कोयला मंत्रालय और सरकार बना रही भविष्य के लिए योजना
भविष्य में रसोई गैस का कोई संकट न हो, घरों में खाना पकाने के लिए गैस की किल्लत न हो और आसानी से पूरे परिवार का खाना तैयार हो सके इसी दिशा में केंद्र सरकार और कोयला मंत्रालय काम कर रहे हैं।
इसके तहत अब कोयले से रसोई गैस बनाने की योजना बनाई गई है, जिससे परिवार बिना परेशानी के खाना पका सकेंगे। केंद्र सरकार और कोयला मंत्रालय ने कोयले से रसोई गैस (एलपीजी) बनाने की योजना तैयार की है। यह भारत के परिवारों के लिए एक अच्छी खबर मानी जा रही है।
दरअसल, कोयला मंत्रालय की कोल गैसीफिकेशन योजना के तहत इस दिशा में युद्धस्तर पर काम चल रहा है। इस पहल का उद्देश्य स्वच्छ और कम प्रदूषण वाली ऊर्जा को बढ़ावा देना है। 8500 करोड़ रुपए की इस योजना से भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।कंपनियों की बढ़ती भागीदारी से साफ है कि देश अब नई तकनीकों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इस पहल से यह भी स्पष्ट होता है कि उद्योग पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से हटकर पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों की ओर अग्रसर हो रहा है।
कोयले से कैसे बनेगी गैस
भारत के विशाल कोयला भंडार को देखते हुए अनुमान है कि यह लगभग 400 अरब टन है। कोयला गैसीफिकेशन एक प्रमुख परिवर्तनकारी तकनीक है। इसमें कोयले को उच्च तापमान पर ऑक्सीजन और भाप के साथ गर्म किया जाता है, जिससे सिंथेटिक गैस बनती है, जो मुख्य रूप से हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड का मिश्रण होती है।
14.2 किलो सिलेंडर का वजन होगा कम!
रसोई गैस के सिलेंडर का वजन अब कम हो सकता है। 14.2 किलो के गैस सिलेंडर अब 10 किलो के हो सकते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू गैस सिलेंडर में दी जाने वाली एलपीजी की मात्रा घटाने पर विचार किया जा रहा है। 14.2 किलो वाले सिलेंडर में अब करीब 10 किलो गैस देने की योजना पर काम चल रहा है, जिससे कम सप्लाई के बावजूद सरकार अधिक से अधिक घरों तक एलपीजी की आपूर्ति कर सकेगी।