अजित पवार का महाराष्ट्र में बेताज ताज”, बरामती के सुल्तान की राजनीतिक यात्रा खत्म

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार का निजी विमान बुधवार को बारामती में क्रैश हो गया, जिसमें उनकी और विमान में सवार सभी छह लोगों की मौत हो गई। जिला पंचायत चुनाव प्रचार के लिए जा रहे पवार का निधन राज्य और बारामती में गहरा शोक छोड़ गया है। अब राजनीतिक गलियारों में उनके 45 साल के सियासी सफर और योगदान पर चर्चा तेज है।
चाचा शरद पवार की छाया में राजनीति की शुरुआत
अजित पवार ने 1982 में अपने चाचा और एनसीपी के दिग्गज नेता शरद पवार के मार्गदर्शन में राजनीति में कदम रखा। शुरुआती दौर में उन्होंने सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड और पुणे सहकारी बैंक जैसे अहम पद संभाले। 1991 में वे पहली बार बारामती संसदीय सीट से लोकसभा सदस्य चुने गए, लेकिन बाद में इसे अपने चाचा के लिए खाली कर दिया।
शरद पवार के राजनीतिक वारिस के रूप में स्थापित
अजित पवार ने अपने राजनीतिक कौशल और मेहनत से महाराष्ट्र में खुद को शरद पवार का सियासी वारिस साबित किया। 1995 में बारामती विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने और इसके बाद लगातार विधायक बने। 45 साल के राजनीतिक जीवन में उन्होंने एक बार सांसद और सात बार विधायक रहकर राज्य की राजनीति में अपनी गहरी पैठ बनाई।
विधायक से डिप्टी सीएम तक का सफर
पवार ने राज्य सरकार में कृषि, ऊर्जा, योजना और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों में मंत्री पद संभाला।
2010: पहली बार उपमुख्यमंत्री बने।
2019: दो बार डिप्टी सीएम पहले देवेंद्र फडणवीस और फिर उद्धव ठाकरे सरकार में।
2023-2024: शरद पवार से अलग अपनी राजनीतिक राह चुनकर बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री बने।
कुल मिलाकर वे छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे और राज्य की राजनीति में अपनी छवि को मजबूत किया।
2022 में अलग राह और राजनीतिक बगावत
जब शरद पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले को पार्टी में आगे बढ़ाया, तो अजित पवार ने एनसीपी से अलग होकर बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में शामिल होकर अपनी राजनीतिक अलग पहचान बनाई।
व्यक्तिगत जीवन
जन्म: 22 जुलाई 1959, देवलाली, प्रवरा, अहमदनगर
पिता: फिल्म जगत से जुड़े, वी. शांताराम के राजकमल स्टूडियो से जुड़े
पत्नी: सुनेत्रा पवार
संतान: पार्थ पवार और जय पवार
शिक्षा: महाराष्ट्र एजुकेशन सोसायटी हाई स्कूल, बारामती; कॉलेज की पढ़ाई पिता के निधन के बाद छोड़ दी
अजित पवार का निधन महाराष्ट्र की राजनीति और बारामती के लिए बड़ा झटका है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व और सियासी कौशल की छवि राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में लंबे समय तक याद रखी जाएगी।
अजित पवार के निधन के बाद बारामती और महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता समीकरण में बदलाव की संभावनाएं बढ़ गई हैं। अब निगाहें पार्टी संरचना और आगामी चुनाव रणनीतियों पर टिकी हुई हैं।
