भारत-EU ट्रेड डील: लग्जरी कारों पर टैरिफ 110% से घटकर 10%, ट्रंप के वित्तमंत्री का चौंकाने वाला बयान

नई दिल्ली। करीब दो दशक की बातचीत के बाद आखिरकार भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच फ्री ट्रेड डील पर मुहर लग गई है, इस समझौते का ऐलान 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में किया गया. जिसकी सह-अध्यक्षता यूरोपीय परिषद के राष्ट्रपति एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने की। दोनों नेता इस समय भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं और 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर भी शामिल हुए। इस डील को सिर्फ व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी के बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
पीएम मोदी बोले– ‘मदर ऑफ ऑल डील’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और EU के बीच FTA पर सहमति बन चुकी है, पीएम मोदी ने कहा पूरी दुनिया में इस डील की चर्चा हो रही है और इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील’ कहा जा रहा है। उनका कहना था कि इस समझौते से भारत और यूरोप के बीच व्यापार, सुरक्षा-टेक्नोलॉजी और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग नई ऊंचाई पर जाएगा।
लग्जरी कारें और शराब होंगी सस्ती
इस डील का सबसे सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा. भारत ने यूरोप से आने वाले कई उत्पादों पर भारी टैक्स घटाने या खत्म करने पर सहमति दी है। यूरोपीय कारों के मामले में भारत ने हर साल 2.5 लाख गाड़ियों का कोटा तय किया है। इन पर आयात शुल्क को चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10% तक लाया जाएगा, अभी कई लग्जरी कारों पर 110% तक टैक्स लगता है। BMW-मर्सिडीज और पॉर्श जैसी कंपनियों के लिए अब भारतीय बाजार ज्यादा खुला होगा।
शराब और बीयर पर बड़ा बदलाव
यूरोपीय देशों की शराब पर अभी करीब 150% टैरिफ लगता है। समझौते के बाद इसे घटाकर 20–30% किया जाएगा। बीयर पर टैक्स 110% से घटकर 50% होगा, जबकि स्पिरिट्स पर करीब 40% शुल्क लगेगा। यानी आने वाले समय में यूरोपीय शराब भारत में सस्ती मिल सकती है। डील के तहत मेडिकल और सर्जिकल उपकरणों के करीब 90% उत्पाद अब टैक्स-फ्री होंगे। इससे भारत के हेल्थकेयर सेक्टर को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। विमान और अंतरिक्ष से जुड़े लगभग सभी उत्पादों पर भी टैरिफ खत्म किया जाएगा। इससे भारत के एविएशन सेक्टर को टेक्नोलॉजी और लागत, दोनों स्तर पर फायदा होगा। मशीनरी पर लगने वाला 44% और रसायनों पर 22% तक का टैक्स भी लगभग खत्म हो जाएगा।
भारत को क्या मिलेगा इस डील से
भारत के लिए यह समझौता सिर्फ आयात सस्ता होने तक सीमित नहीं है। गारमेंट, लेदर और फुटवियर जैसे सेक्टर में भारतीय उत्पादों पर लगने वाली 10% ड्यूटी कम या पूरी तरह खत्म हो सकती है। इससे रोजगार और निर्यात दोनों को बढ़ावा मिलेगा। फार्मा और केमिकल सेक्टर में व्यापार 20–30% सालाना बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि दवाओं की मंजूरी और रेगुलेटरी प्रक्रियाएं आसान होंगी। इसके अलावा यूरोप के कार्बन टैक्स से भारत को राहत मिलने की उम्मीद है, जिससे स्टील, एल्युमिनियम और हाइड्रोजन सेक्टर को फायदा हो सकता है।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी एजेंडे में
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यूरोपीय यूनियन की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास से मुलाकात के बाद कहा कि भारत-EU के बीच सुरक्षा और रक्षा सहयोग और मजबूत होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि फ्रांस और जर्मनी जैसे EU देश भारत में डिफेंस फैक्ट्रियां लगा सकते हैं, जिससे भारतीय कंपनियों को यूरोप के डिफेंस फंड्स तक पहुंच मिलेगी।
अमेरिका की नाराजगी भी सामने आई
इस डील को लेकर अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बयान दिया कि यूरोप इस समझौते के जरिए अपने ही खिलाफ चल रहे युद्ध को फंड कर रहा है।
