अमेरिका के कब्जे से भारत को हो सकता है अरबों डॉलर का फायदा

वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी का मामला, रूस के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें
अमेरिका ने वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटनाक्रम पर भारत सरकार ने बयान जारी कर चिंता जताई है। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस बदले हुए घटनाक्रम से भारत को बड़ा फायदा हो सकता है। दरअसल, लंबे समय से अटका भारत का करीब एक अरब डॉलर का बकाया भुगतान वापस मिल सकता है। साथ ही वेनेजुएला में भारत द्वारा तेल उत्पादन शुरू किया जा सकता है।
भारत कभी वेनेजुएला में कच्चे तेल का प्रमुख उत्पादक देश था, जो एक समय वेनेजुएला से रोजाना करीब चार लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल आयात करता था। हालांकि, वेनेजुएला पर कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने 2022 में लैटिन अमेरिकी देश से तेल खरीदना बंद कर दिया। भारत की प्रमुख विदेशी उत्पादक कंपनी, ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल), पूर्वी वेनेजुएला में सैन क्रिस्टोबल तेल क्षेत्र का संयुक्त रूप से संचालन करती है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते महत्वपूर्ण तकनीक, उपकरण और सेवाओं तक पहुंच बाधित हो गई। इससे वेनेजुएला में तेल भंडारों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ और अब यह घटकर सिर्फ पांच हजार से लेकर दस हजार बैरल प्रतिदिन तक रह गया है।
भारत को मिल सकता है अरबों डॉलर का बकाया
वेनेजुएला 2014 तक इस क्षेत्र में अपनी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी पर देय लाभांश के रूप में ओएनजीसी को 53 करोड़ अमेरिकी डॉलर का भुगतान करने में विफल रहा। बाद में भी लगभग इतनी ही राशि का भुगतान नहीं किया गया। काराकास ने ऑडिट की अनुमति नहीं दी, जिससे दावों का निपटान रुका हुआ है। अब विश्लेषक और ऊर्जा अधिकारी मान रहे हैं कि अमेरिका के वेनेजुएला के तेल भंडार पर कब्जे के बाद प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है। मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने कहा कि एक बार प्रतिबंधों में ढील मिलने के बाद, ओएनजीसी वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल में तेल उत्पादन के लिए जरूरी उपकरण ले जा सकता है। इससे उत्पादन में तेजी आने की उम्मीद है। साथ ही ओएनजीसी सैन क्रिस्टोबल से होने वाले ऐसे राजस्व से अपने पिछले करीब एक अरब अमेरिकी डॉलर के बकाए की वसूली कर सकता है।
रूस से कम हो सकती है भारत की तेल खरीद
वेनेजुएला के घटनाक्रम का असर रूस पर भी पड़ सकता है। दरअसल, अमेरिका की नाराजगी के बाद भारत अपने तेल खरीद में विविधता ला रहा है। अब जब वेनेजुएला के तेल भंडार पर अमेरिका का कब्जा हो गया है, तो भारत वेनेजुएला से तेल खरीद बढ़ा सकता है। इससे भारत की रूस से तेल खरीद कम हो सकती है। ओएनजीसी और दूसरी भारतीय कंपनियां वेनेजुएला में और भी तेल फील्ड ले सकती हैं और वहां तेल उत्पादन शुरू कर सकती हैं। कैराबोबो-1 एरिया वेनेजुएला का भारी तेल क्षेत्र है, जिसमें भारत की दिलचस्पी है। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका, वेनेजुएला की सबसे बड़ी तेल कंपनी पीडीवीएसए का पुनर्गठन कर सकता है और इसमें अमेरिका की अहम भूमिका होगी।अटेका यारी एक अरब डॉलर का बकाया भुगतान मिल सकता है वापस
मादुरो की गिरफ्तारी पर शशि थरूर ने जताई नाराजगी
कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ राजनयिक शशि थरूर ने वैश्विक राजनीति की मौजूदा स्थिति पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर को बीते कुछ वर्षों से लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है और आज दुनिया में 'ताकत ही सही' का सिद्धांत हावी होता जा रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में शशि थरूर ने लिखा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और यूएन चार्टर अब केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। उनके मुताबिक, मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में कानून के बजाय ताकत का बोलबाला है। थरूर ने इशारों-इशारों में कहा कि आज की दुनिया में 'जंगल का कानून' चल रहा है, जहां शक्तिशाली देश अपने हितों के लिए नियमों को तोड़ने से नहीं हिचकते। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत बताया। थरूर ने यह टिप्पणी लेखक कपिल कोमिरेड्डी की पोस्ट के जवाब में की, जिसमें अमेरिका की कार्रवाई को लेकर दोहरे मानदंडों की बात कही गई थी।
