गणतंत्र दिवस 2026: नई परंपरा, नदियों के नाम पर दर्शक दीर्घाएं और 'सिंदूर' फॉर्मेशन

गणतंत्र दिवस 2026: नई परंपरा, नदियों के नाम पर दर्शक दीर्घाएं और सिंदूर फॉर्मेशन
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इस बार 2026 की गणतंत्र दिवस परेड में नई परंपरा देखने को मिलेगी, जिसमें दर्शकों के बैठने की जगहों को थीम के अनुसार बदला गया है। परेड के रास्ते में बनी बैठने की जगहों को पहली बार नंबरों से नहीं पहचाना जाएगा। इसके बजाय, लोगों के बैठने की जगह का नाम देश की प्रमुख नदियों के नाम पर रखा गया है.

नदियों के नाम में छुपा इतिहास और प्रतीक

इस गणतंत्र दिवस पर 'ऑपरेशन सिंदूर' में अहम भूमिका निभाने वाले लड़ाकू विमान भी कर्तव्य पथ पर गरजेंगे। मुख्य आकर्षणों में से एक स्पेशल 'सिंदूर' फॉर्मेशन होगा, जो ऑपरेशन की सफलता और संकल्प का प्रतीक होगा। राफेल, सुखोई, जगुआर और मिग-29 लड़ाकू विमानों सहित एक दर्जन से अधिक विमान कर्तव्य पथ के ऊपर फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे। इसके अलावा, लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और ट्रांसपोर्ट विमानों वाले कई अन्य फॉर्मेशन भी इस भव्य हवाई प्रदर्शन का हिस्सा होंगे।

नई 'भैरव बटालियन' करेगी मार्च

पहली बार, भारतीय सेना की नई 'भैरव बटालियन' कर्तव्य पथ पर मार्च करेगी और सुप्रीम कमांडर को सलामी देगी। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कारगिल से इन नई लाइट कमांडो बटालियनों के गठन की घोषणा की थी। अधिकारियों के अनुसार, पांच भैरव बटालियन पहले ही बन चुकी हैं। उन्होंने बताया कि सेना छह महीने के भीतर कुल 25 ऐसी बटालियन बनाने की योजना बना रही है। प्रत्येक बटालियन में लगभग 250 बेहतरीन सैनिक होंगे, जिन्हें तेज, अचानक और उच्च प्रभाव वाले ऑपरेशनों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।

ये होंगे दीर्घाओं के नाम

पहले जिन जगहों की पहचान केवल नंबरों से होती थी, अब इन दीर्घाओं का नाम यमुना, ब्यास, ब्रह्मपुत्र, गंगा, तीस्ता, चंबल, सतलुज, सोन, चिनाब, रावी, वैगई, पेरियार, गंडक, पेन्नार, नर्मदा, घाघरा, गोदावरी, कृष्णा, महानदी, सिंधू, कोसी, झेलम और कावेरी जैसी प्रमुख नदियों के नाम पर रखा गया है.

ये नदियां देश के कई क्षेत्रों और राज्यों से होकर गुजरती हैं और स्थानीय आबादी के लिए जीवनरेखा का काम करती हैं। सदियों से इन नदियों ने देश की सभ्यता, अर्थव्यवस्था और संस्कृति को आकार दिया है।

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