दिल्ली ब्लास्ट केस में ED का एक्शन: अल-फलाह यूनिवर्सिटी की 140 करोड़ की संपत्ति अटैच

नई दिल्ली । दिल्ली ब्लास्ट मामले की जांच अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस केस से जुड़े फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर सख्त कार्रवाई करते हुए करीब 140 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच कर ली है. साथ ही यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी और उससे जुड़े ट्रस्ट के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई है ।
54 एकड़ जमीन से लेकर हॉस्टल तक अटैच
ED की ओर से अटैच की गई संपत्तियों की लिस्ट काफी बड़ी है इसमें फरीदाबाद के धौज इलाके में 54 एकड़ जमीन, अल-फलाह यूनिवर्सिटी की मुख्य इमारत, अलग-अलग स्कूल और विभागों की बिल्डिंग और स्टूडेंट्स हॉस्टल शामिल हैं, ED ने इन सभी संपत्तियों को अपराध की आय (Proceeds of Crime) मानते हुए PMLA कानून के तहत जब्त किया है ।
दिल्ली ब्लास्ट से कैसे जुड़ा यूनिवर्सिटी का नाम?
अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम उस वक्त सुर्खियों में आया था, जब 10 नवंबर को दिल्ली में लाल किले के पास चलती कार में ब्लास्ट हुआ था इस धमाके में 15 लोगों की मौत हुई थी जांच में सामने आया कि यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉ. उमर उन नबी इस ब्लास्ट में शामिल थे, इसके बाद जांच एजेंसियों की नजर सीधे यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े नेटवर्क पर गई ।
व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल की जांच में भी खुलासे
सिर्फ दिल्ली ब्लास्ट ही नहीं बल्कि व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल की जांच में भी अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम सामने आया इस केस में NIA, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिलकर कार्रवाई की और डॉ. मुजम्मिल, डॉ. शाहीन सईद समेत 10 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया ।
12 घंटे की रेड और चेयरमैन की गिरफ्तारी
ED ने 18 नवंबर को दिल्ली में अल-फलाह ग्रुप के दफ्तर पर छापा मारा था करीब 12 घंटे चली सर्च के बाद चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया गया । ED ने कोर्ट में बताया था कि यूनिवर्सिटी और उसके नियंत्रण वाले ट्रस्ट ने झूठी मान्यता और पहचान के दावे करके छात्रों और अभिभावकों को गुमराह किया ।
ED का दावा 415 करोड़ की अपराध की आय
जांच के दौरान ED ने कोर्ट को बताया कि फर्जी दावों और गलत तरीकों से 415.10 करोड़ रुपए की अपराध की आय अर्जित की गई यही रकम आगे अलग-अलग तरीकों से निवेश और ट्रांसफर की गई ।
एक पते पर 9 शेल कंपनियां
ED की जांच में कई चौंकाने वाली अनियमितताएं भी सामने आईं, 9 शेल कंपनियां एक ही पते पर रजिस्टर्ड मिलीं कई कंपनियों में एक ही मोबाइल नंबर इस्तेमाल किया गया. EPFO से जुड़ा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला. इन तथ्यों ने यूनिवर्सिटी के फाइनेंशियल स्ट्रक्चर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए ।
छात्रों की पढ़ाई पर असर न पड़े ED
ED ने यह भी साफ किया कि अगर कोर्ट अस्थायी जब्ती को सही ठहराता है, तो सरकार यूनिवर्सिटी के संचालन के लिए एक अधिकारी नियुक्त कर सकती है ।
