बीकानेर से जयपुर तक गरजे जगुआर: सड़कों पर ब्रह्मोस, आसमान में अपाचे

जयपुर। गुरुवार की सुबह जयपुर की सड़कों पर कुछ अलग ही माहौल था. आम दिनों में जहां ट्रैफिक और चहल-पहल रहती है, वहीं आज टैंकों की गड़गड़ाहट, मिसाइलों की मौजूदगी और आसमान में लड़ाकू विमानों की दहाड़ सुनाई दे रही थी, मौका था आर्मी डे परेड का और यह परेड कई मायनों में ऐतिहासिक रही ।
पहली बार आर्मी एरिया से बाहर हुई आर्मी-डे परेड
भारतीय सेना ने इस बार परंपरा तोड़ते हुए परेड को कैंटोनमेंट से बाहर आम जनता के बीच लाने का फैसला किया, जगतपुरा के महल रोड पर करीब तीन किलोमीटर लंबे रूट पर हुई परेड को देखने डेढ़ लाख से ज्यादा लोग पहुंचे.बच्चों के कंधों पर बैठे झंडे लहराते नजर आए, तो बुजुर्ग मोबाइल में पल-पल के दृश्य कैद करते दिखे । करीब सुबह दस बजे परेड स्थल पर पहुंचे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने पूरे आयोजन का निरीक्षण किया और जवानों का उत्साह बढ़ाया ।
सड़कों पर ब्रह्मोस, भीष्म और अर्जुन टैंक
जयपुर की सड़कों पर जब ब्रह्मोस मिसाइल, भीष्म टैंक, अर्जुन टैंक और पिनाका मल्टी-रॉकेट लॉन्चर गुजरे, तो हर नजर ठहर गई भीष्म टैंक अपनी 125 MM स्मूथ बोर गन और 5 किमी तक मार करने वाली मिसाइल क्षमता के साथ सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहा. अर्जुन टैंक जो आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है अपनी भारी बनावट और ताकतवर हथियारों के साथ लोगों में गर्व का भाव भरता दिखा, वहीं पिनाका लॉन्चर ने यह दिखाया कि भारतीय सेना अब लंबी दूरी की मारक क्षमता में कितनी आगे निकल चुकी है ।
रोबोटिक डॉग और मॉड्यूलर ब्रिज ने चौंकाया
इस परेड में सिर्फ भारी हथियार ही नहीं थे, पहाड़, रेगिस्तान और दुर्गम रास्तों पर चलने वाले रोबोटिक डॉग्स ने भविष्य की युद्ध तकनीक की झलक दी। कैमरे और सेंसर से लैस ये रोबोट सैनिकों के लिए खतरे भरे इलाकों में आंख और कान बन सकते हैं. इसके साथ ही सेना ने 46 मीटर लंबे मॉड्यूलर ब्रिज का भी प्रदर्शन किया जिसे जरूरत पड़ने पर कुछ ही समय में नदियों और खाइयों पर खड़ा किया जा सकता है ।
आसमान में अपाचे, बीकानेर से पहुंचे जगुआर
जमीन पर ताकत दिख रही थी, तो आसमान भी पीछे नहीं था, बीकानेर के नाल एयरबेस से उड़ान भरकर आए जगुआर फाइटर जेट जब जयपुर के ऊपर से गुजरे तो लोगों ने तालियों और नारों से स्वागत किया । इसके अलावा, अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर और रूद्र हेलिकॉप्टर ने दुश्मन पर हमला करने वाले युद्धाभ्यास का प्रदर्शन किया. खास बात यह रही कि 251 आर्मी एविएशन स्क्वॉड्रन की कैप्टन हंसजा शर्मा, रूद्र हेलिकॉप्टर की पहली महिला पायलट के रूप में सामने आईं। उनके नेतृत्व में ‘हेलिना’ एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल का प्रदर्शन किया गया ।
सम्मान का पल और दर्द की तस्वीर
परेड की शुरुआत ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए जवानों को सेना मेडल (वीरता) से सम्मानित करने के साथ हुई. अशोक चक्र, परमवीर चक्र और महावीर चक्र से सम्मानित अधिकारी परेड का नेतृत्व कर रहे थे. लेकिन इसी सम्मान के बीच एक भावुक पल भी आया । 1 पैरा स्पेशल फोर्स के शहीद लांस नायक प्रदीप कुमार की मां जैसे ही मंच पर मेडल लेने पहुंचीं, वे अचानक बेहोश हो गईं पलभर में माहौल बदल गया। सैन्य अधिकारियों ने उन्हें संभाला और तुरंत एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया ।
भारत-नेपाल मित्रता का संदेश
इस परेड में नेपाल आर्मी बैंड की मौजूदगी भी खास रही. बैंड की धुनों ने यह संदेश दिया कि सीमाओं के बावजूद भारत और नेपाल की सेनाओं के बीच रिश्ता आज भी मजबूत और भरोसेमंद है ।
