2,700 साल पुरानी यात्रा अब घर की ओर:मणिपुर-मिजोरम के 5,800 ब्नेई मेनाशे लोगों की इजराइल वापसी

2,700 साल पुरानी यात्रा अब घर की ओर:मणिपुर-मिजोरम के 5,800 ब्नेई मेनाशे लोगों की इजराइल वापसी
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पूर्वोत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में ब्नेई मेनाशे यहूदी समुदाय की इजराइल वापसी का रास्ता साफ हो गया है। मणिपुर और मिजोरम में करीब 5,800 लोग इस योजना के तहत धीरे-धीरे इजराइल भेजे जाएंगे. इजराइली कैबिनेट ने इसके लिए ढाई सौ करोड़ रुपए मंजूर किए हैं.

2026 तक 1,200 लोगों की वापसी होगी

2026 तक 1,200 लोगों की वापसी होगी, जबकि 2030 तक पूरी कम्युनिटी ‘घर’ लौट जाएगी. यह समुदाय खुद को बाइबिल की ‘दस खोई हुई जनजातियों’ में से मेनाशे का वंशज मानता है।

मणिपुर की हिंसा और इजराइल की जड़ें

मणिपुर में मई 2023 में मेतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच हुई जातीय हिंसा ने इस प्रक्रिया को और जरूरी बना दिया। आगजनी, लूट और हत्याओं के चलते कई लोग विस्थापित हुए और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए। इजराइल की ओर से यह वापसी केवल धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से नहीं, बल्कि सुरक्षा और रणनीतिक महत्व के चलते भी है। इजराइल ब्नेई मेनाशे को गलील क्षेत्र में बसाने की योजना बना रहा है, जिससे उसकी उत्तरी सीमा मजबूत होगी।मिजोरम के समुदाय नेता जेरेमिया एल. ह्नामते कहते हैं, हम प्रॉमिस्ड लैंड लौट रहे हैं। मणिपुर की हिंसा ने हमें मजबूर किया, लेकिन यह हमारी जड़ों की पुकार है।”

भारत में यहूदी कैसे आए

भारत में यहूदियों का आगमन अलग-अलग दौर में हुआ।

722 ईसा पूर्व: असिरियन साम्राज्य ने नॉर्थ इजराइल पर हमला किया, दस जनजातियों को निर्वासित किया।

586 ईसा पूर्व: बाबिलोन ने यरूशलेम का पहला मंदिर नष्ट किया।

70–135 ईस्वी: रोमन साम्राज्य ने दूसरा मंदिर नष्ट कर यहूदियों को बिखेर दिया।

सुरक्षित जीवन की तलाश में कई यहूदी समुद्री मार्ग से केरल आए और कोचीन में बस गए। बाद में 18वीं–19वीं सदी में इराक और सीरिया से बगदादी यहूदी भारत में आए।मणिपुर-मिजोरम का ब्नेई मेनाशे समुदाय दावा करता है कि वे प्राचीन इजराइल की मेनाशे जनजाति के वंशज हैं और पिछले 300–500 साल में भारत में बसे.

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