, जिला होशंगाबाद के रेत ठेकेदार रसमीत मल्होत्रा को दिसम्बर 2019 में तीन वर्ष के लिए मिला है। ग्रामीणों के अनुसार इनमें एक खदान ग्राम रामनई तहसील अजयगढ़ जिला पन्ना भी है जिसका खसरा क्र. 1 व रकबा 5.53 हे. जिसमें केन नदी की जलधारा है रेत नहीं, लेकिन इस रेत घाट की आड़ में ठेकेदार गउचर भूमि खसरा क्र. 34 व रकबा 4.04 हे. व खसरा क्र. व 2/1,2/2 रकबा 12.80 व 9.11 हे., खसरा क्र. 60 रकबा 3.39 हे. व खसरा क्र. 58 रकबा 0.99 हे. तथा खसरा क्र. व 57 रकबा 1.00 हे. पर अवैध रास्ता का निर्माण कर अवैध तरीके से रेत खनन कर प्राकृतिक टीले व झरनों व पर्यावरण को नष्ट कर कर रेत उत्तर प्रदेश भेज रहा है।

इन्होने कहा -

'रेत ठेकेदार को जिस घाट से रेत खनन की अनुमति मिली है, वहां रेत है ही नहीं, इस कारण अधिकारियों की मिली भगत से गोचर की भूमि पर स्थित प्राकृतिक संरचनाओं और केन नदी के जल स्रोत झरनों को मशीनों से खोदकर नष्ट किया जा रहा है। ग्रामीणों की शिकायतें प्रशासन नहीं सुन रहा है। '

राकेश कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता

निवासी ग्राम बरौली

Updated : 2020-07-01T06:15:24+05:30
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