छोटे बच्चों को चॉकलेट देते हैं तो हो जाए सावधान! पैरेंट्स इन बातों का रखें ध्यान

घर में छोटे बच्चे चॉकलेट खाना पसंद करते हैं। साथ ही बच्चे हो और घर में चॉकलेट न हो ऐसा कम ही देखने को मिलता है। इसके चलते चाहे पैरेंट्स हो या फिर घर में आने वाले मेहमान घर के छोटे बच्चों के लिए चॉकलेट जरूर लाते हैं। बच्चों का भी चॉकलेट से अलग ही अट्रैक्शन है। कई बार रूठे बच्चे को मनाना हो, रोते से चुप कराना हो या फिर अपनी बात मनवाना हो इसके लिए चॉकलेट का लालच दिया जाता है। उस समय हम सोचते हैं कि एक छोटे से चॉकलेट से क्या ही नुकसान होगा?
लेकिन यहीं पर सावधान होने की जरूरत है। क्योंकि जरूरत से ज्यादा चॉकलेट बच्चों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। इस आर्टिकल में जान लीजिए की चॉकलेट कितना अनहेल्दी हो सकता है। ऐसे में पैरेंट्स के रूप में आपको कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
25 ग्राम से अधिक शुगर नुकसानदायक
कई बार डॉक्टर छोटे बच्चों को बहुत अधिक चॉकलेट खिलाने से मना करते हैं। ज्यादा चॉकलेट खाने से नुकसान होता है क्योंकि चॉकलेट में अत्यधिक मात्रा में शुगर और कैफीन होता है। कई बार इसमें करीब 60 ग्राम शुगर कटेंट होता है। यह दोनों पदार्थ बच्चों के विकास पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। एक बच्चे के लिए दिन भर में 25 ग्राम से अधिक शुगर नुकसान पहुंचा सकती है।
अधिक चॉकलेट से चिड़चिड़ा होता है स्वाभाव
अधिक शुगर कंटेंट वाली चॉकलेट खाने से बच्चों के स्वभाव में बदलाव आने लगता है। उनका स्वभाव चिड़चिड़ा होने लगता है। लंबे समय तक लगातार चॉकलेट खाने वाले बच्चों में ओबेसिटी, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज जैसी क्रॉनिक डिजीज होने की आशंका भी बढ़ जाती है। वहीं, कई बच्चों में लर्निंग डिसेबिलिटी में देखने को मिली है।
चॉकलेट के नुकसान को देखते हुए सवाल उठता है कि जिन बच्चों को चॉकलेट की आदत पड़ गई है। उनकी चॉकलेट की क्रेविंग को कैसे दूर करें। तो इसका जवाब यहां हैं।
क्वांटिटी पर कंट्रोल करे-
सबसे पहले इसकी शुरूआत घर से करें। पैरेंट्स खुद ही चॉकलेट खरीदना बंद करें साथ ही घर आने वाले मेहमानों को भी चॉकलेट लेकर आने से मना करें। इसके बाद परिजन यह कोशिश करें कि बच्चों को चॉकलेट का पूरा पैक ना दें। बच्चों को दिनभर में केवल एक या दो टुकड़े दें। इसके अलावा बच्चों को चॉकलेट के नुकसान भी बताएं
चॉकलेट के इंग्रीडिएंट चेक करें
छोटे बच्चों को दी जाने वाली चॉकलेट के इंग्रीडिएंट की जांच कर लें। परिजन हमेशा ऐसी चॉकलेट का चुनाव जिसमें कोको की मात्रा ज्यादा हो। इसके अलावा उसमें रिफाइंड शुगर कम हो। बच्चों के लिए डार्क चॉकलेट एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
चॉकलेट खाने के बाद ब्रश करे
इसके अलावा बच्चों में चॉकलेट खाने के तुरंत बाद कुल्ला करने या ब्रश करने की आदत डलवाएं। क्योंकि मेल्ट वाली चॉकलेट खाते समय दांतों में चिपक जाती है। यह परत कैविटी और सड़न का कारण बनती है।
परिजन इस बात का ध्यान रखें कि रात में भूलकर भी बच्चों को चॉकलेट खाने के लिए नहीं दें। यह आदत उनकी नींद की आदत को बिगाड़ सकती है क्योंकि चॉकलेट में मौजूद कैफीन नींद को उड़ा देती है।
