सॉरी मम्मी-पापा… गेम नहीं छोड़ पाए,मोबाइल में कैद आखिरी टास्क ने छीन ली तीन मासूम जिंदगियां

गाजियाबाद की एक हाईराइज सोसाइटी में सोमवार रात सब कुछ सामान्य लग रहा था। घर के अंदर बच्चे मोबाइल में व्यस्त थे, माता-पिता रोज़मर्रा की ज़िंदगी में। लेकिन किसी को अंदाज़ा नहीं था कि मोबाइल की उसी चमकती स्क्रीन के पीछे एक खतरनाक खेल चल रहा है, जो कुछ ही मिनटों में तीन जिंदगियां निगल लेगा।
एक साथ तीन छलांग
गाजियाबाद से सामने आई इस दर्दनाक घटना में 16, 14 और 12 साल की तीन सगी बहनों ने एक साथ नौवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी. आसपास के लोग जब तक कुछ समझ पाते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. तीनों बहनों की मौके पर ही मौत हो गई।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि बच्चियां एक टास्क-बेस्ड ऑनलाइन मोबाइल गेम की गिरफ्त में थीं। इसी गेम का आखिरी टास्क उन्हें मौत की ओर ले गया। परिवार को इस बात का कोई अंदेशा नहीं था कि बेटियों की दुनिया मोबाइल के भीतर इतनी खतरनाक बन चुकी है।
50वां टास्क और मौत की छलांग
पुलिस के अनुसार, तीनों बहनें ‘कोरियन लवर’ नाम का एक ऑनलाइन गेम खेल रही थीं। पिता चेतन कुमार ने बताया कि बच्चियां पिछले काफी समय से इस गेम में डूबी रहती थीं। सोमवार रात गेम का 50वां यानी आखिरी टास्क था.इसी टास्क को पूरा करने के लिए बच्चियों ने यह खौफनाक कदम उठाया। बताया जा रहा है कि बालकनी से कूदने के लिए उन्होंने दो स्टेप की सीढ़ी का सहारा लिया, ताकि रेलिंग के ऊपर पहुंच सकें। इसके बाद तीनों ने एक साथ छलांग लगा दी।
बीच वाली बहन बनी ‘कमांड देने वाली’
जांच में एक और हैरान करने वाला पहलू सामने आया है। 14 साल की प्राची, जो तीनों में बीच वाली बहन थी, इस गेम में लीडर की भूमिका में थी। पुलिस के मुताबिक वही टास्क बताती थी और बाकी दोनों बहनें उसी के निर्देशों का पालन करती थीं.यानी अनजाने में ही घर के भीतर एक ऐसा माहौल बन गया था, जहां एक बच्ची फैसले ले रही थी और बाकी उसकी बात मान रही थीं। यह सिर्फ गेम नहीं रह गया था, बल्कि मानसिक पकड़ का मामला बन चुका था।
सिर्फ दो शब्दों का सुसाइड नोट
मौके से पुलिस को एक छोटा सा सुसाइड नोट भी मिला है। एक पन्ने पर सिर्फ दो शब्द लिखे थे- “Mummy Papa Sorry” इन दो शब्दों ने पूरे परिवार को भीतर तक तोड़ दिया। न कोई आरोप, न कोई शिकायत… बस माफी, और फिर हमेशा के लिए खामोशी।
मोबाइल में छुपा है ‘आखिरी टास्क’ का सच
डीसीपी निमिष पाटिल और एसीपी अतुल कुमार ने बताया कि तीनों बच्चियों निशिका, प्राची और पाखी के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह गेम किस प्लेटफॉर्म से जुड़ा था, क्या इसके पीछे कोई बाहरी कंट्रोलर था, और बच्चियां किन लोगों के संपर्क में थीं.एसीपी अतुल कुमार के मुताबिक, सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बच्चियों को लोनी के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
डिजिटल दुनिया का डरावना सच
यह मामला सिर्फ आत्महत्या का नहीं है। यह बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत और ऑनलाइन गेमिंग के खतरों की एक डरावनी तस्वीर है। मोबाइल गेम अब केवल मनोरंजन नहीं रह गए हैं। कई बार ये बच्चों के दिमाग पर इस कदर हावी हो जाते हैं कि सही-गलत की समझ खत्म हो जाती है. घर में सब कुछ ठीक दिखता है, लेकिन मोबाइल के भीतर एक अलग ही दुनिया चल रही होती है। फिलहाल पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है। सबसे बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है.क्या यह सिर्फ एक गेम था, या किसी ने पर्दे के पीछे से तीन मासूम जिंदगियों को मौत की ओर धकेला?
