नेपाल सीमा से 55 किमी दूर तिब्बत में 5 तीव्रता का भूकंप आया। 10 किमी गहराई में इसका केंद्र था। नेपाल-तिब्बत बाढ़ और भूस्खलन में अब तक 1280 लोगों की मौत हुई है।
काठमांडू। नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही से अभी उबर भी नहीं पाया है कि इसके बीच फिर प्राकृतिक घटना हुई। इस बार गुरुवार को नेपाल सीमा से करीब 55 किलोमीटर दूर तिब्बत में 5 तीव्रता का भूकंप आया। भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे था।
भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के जोशीमठ से लगभग 128 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में बताया गया है। फिलहाल भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान या लोगों के घायल होने की सूचना सामने नहीं आई है।
कम गहराई का भूकंप, नुकसान की आशंका ज्यादा
वैज्ञानिकों के मुताबिक कम गहराई पर आने वाले भूकंप अधिक नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं। इसकी वजह यह है कि भूकंपीय ऊर्जा को धरती की सतह तक पहुंचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ती है। हालांकि तिब्बत में आए इस भूकंप के बाद अभी तक किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं मिली है। यह भूकंप ऐसे वक्त आया है, जब नेपाल और तिब्बत पहले ही प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे हैं।
बाढ़ और भूस्खलन में 1280 लोगों की मौत
26 अगस्त को नेपाल और तिब्बत में आई बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। अब तक इस आपदा में कुल 1280 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। इनमें नेपाल में 1259 और तिब्बत में 21 लोगों की जान गई है। राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है और प्रभावित इलाकों में लापता लोगों की तलाश की जा रही है।
तिब्बत में 100 नेपाली नागरिक लापता
नेपाल के विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई बाढ़ के बाद तिब्बत में करीब 100 नेपाली नागरिकों के लापता होने की जानकारी है। वहीं केरुंग इलाके में लगभग 1,500 नेपाली नागरिकों के फंसे होने की बात सामने आई है। उन्हें सुरक्षित निकालने की तैयारी की जा रही है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत में कम से कम 19 शव मिले हैं। माना जा रहा है कि ये शव भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के पानी के साथ बहकर नेपाल से भारत पहुंचे।
शवों की पहचान में भारत कर रहा मदद
आपदा में मारे गए लोगों की पहचान के लिए DNA जांच की जा रही है। भारत ने इसके लिए 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम नेपाल भेजी है। यह टीम काठमांडू में नेपाल पुलिस और स्थानीय विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम कर रही है।
फोरेंसिक विशेषज्ञ क्षतिग्रस्त शवों से हड्डी या दांत के नमूने लेकर DNA प्रोफाइल तैयार करते हैं। इसके बाद इसे लापता व्यक्ति के परिजनों के DNA नमूनों से मिलाया जाता है। इस प्रक्रिया के जरिए मृतकों की पहचान की पुष्टि की जाती है। आमतौर पर DNA जांच में एक से तीन सप्ताह तक का समय लग सकता है। हालांकि आपदा के दौरान बड़ी संख्या में सैंपल होने के कारण समय बढ़ सकता है। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से कुछ मामलों में रिपोर्ट 24 से 72 घंटे में भी मिल सकती है।
बिहार-नेपाल सीमा पर भी असर
नेपाल में आई फ्लैश फ्लड का असर भारत के सीमावर्ती इलाकों पर भी दिखाई दे रहा है। बिहार-नेपाल सीमा पर कारोबार और पर्यटन प्रभावित हुआ है। सीमा पर 100 से ज्यादा ट्रकों के दो दिनों से खड़े रहने की जानकारी सामने आई है। सीमा पर आवाजाही प्रभावित होने के साथ ही सीमावर्ती बाजारों, टूरिस्ट वाहनों और सामान की आवाजाही पर भी इसका असर पड़ा है। फिलहाल नेपाल और तिब्बत में राहत एवं बचाव कार्य जारी है। प्रशासन लापता लोगों की तलाश के साथ प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने में जुटा हुआ है।