भारत को बड़ी राहत: अमेरिकी एक्स्ट्रा टैरिफ आज से खत्म, 30 लाख करोड़ डॉलर का बाजार खुलेगा

X
By - Swadesh Bhopal |7 Feb 2026 1:43 PM IST
Reading Time: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से एक्स्ट्रा टैरिफ खत्म, 30 लाख करोड़ डॉलर का बाजार खुलेगा, भारत खरीदेगा 500 अरब डॉलर का सामान।
नई दिल्ली। कई महीनों से जिस फैसले का इंतज़ार किया जा रहा था, वह आखिरकार आ गया। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर जमी बर्फ अब पिघलती दिख रही है। शुक्रवार को दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते (ITA) का फ्रेमवर्क जारी किया, जिसके तहत भारतीय उत्पादों पर अमेरिका द्वारा लगाया गया अतिरिक्त टैरिफ अब खत्म कर दिया गया है। इसके साथ ही रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाया गया 25% एक्स्ट्रा टैक्स भी हटा लिया गया है।
50% से सीधे 18% पर आया टैक्स
इस नए फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका ने भारतीय सामान पर लगने वाला टैक्स 50% से घटाकर 18% कर दिया है यानी अब भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में पहले से कहीं ज्यादा प्रतिस्पर्धी दाम पर पहुंच सकेंगे। दोनों देशों ने साफ किया है कि यह समझौता जल्द ही लागू किया जाएगा और इसके बाद व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर बातचीत और तेज़ होगी। संयुक्त बयान में कहा गया कि यह फ्रेमवर्क 13 फरवरी 2025 से शुरू हुई भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाने की बुनियाद बनेगा।
30 ट्रिलियन डॉलर का बाजार, भारत को सीधा फायदा
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को भारत के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उनके मुताबिक इससे भारतीय निर्यातकों के लिए करीब 30 ट्रिलियन डॉलर (27.18 लाख करोड़ रुपये) के अमेरिकी बाजार के दरवाज़े खुलेंगे। गोयल ने कहा कि इस समझौते का सीधा फायदा MSME सेक्टर, किसानों, मछुआरों को मिलेगा। साथ ही महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
भारत खरीदेगा 500 अरब डॉलर का अमेरिकी सामान
समझौते के तहत भारत ने अगले 5 साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर (करीब 45.3 लाख करोड़ रुपये) के उत्पाद खरीदने पर सहमति जताई है। इसमें औद्योगिक सामान, तकनीकी उत्पाद और अन्य हाई-वैल्यू आइटम शामिल होंगे। भारत कई अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर टैरिफ पूरी तरह खत्म या काफी कम करेगा।
नॉन-टैरिफ बाधाओं पर भी प्रहार
इस समझौते की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ टैक्स ही नहीं, बल्कि नॉन-टैरिफ बैरियर्स हटाने पर भी जोर दिया गया है। अब तक अमेरिकी मेडिकल डिवाइस कंपनियों को भारत में कीमत नियंत्रण रजिस्ट्रेशन में देरी नियमों की जटिलता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। भारत ने भरोसा दिलाया है कि इन बाधाओं को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। इसका फायदा भारतीय अस्पतालों और मरीजों को भी मिलेगा, क्योंकि उन्हें बेहतर और किफायती अमेरिकी तकनीक मिल सकेगी।
IT और टेक कंपनियों के लिए आसान रास्ता
अमेरिकी ICT (Information & Communication Technology) उत्पादों के आयात के लिए भारत में लाइसेंस प्रक्रिया काफी लंबी और जटिल मानी जाती रही है। अब भारत ने इन प्रक्रियाओं को सरल, तेज़, समयबद्ध बनाने पर सहमति जताई है। इससे अमेरिकी टेक कंपनियों को भारत में कारोबार करना आसान होगा और भारतीय बाजार को भी बेहतर उपकरण मिलेंगे।
अमेरिकी स्टैंडर्ड्स को मान्यता देने पर विचार
समझौते के मुताबिक, भारत यह भी जांच करेगा कि क्या कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में अमेरिकी स्टैंडर्ड्स और टेस्टिंग को सीधे स्वीकार किया जा सकता है। अभी स्थिति यह है कि अमेरिका में टेस्ट हो चुके उत्पादों को भारत में फिर से जांचना पड़ता है। इससे समय बढ़ता है, लागत बढ़ती है सामान महंगा हो जाता है भारत ने वादा किया है कि 6 महीने के भीतर इस पर फैसला लिया जाएगा कि किन क्षेत्रों में दोबारा टेस्टिंग की जरूरत नहीं होगी। संयुक्त बयान में साफ कहा गया है कि कोशिश यही रहेगी कि नतीजे व्यापार के अनुकूल हों।
Next Story
