कितनी मुस्लिम महिलाओं को बुर्के में प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति देखा?

हिजाब वाली प्रधानमंत्री का सपना देख रहे ओवैसी से भाजपा का सवाल
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के “हिजाब पहनने वाली महिला के एक दिन प्रधानमंत्री बनने” संबंधी बयान पर राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी के सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने ओवैसी से सवाल करते हुए उनके बयान पर कड़ा प्रहार किया है।
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि दुनिया के कई मुस्लिम देशों में महिलाएं प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति रह चुकी हैं, लेकिन उनमें से कितनी महिलाओं को बुर्का पहने देखा गया है। उन्होंने सवाल किया,
“मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के सदर असदुद्दीन ओवैसी से मैं पूछना चाहता हूं कि कई देशों में मुस्लिम महिलाएं प्रधानमंत्री रही हैं, आपने उनमें से कितनों को बुर्का पहने देखा है?
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बांग्लादेश में बेगम खालिदा जिया और शेख हसीना दोनों प्रधानमंत्री रहीं, पाकिस्तान में बेनजीर भुट्टो प्रधानमंत्री बनीं, लेकिन क्या किसी ने उन्हें बुर्के में देखा? इसी तरह दुनिया के सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया की पूर्व प्रधानमंत्री मेघावती सुकर्णोपुत्री को भी कभी बुर्के में नहीं देखा गया।
सुधांशु त्रिवेदी ने आगे कहा कि पैगंबर मुहम्मद के खानदान से जुड़े शाह हुसैन और जॉर्डन के शाही परिवार की महिलाओं को भी कभी बुर्का पहने नहीं देखा गया। उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि मुस्लिम महिलाओं को लेकर ओवैसी और उनके जैसे नेताओं का नजरिया क्या है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े-बड़े मुस्लिम देश भी वह काम नहीं कर रहे हैं, जिस पर भारत में सियासत की जा रही है। उन्होंने कहा, “जो काम पैगंबर मुहम्मद के सीधे वंशजों से जुड़े देशों में नहीं हो रहा है, उस पर सियासत करने के लिए न सिर्फ ओवैसी, बल्कि इंडी गठबंधन के तमाम लोग उतारू हैं।
जनसभा में यह कहा था ओवैसी ने
गौरतलब है कि असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के सोलापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि पाकिस्तान के संविधान में लिखा है कि केवल एक ही मजहब का व्यक्ति प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बन सकता है, जबकि बाबा साहब आंबेडकर के संविधान के अनुसार भारत का कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मेयर बन सकता है।
ओवैसी ने कहा था, “असदुद्दीन ओवैसी का ख्वाब यह है कि एक दिन इस देश में ऐसा वक्त आएगा, जब शायद आप और हम नहीं रहेंगे, लेकिन एक हिजाब पहनने वाली बेटी इस देश की वजीर-ए-आजम बनेगी।
