भारत की परंपरा ज्ञान की परंपरा है: होसबाले

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विश्व पुस्तक मेले में 'मंत्र-विप्लव' पुस्तक का लोकार्पण

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने गुरुवार को भारतमंडपम में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में 'मंत्र-विप्लव' पुस्तक का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी, पुस्तक के लेखक तरुण विजय और प्रभात प्रकाशन के चेयरमैन प्रभात कुमार भी उपस्थित रहे।

लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत की परंपरा ज्ञान की परंपरा है। इसी से यश और वैभव सभी की प्राप्ति हुई। हमारे पूर्वजों को इस विषय पर स्पष्टता थी। उन्होंने कहा कि ज्ञान व्यक्ति को सही दिशा में ले जाता है, लेकिन ज्ञान के साथ भक्ति भी आवश्यक है, क्योंकि बिना भक्ति के ज्ञान से अहंकार उत्पन्न होता है।

संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बताया कि महर्षि अरविन्दो ने स्वतंत्र भारत में तीन कार्य करने की आवश्यकता बताई थी। पहला, अपने देश की प्राचीन ज्ञान परंपरा, जो बिखरी पड़ी है, उसको एकत्र करना। दूसरा, इसे आज के समय के अनुरूप, जीवन उपयोगी और मानव उपयोगी बनाना। तीसरा, नए ज्ञान का सृजन करना।

साथ ही सरकार्यवाह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के शब्दों और उनकी गहनता पर अभी बहुत अध्ययन करना बाकी है। उन्होंने वामपंथी विमर्श पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इतिहास और सत्य को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास हुआ है। यह अज्ञान के कारण नहीं, बल्कि पूर्वनिर्धारित एजेंडा के चलते हुआ है। जैसे-जैसे दूसरों का हमारे मन और बुद्धि पर नियंत्रण बढ़ा, 'मंत्र-विप्लव' की स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने कहा कि सम्मोह से बुद्धि का नाश होता है, और बुद्धि के नाश से सर्वनाश।

इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि हमारे समाज के बौद्धिक प्रतिष्ठान का एक हिस्सा एम-फैक्टर, यानी मैकाले, मुगल और मार्क्स से प्रभावित हो गया है। समाज के सामने दो प्रकार की चुनौतियां हैं एक, जो दिखाई देती है, और दूसरा, जो संक्रमण की तरह दिखाई नहीं देती। तरुण विजय की पुस्तक मंत्र-विप्लव इन नहीं दिखाई देने वाली चुनौतियों को रेखांकित करती है और उनसे निपटने का मार्ग भी प्रस्तुत करती है।

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