15 घंटे, 28 ऑर्डर और केवल 763: डिलीवरी पार्टनर की कड़वी हकीकत और अब हड़ताल

15 घंटे, 28 ऑर्डर और केवल 763: डिलीवरी पार्टनर की कड़वी हकीकत और  अब हड़ताल
X

हमारे स्मार्टफोन पर बस एक क्लिक और सामान हमारे दरवाजे पर। आसान लगता है, लेकिन इसके पीछे जो मेहनत, थकान और जोखिम डिलीवरी पार्टनर्स झेलते हैं, वह अक्सर नजरअंदाज रह जाती है. हाल ही में उत्तराखंड के थापलियाल जी, Blinkit के डिलीवरी पार्टनर का वायरल वीडियो इस कड़वी हकीकत को सामने ला रहा है।

15 घंटे की भागदौड़ और कमाई 763 रु

वीडियो में थापलियाल ने अपनी दिनभर की कमाई का हिसाब खोला। उन्होंने बताया कि सुबह से रात तक 15 घंटे बाइक चलाकर 28 ऑर्डर डिलीवर किए, लेकिन ऐप पर उनका आंकड़ा था केवल 763 रुपये अंतिम ऑर्डर की डिलीवरी के लिए उन्हें मिली राशि मात्र 15.83 थी. सोचिए, 15 घंटे काम करके भी महंगाई के इस दौर में 800 तक नहीं कमाना,ये किसी भी आम परिवार के लिए मुश्किल है.

वायरल वीडियो ने खोला सच

नेटिजन्स ने इसे सस्ते मानव श्रम का शोषण करार दिया. इंस्टाग्राम पर कई लोगों ने Blinkit को टैग कर सवाल किया. जो कर्मचारी पलक झपकते सामान पहुंचाते हैं, उनकी सुरक्षा और जिंदगी की जिम्मेदारी कौन लेगा?. कई ने यह भी कहा कि 10 मिनट डिलीवरी का दबाव और कम वेतन इंसानियत के खिलाफ है. ग्राहकों से अपील की गई कि डिलीवरी पार्टनर्स को टिप जरूर दें, क्योंकि उनकी असली कमाई अक्सर इसी पर निर्भर होती है।

कमाई हर दिन समान नहीं

थापलियाल ने अक्टूबर में एक और वीडियो में बताया कि हर दिन कमाई बुरी नहीं होती. उस दिन 11 घंटे काम करके 32 ऑर्डर पूरे किए और 1,202 रुपये कमाए. पीक सीजन में 1,600 से 2,000 तक की कमाई हो जाती है. कम ऑर्डर या दूरदराज की डिलीवरी में 1,000 रुतक तक भी मुश्किल से कमाना होता है. यह दिखाता है कि गिग इकोनॉमी में मेहनत और अस्थिरता हमेशा साथ रहती है.

एक्सपर्ट की राय

गिग वर्कर्स एसोसिएशन से जुड़े एक्सपर्ट कहते है.सरकार और इस तरह की कंपनियों को वर्कर्स के लिए बेहतर माहौल बनाना चाहिए. डिलीवरी पार्टनर को कर्मचारी का दर्जा दिया जाए. आप इन्हें वर्कर्स नहीं मानेंगे, तब तक कोई फायदा नहीं है. क्योंकि सारे कानून संगठित मजदूरों के लिए लागू होते हैं.

Next Story