गणतंत्र दिवस पर भावुक हुए प्रेमानंद महाराज, बोले-मृत्यु से नहीं डरते सच्चे देशभक्त

देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है और कर्तव्य पथ पर भव्य परेड के ज़रिये भारत की ताकत, परंपरा और प्रगति दिखाई जा रही है. इसी माहौल के बीच मथुरा-वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे राष्ट्रप्रेम और बलिदान की भावना पर भावुक होकर अपनी बात रखते दिखे.
‘राष्ट्रप्रेम केवल नारा नहीं’
प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि राष्ट्रप्रेम सिर्फ शब्दों या मंच से लगाए जाने वाले नारों तक सीमित नहीं होता। यह वह भावना है, जो इंसान को अपने प्राणों से भी ऊपर देश को रखने की प्रेरणा देती है. उनके मुताबिक, सच्चे देशभक्त वही हैं जिन्होंने वंदे मातरम कहते हुए फांसी का फंदा स्वीकार किया। जिनकी गर्दनें काट दी गईं, लेकिन उनके कदम कभी पीछे नहीं हटे। बलिदान उनके लिए मजबूरी नहीं, बल्कि चुना हुआ रास्ता था।
सैनिकों में दिखता है वही जज्बा
महाराज ने अपने संबोधन में सैनिकों का ज़िक्र करते हुए कहा कि वही जज्बा आज भी हमारे जवानों में दिखाई देता है। हथेली पर प्राण रखकर तिरंगे की रक्षा करना उनके लिए कर्तव्य है, कोई सौदा नहीं. वे कहते हैं, जैसे कोई भक्त अपने आराध्य देव के सामने पुष्पांजलि लेकर नतमस्तक होता है, वैसे ही हमारे जवान अपना सर्वस्व राष्ट्र को अर्पित करने के लिए हर समय तैयार रहते हैं। जहां गोलियों की बौछार होती है, वहीं वे अपनी छाती आगे कर देते हैं।
‘सच्चा देशभक्त मृत्यु से नहीं डरता’
प्रेमानंद महाराज का कहना है कि सच्चा राष्ट्रप्रेमी या ईश्वर-प्रेमी मृत्यु से नहीं डरता। डर सिर्फ शरीर से जुड़ा होता है, जो भोग, धन और भौतिक सुखों में उलझा रहता है. जो व्यक्ति अपने जीवन से ऊपर किसी बड़े आदर्श को मान लेता है.चाहे वह राष्ट्र हो या ईश्वर उसके लिए मृत्यु अंत नहीं, बल्कि कर्तव्य बन जाती है. यही वजह है कि सच्चे देशभक्त इतिहास में सिर्फ नाम बनकर नहीं रहते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाते हैं.
