NCP विलय पर ब्रेक, सुनेत्रा पवार के डिप्टी CM बनने से बढ़ी दूरी, शरद ने शपथ से बनाई दूरी

NCP विलय पर ब्रेक, सुनेत्रा पवार के डिप्टी CM बनने से बढ़ी दूरी, शरद ने शपथ से बनाई दूरी
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सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम बनने के सवाल पर शरद पवार ने चौंकाने वाला बयान दिया है। इससे एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की संभावनाएं कमजोर पड़ीं।

मुंबईः महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय पर अब लगभग पूर्ण विराम लगता दिख रहा है। एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार के ताज़ा बयान ने साफ कर दिया है कि शरद पवार गुट और अजित पवार गुट के बीच दूरियां पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुकी हैं। वहीं, महाराष्ट्र के दिवंगत डिप्टी सीएम अजित पवार की पत्नी को एनसीपी विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। वह महाराष्ट्र की पहली डिप्टी सीएम होंगी। इसी बीच अनबन की खबरें सामने आ रही हैं।

शरद पवार ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि उन्हें सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र का उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की जानकारी मीडिया के जरिए मिली। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फैसले को लेकर उनसे न तो कोई चर्चा हुई और न ही उन्हें कोई आधिकारिक सूचना दी गई। सुनेत्रा पवार शनिवार शाम को डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने वाली हैं।

सोशल मीडिया से मिली शपथ की जानकारी

31 जनवरी 2026 को पुणे जिले के बारामती में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शरद पवार ने कहा, सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम बनने की जानकारी मुझे मीडिया से मिली। यह फैसला उनकी पार्टी ने लिया होगा।” उन्होंने संकेत दिए कि इस निर्णय में प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे वरिष्ठ नेताओं की भूमिका रही होगी।

शपथ समारोह में नहीं जाएंगे

शरद पवार ने यह भी साफ किया कि पवार परिवार का कोई भी सदस्य शपथ समारोह में शामिल नहीं होगा, क्योंकि उन्हें न तो निमंत्रण मिला और न ही इस विषय पर कोई संवाद हुआ। यह बयान राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि अजित पवार गुट ने सभी फैसले स्वतंत्र रूप से लिए हैं।

दरअसल, 30 जनवरी को अजित पवार गुट के विधायकों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाए जाने की मांग रखी थी। तभी यह स्पष्ट हो गया था कि यह गुट शरद पवार गुट को दरकिनार कर अपनी राजनीतिक दिशा तय कर रहा है।

2023 में अगल हो गई थी एनसीपी

एनसीपी में यह विभाजन साल 2023 में सामने आया था, जब अजित पवार ने शरद पवार से अलग होकर बीजेपी-शिवसेना गठबंधन वाली महायुति सरकार का दामन थाम लिया। इसके बाद अजित पवार गुट को आधिकारिक एनसीपी का दर्जा मिला, जबकि शरद पवार का गुट एनसीपी (एसपी) के नाम से पहचाना जाने लगा।

अजित पवार के निधन से बदली राजनीति

28 जनवरी 2026 को हुए विमान हादसे में अजित पवार की मौत के बाद राजनीतिक हालात तेजी से बदले। पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर वैक्यूम बन गया, जिसे भरने के लिए सुनेत्रा पवार को विधायक दल का नेता चुना गया। पार्टी में उन्हें अध्यक्ष या वर्किंग प्रेसिडेंट बनाए जाने की भी चर्चा है।

वर्तमान में प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे जैसे नेता अजित पवार गुट की कमान संभाले हुए हैं, जबकि शरद पवार गुट में सुप्रिया सुले और रोहित पवार जैसे नेता सक्रिय हैं और यह गुट विपक्षी महाविकास अघाड़ी का हिस्सा है।

पवार के निधन के बाद विलय मुश्किल

अजित पवार की मौत से पहले दोनों गुटों के विलय को लेकर बातचीत चल रही थी। खुद शरद पवार ने स्वीकार किया था कि अजित पवार दोनों धड़ों को एक करना चाहते थे और 12 फरवरी 2026 को विलय की संभावित तारीख भी तय मानी जा रही थी। लेकिन मौजूदा घटनाक्रम के बाद यह विलय बेहद मुश्किल नजर आ रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, सुनेत्रा पवार और उनके बेटों पार्थ और जय ने विलय पर चर्चा के लिए बुलाई गई शरद पवार की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। साथ ही अजित गुट के कई वरिष्ठ नेता नहीं चाहते कि विलय हो, क्योंकि इससे शरद पवार गुट के नेताओं का राजनीतिक प्रभाव बढ़ सकता है।

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