राज्यसभा की मेज पर सांसद ने रखे कृत्रिम पैर, संसद में दिखाया वामपंथी हिंसा का सच

राज्यसभा की मेज पर सांसद ने रखे कृत्रिम पैर, संसद में दिखाया वामपंथी हिंसा का सच
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राज्यसभा में सदानंदन मास्टर ने कृत्रिम पैर दिखाकर केरल की वामपंथी राजनीतिक हिंसा और असहिष्णुता को राष्ट्रीय बहस में ला दिया।

नई दिल्ली। बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में बुधवार को एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने सदन को कुछ क्षणों के लिए स्तब्ध कर दिया। सांसद सदानंदन मास्टर जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा में बोलने के लिए उठे, तो अपनी बात शब्दों से नहीं, बल्कि अपने शरीर पर झेली गई हिंसा के प्रमाण से रखी। सदन की मेज पर रखे गए उनके कृत्रिम पैर सिर्फ व्यक्तिगत पीड़ा की कहानी नहीं थे, वह केरल की उस वामपंथी राजनीति की सच्चाई को उजागर कर रहे थे, जहां हिंसा को “क्रांति” और हत्याओं को “वर्ग संघर्ष” का नाम दिया जाता रहा है।

राज्यसभा के इतिहास में ऐसे दृश्य कम ही देखने को मिले हैं। सदन में मौजूद सदस्य, दर्शक दीर्घा और टीवी पर कार्यवाही देख रहे लोग, सभी के सामने एक शिक्षक, एक सामाजिक कार्यकर्ता और अब सांसद, अपने पर हुए हमले का प्रमाण रख रहा था, सदानंदन मास्टर ने कहा कि वह यह दिखाना चाहते हैं कि लोकतंत्र क्या होता है और क्या नहीं होता।


केरल की राजनीति और हिंसा

सदानंदन मास्टर केरल के कन्नूर जिले से आते हैं, जिसे लंबे समय से राजनीतिक हिंसा का गढ़ माना जाता रहा है। 25 जनवरी 1994 की रात पेरिंचेरी गांव में, जब वे घर लौट रहे थे तब उन पर हमला हुआ। हमलावरों ने पहले बम फेंके, फिर उन्हें ज़मीन पर गिराकर कुल्हाड़ी से दोनों पैर घुटनों के नीचे से काट दिए। घटना के समय आसपास की दुकानें बंद हो गईं, कोई मदद को आगे नहीं आया। घंटों तक वह सड़क पर लहूलुहान पड़े रहे।

हमले के बाद महीनों तक इलाज चला, डॉक्टरों को भी उनके बचने की उम्मीद कम थी। लेकिन कृत्रिम पैर लगवाकर वे फिर स्कूल लौटे, बच्चों को पढ़ाया। न विचार बदले, न सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाई। बाद में वे केरल भाजपा के मुखपत्र जनभूमि से जुड़े और फिर राजनीति में आए। 2016 में विधानसभा चुनाव भले न जीत पाए, लेकिन राजनीतिक हिंसा के शिकार लोगों में उनका नाम एक जीवित प्रतीक बन चुका था।

सदन में आरोप और आपत्ति

सदानंदन मास्टर ने सदन में कहा कि हमला करने वाले CPIM से जुड़े लोग थे। इस दौरान सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने नियमों का हवाला देते हुए आपत्ति जताई कि सदन में वस्तुओं का प्रदर्शन नहीं किया जा सकता। इस पर सदानंदन मास्टर ने कहा कि जो लोग आज सहिष्णुता की बात करते हैं, उनकी राजनीति का इतिहास हिंसा से जुड़ा रहा है और यही लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इस पूरे घटनाक्रम में एक और बात चर्चा में रही, अन्य विपक्षी दलों की चुप्पी। कांग्रेस समेत कई दलों की सदन के भीतर चुप्पी साधे रहे।

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