2025: इतिहास के तीसरे सबसे गर्म साल के रूप में दर्ज

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2025 दुनिया का तीसरा सबसे गर्म साल क्यों रहा? डाटा, असर और जीवन की कहानियां एक मानव दृष्टिकोण से।

भोपाल। 2025 का साल खत्म होते-होते एक गंभीर आंकड़ा सामने रख गया. यह दुनिया का तीसरा सबसे गर्म साल रहा । गर्मी अब सिर्फ मौसम की रिपोर्ट नहीं रही इसने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बदल दी.

गर्मी ‘प्रोब्लम’ बनी

जब हम सुबह उठते हैं और देखते हैं कि मौसम रिपोर्ट “लू” का अलर्ट दे रही है . 2025 में कई शहरों ने गर्मी के ऐसे रिकॉर्ड तोड़े । देश के कई हिस्सों में तापमान इतना बढ़ गया कि लोगों को अपनी दिनचर्या बदलनी पड़ी स्कूलों के समय बदले गए काम के घंटे घटाए गए और बाज़ारों में पानी की मांग बढ़ गई।

दुनिया भर की तस्वीर

वैज्ञानिकों के आंकड़ों ने दिखाया कि 2025 की औसत वैश्विक तापमान वृद्धि पिछले कई सालों से अधिक रही जिसके कारण यह साल रिकॉर्ड में तीसरे स्थान पर आया है इसके कुछ असर

  • लू की लहरें ज़्यादा तीव्र और लम्बी
  • समुद्र का तापमान बढ़ा, जिससे समुद्री जीवन प्रभावित
  • चरम मौसम की घटनाओं में बढ़ोतरी

प्रकृति का ये बदलता चेहरा अब सिर्फ वैज्ञानिक चर्चा नहीं रहा लोगों ने अपने अपने शहरों और गांवों में इसका असर खुद देखा है।

भारत में गर्मी का असर

भारत जैसे देश में जहाँ मानसून और मौसम का ढलान हमारी ज़िंदगी पर सीधे असर डालता है, 2025 की गर्मी ने कई शहरों को हैरान कर दिया दिल्ली, जयपुर, लखनऊ, भोपाल जैसे शहरों में तापमान ने कई बार 45°C के आस-पास पहुँचकर लोगों की नाक़ों चढ़ा दिया. छोटे शहरों और कस्बों में भी लोग घर से निकलते समय पानी और टोपी को ज़रूरी सामान मानने लगे ।

रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर असर

खेतिहर मजदूरों का काम सुबह-शाम को शिफ्ट करना पड़ा, बिजली की खपत बढ़ गई, जिससे कटोती के हालात बन गए. अस्पतालों में हीट स्ट्रोक के मरीज बढ़ गए।

क्यों बढ़ रही है गर्मी?

इसका जवाब इतने आसान शब्दों में दे सकते हैं कारखानों और वाहनों से निकलने वाली गैसें हमारी हवा गरम कर रही हैं . हरे-भरे जंगलों का कटना—प्रकृति की कूलिंग क्षमता कम हो रही है, समुद्र और मौसम के प्राकृतिक बदलते चक्र जैसे एल नीनो और ला नीना ये सभी मिलकर वातावरण को पहले से ज़्यादा गर्म बना रहे हैं।

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