सम्मान खरीदा नहीं जाता: भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद पाकिस्तान में सियासी भूचाल

सम्मान खरीदा नहीं जाता: भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद पाकिस्तान में सियासी भूचाल
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भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद पाकिस्तान में नाराज़गी, भारत को 18% टैरिफ और पाकिस्तान को ज्यादा टैक्स मिलने पर उठा सियासी तूफान।

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हुई नई ट्रेड डील ने पाकिस्तान में सियासी और सोशल मीडिया हलचल तेज कर दी है। वजह साफ है जिस भारत पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप महीनों तक दबाव बनाते दिखे, वही भारत आखिरकार पाकिस्तान से बेहतर टैरिफ शर्तें हासिल करने में कामयाब रहा और पाकिस्तान, जिसने वॉशिंगटन में जमकर लॉबिंग की, ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित तक किया उसे आखिर में ज्यादा टैक्स का सामना करना पड़ा।

भारत को 18%, पाकिस्तान को 19% टैरिफ

2 फरवरी को घोषित इस समझौते के मुताबिक, अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया है। वहीं पाकिस्तान के लिए यह दर 19 फीसदी तय की गई। फर्क सिर्फ एक फीसदी का है लेकिन सियासी मायने बहुत बड़े हैं। पाकिस्तान में इसे कूटनीतिक नाकामी के तौर पर देखा जा रहा है।

सोशल मीडिया पर गुस्सा और तंज

ट्रंप ने डील से पहले सोशल मीडिया पर इंडिया गेट की तस्वीरें और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी एक मैगज़ीन कवर शेयर की। इसके बाद जैसे ही टैरिफ का ऐलान हुआ, पाकिस्तान में प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। एक वायरल पोस्ट में पाकिस्तान के एक्स यूज़र उमर अली ने आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर पर तीखा तंज कसा। उन्होंने एक AI-जनरेटेड तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि ट्रंप ने पाकिस्तान को ‘काम निकालने वाली प्रेमिका’ की तरह इस्तेमाल किया और जब देने की बारी आई तो पारिवारिक मजबूरी बता दी।

PTI नेताओं ने उठाए सवाल

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के पूर्व मंत्री हम्माद अज़हर ने इसे रणनीति की विफलता बताया। उन्होंने लिखा ‘21वीं सदी की विदेश नीति फोटो-ऑप्स और निजी रिश्तों से नहीं चलती। यह आर्थिक ताकत, बाज़ार और टैरिफ से तय होती है। भारत ने EU और US दोनों के साथ यही साबित किया।’

‘सम्मान खरीदा नहीं जा सकता’

पत्रकार इमरान रियाज़ खान ने तो और कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा, आप बलूचिस्तान के खनिज लकड़ी के डिब्बों में दे सकते हैं, लेकिन सम्मान नहीं खरीद सकते। उनके मुताबिक ‘सेल्समैन-इन-चीफ’ वाली नीति पूरी तरह फेल हो गई है। वरिष्ठ पत्रकार असद तूर का मानना है कि यह फैसला पाकिस्तान की पहले से जूझती अर्थव्यवस्था के लिए और झटका है। गिरता निर्यात, घटता विदेशी निवेश और कमजोर सौदेबाजी की ताकत, ये सब अब और उजागर हो गए हैं।

पाकिस्तानी विपक्ष का तर्क है कि भारत ने किसी व्यक्तिगत रिश्ते पर नहीं, बल्कि ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ के दम पर बातचीत की। दबाव झेला, लेकिन झुका नहीं। नतीजा, बेहतर डील। उधर पाकिस्तान में एक ही सवाल गूंज रहा है इतनी कोशिशों के बाद भी आखिर मिला क्या? यही वजह है कि सोशल मीडिया से लेकर टीवी स्टूडियो तक, एक बात बार-बार कही जा रही है…सम्मान खरीदा नहीं जाता।

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