भारत के किस शहर को 'चॉकलेट टाउन' के नाम से जाना जाता है?

नई दिल्ली। भारत में कई शहर अपनी किसी न किसी खास पहचान के लिए जाने जाते हैं. कहीं कचौरी मशहूर है, कहीं चाय, तो कहीं इतिहास. लेकिन तमिलनाडु की नीलगिरी पहाड़ियों में बसा ऊटी एक अलग ही वजह से जाना जाता है, यहां की घर में बनी चॉकलेट. जो भी ऊटी गया है, वो खाली हाथ शायद ही लौटा हो. किसी के बैग में डार्क चॉकलेट, किसी के हाथ में ड्राई फ्रूट वाली, तो कोई बच्चों के लिए रंग-बिरंगे फ्लेवर लेकर आया. धीरे-धीरे ऊटी भारत का ‘चॉकलेट टाउन’ बन गया।
क्यों कहलाता है ऊटी ‘चॉकलेट टाउन’?
ऊटी का चॉकलेट से रिश्ता किसी ब्रांडिंग कैंपेन से नहीं, बल्कि वक्त के साथ बना. यहां का मौसम ठंडा रहता है, न ज्यादा गर्मी, न उमस. यही वजह है कि चॉकलेट यहां आसानी से जमती है और खराब भी नहीं होती. शुरुआत में स्थानीय परिवारों ने छोटे स्तर पर हाथ से चॉकलेट बनानी शुरू की. दूध, मलाई, कोको और मेवों से बनी ये चॉकलेट स्वाद में अलग थीं. न फैक्ट्री का टेस्ट, न मशीनों की एकरूपता. जैसे-जैसे पर्यटक बढ़े, वैसे-वैसे इन चॉकलेट की मांग भी बढ़ती गई. आज हालत यह है कि ऊटी की पहचान उसके बॉटनिकल गार्डन या झील के साथ-साथ चॉकलेट से भी जुड़ चुकी है।
पहाड़ी मौसम ने कैसे गढ़ी चॉकलेट संस्कृति
ऊटी का तापमान सालभर संतुलित रहता है. यही वजह है कि यहां चॉकलेट बनाने के लिए भारी रेफ्रिजरेशन की जरूरत नहीं पड़ती. छोटे उत्पादक भी बिना बड़े निवेश के प्रयोग कर पाए. नीलगिरी क्षेत्र में डेयरी उत्पादन अच्छा है, जिससे ताज़ा दूध और क्रीम आसानी से मिल जाती है. यही कारण है कि ऊटी की मिल्क चॉकलेट का स्वाद बाकी जगहों से अलग लगता है, थोड़ा ज्यादा रिच, थोड़ा ज्यादा क्रीमी।
ऊटी में कहां मिलती है मशहूर चॉकलेट
अगर आप ऊटी जाएं तो शहर के मुख्य बाजारों में कदम रखते ही चॉकलेट की खुशबू आपका स्वागत करती है. छोटी-छोटी दुकानों में कांच के काउंटर, जिनमें तरह-तरह की चॉकलेट सजी होती हैं, कई दुकानों में ग्राहक चॉकलेट खरीदते हुए भी देख सकते हैं।
चॉकलेट के अलावा भी बहुत कुछ है ऊटी में
ऊटी सिर्फ मिठास तक सीमित नहीं है. यहां की धीमी रफ्तार, ठंडी हवा और औपनिवेशिक दौर की झलक इसे खास बनाती है.
ऊटी का सुकून
नीलगिरी टॉय ट्रेन की सैर
झील के किनारे शाम की टहल
धुंध में लिपटी सुबहें
हरियाली और चाय के बागान
शहर का दायदा भी इसे आराम से घूमने लायक बनाता है. यहां कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखती, सब कुछ अपने समय पर चलता है।
ऊटी घूमने का सही वक्त
ऊटी सालभर जाया जा सकता है, लेकिन अक्टूबर से जून के बीच का समय सबसे बेहतर माना जाता है. गर्मियों में मैदानी इलाकों से राहत पाने वाले पर्यटकों की यहां अच्छी-खासी भीड़ रहती है. सर्दियों में हल्की ठंड और कोहरा ऊटी के अनुभव को और खास बना देता है. मानसून में हरियाली बढ़ जाती है, लेकिन घूमना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
ऊटी कैसे पहुंचें
ऊटी पहुंचने का सबसे आसान रास्ता कोयंबटूर है. यहां
- हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा – कोयंबटूर (लगभग 85 किमी)
- रेल मार्ग: मेट्टुपालयम से नीलगिरी माउंटेन रेलवे, एक विरासत ट्रेन यात्रा
- सड़क मार्ग: कोयंबटूर, मैसूरु और बेंगलुरु से सीधी बस और टैक्सी सुविधा
ऊटी की चॉकलेट सिर्फ स्वाद नहीं, वहां की यादें हैं. वो ठंडी हवा, हल्की धुंध और हाथ में पिघलती चॉकलेट, सब मिलकर एक ऐसा अनुभव बनाते हैं जिसे लोग बार-बार जीना चाहते हैं. शायद इसी लिए ऊटी आज भी भारत का चॉकलेट टाउन बना हुआ है।
