राष्ट्र के कल्याण के लिए बना संघ : डॉ. भागवत

‘संघ यात्रा के 100 वर्षः नए क्षितिज’ : मुंबई के वर्ली में व्याख्यानमाला का शुभारंभ
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित ‘संघ यात्रा के 100 वर्षः नए क्षितिज’ व्याख्यानमाला के क्रम में शनिवार को मुंबई के वर्ली स्थित नेहरू सेंटर ऑडिटोरियम में दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ।
कार्यक्रम के पहले दिन सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने संघ की विचारधारा, उद्देश्य और समाज में उसकी भूमिका को लेकर कई अहम बातें कहीं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संघ की स्थापना न तो सत्ता के लिए हुई थी और न ही किसी के विरोध में, बल्कि राष्ट्र और समाज के कल्याण के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने कहा कि संघ का मूल कार्य संपूर्ण समाज को संगठित करना है, इसके अतिरिक्त उसका कोई अन्य लक्ष्य नहीं है।
नई दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता में सफल संवादों के बाद वर्ली में आयोजित यह कार्यक्रम विचार और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हुआ। उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाला मुसलमान और ईसाई भी उतना ही भारत का है, जितना कोई अन्य नागरिक। संघ किसी को अलग नहीं करता, बल्कि सबको जोड़ने की बात करता है। भारत की संस्कृति विविधताओं को साथ लेकर चलने वाली संस्कृति है।
भाषण नहीं, आचरण से बनेगा भारत विश्व गुरु
सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कहा कि भारत विश्व गुरु बनेगा, लेकिन यह भाषणों से नहीं बल्कि अपने उदाहरण से बनेगा। उन्होंने कहा कि अगर कोई भारत का है, तो यह स्वभाव उसके भीतर स्वाभाविक रूप से होता है। भारत की पहचान उसके आचरण, संस्कृति और जीवन मूल्यों से है, जिन्हें अपनाकर ही देश विश्व पटल पर नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है।
हिंदुओं की चार श्रेणियां और सामाजिक आत्मविस्मृति
सरसंघचालक ने समाज में हिंदुओं की चार श्रेणियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक वर्ग गर्व से कहता है कि हम हिंदू हैं। दूसरा वर्ग मानता है कि हिंदू होना सामान्य बात है, इसमें गर्व या संकोच की आवश्यकता नहीं। तीसरा वर्ग ऐसा है जो धीरे से अपनी पहचान बताता है और चौथा वह है जो अपनी पहचान ही भूल चुका है।
शाखा में सब भारत माता के पुत्र होते हैं
मुसलमानों और ईसाइयों की भागीदारी पर पूछे गए सवाल पर सरसंघचालक ने कहा कि शाखा में आने वाला व्यक्ति किसी जाति या पंथ के रूप में नहीं, बल्कि भारत माता के पुत्र के रूप में आता है। संघ किसी की गणना धर्म के आधार पर नहीं करता। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उद्देश्य समाज को संगठित करना है, ताकि राष्ट्र के सभी अच्छे कार्य सुचारु रूप से पूरे हो सकें।
सलमान खान भी पहुंचे डॉ. भागवत को सुनने
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान भी शामिल हुए। वे फिल्ममेकर सुभाष घई और गीतकार प्रसून जोशी के साथ मंच के सामने बैठे और सरसंघचालक मोहन भागवत का भाषण सुना।
