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पाताल लोक पर सामजिक सौहाद्र और शांति को भंग करने के लगे आरोप

पाताल लोक पर सामजिक सौहाद्र और शांति को भंग करने के लगे आरोप
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स्वदेश वेबडेस्क। अमेजन प्राइम पर कुछ दिनों पहले रिलीज हुई वेबसीरिज की पाताल लोक ने काफी लोकप्रियता बटोरने के साथ ही विवादों में घिर गई। शो के कई सीन्स को लेकर लोगों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। वेबसीरिज की प्रोड्यूसर अनुष्का शर्मा को इसे लेकर ट्वीटर पर ट्रोल भी किया गया है।

ट्रोलर्स और आपत्ति जताने वाले लोगों ने शो को सामाजिक शांति और सौहार्द बिगाड़ने वाला बताया है। पाताल लोक पर पुलिस की छवि को ढंग से पेश करने, हिंदू विरोधी, ब्राह्मण विरोधी होने के आरोप लग रहे हैं।पाताल लोक के बहाने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर शिकंजा कसने और वेब सीरीज के कंटेंट को रेगुलेट करने की मांग भी की जा रही है।पाताल लोक का विरोध करने वाले लोगो का कहना है की हिन्दुओं को मुस्लिमानों की मोब लिंचिंग करते हुए दिखाया गया। साथ ही हिन्दू मंदिरों में देवी-देवताओं के सामने मांस को खाते हुए दिखाया गया है। इसमें एक मुस्लिम कैरेक्टर को धार्मिक रूप से प्रताड़ित बताया गया है। जिससे हिन्दू संगठनों ने आपत्ति जताते हुए कहा है की हिन्दुओं कि छवि को बिगाड़ने का प्रयास किया गया है।

इस सीरिज में छुआ-छूत को दिखाने के साथ ही देश की सबसे बड़ी इन्वेस्टिगेटिव संस्था सीबीआई की छवि को भी गलत ढंग से पेश किया गया है।इसके अलावा नस्लभेद और जातिभेद को भी दर्शाया गया है।

कहानी - इसी कहानी की शुरुआत एक जर्नलिस्ट की हत्या के प्रयास से शुरू होती है। जिसकी हत्या की साजिश रचने के आरोप में 4 लोग पकड़े जाते है।पुलिस द्वारा इन्हें गिरफ्तार कर इंस्पेक्टर हाथीराम को केस सौपा जाता है।उसे पड़ताल में गलती होने के बाद और बात मीडिया में आने की वजह से केस सीबीआई कोई सौप दिया जाता है। जोकि केस को पकिस्तान आतंक से जोड़कर दिखाती है। लेकिन सीबीआई की बात को सच ना मानकर हाथीराम खुद ही पड़ताल पर निकलता हैं और जो कारण और चारों आरोपियों की पिछली जिंदगी की हकिकत सामने आती है। वो हैरान कर देने वाली है।

यह कहानी चार अपराधी विशाल त्यागी, तोप सिंह, कबीर एम और चीनी ( ट्रांसजेंडर ) के जीवन में घटी घटनाओं पर आधारित है। इन चारों किरदारों की पिछली जिंदगी की कहानी के जरिये सामाजिक परिस्थितियों का चित्रण किया गया है।

इन किरदारों के अपराधी बनने के पीछे जो कहानी बताई गई है। वह समाज के वीभत्स रूप को दिखाती है। जैसे की परिवार के ही लोगों द्वारा विशाल त्यागी की बहनों का बलात्कार करवाना। तोपसिंह को पंजाब में सवर्णों द्वारा प्रताड़ित किया जाना। मुस्लिम किरदार कबीर के भाई को बीफ के खाने के शक में मारा जाना। कोई उसे मुसलमान ना समझें इसलिए उसके खतने को लेकर भी गलत सर्टिफिकेट बनावाया जाना। वही अन्य किरदार चीनी जोकि एक ट्रांसजेंडर है। उसके नाम से ही जातीय और नस्लभेद को दर्शाया गया है।

समाज के इस गलत चित्रण पर ही लोगों द्वारा आपत्ति उठाई जा रहीं है। यह वेबसीरिज अपराधियों के प्रति लोगों के मन में दया-भावना उत्पन्न करती है। वहीँ देश की सीबीआई जैसी संस्था, पुलिस और राजनेताओं की छवि को धूमिल करती हुई नजर आती है। इस वेबसीरज में अपने ही परिवार की बेटियों के साथ जमीन के लिए दूसरे लोगों से बलात्कार कराया जाना एवं सवर्णों द्वारा दलितों का अपमान एवं शोषण को दिखाया जाना जोकि सामाजिक छवि को बिगाड़ने का प्रयास है। इसी के साथ ही मोब लिंचिंग जैसी घटनाओं को दिखाया गया है। जिससे सामाजिक सौहाद्र के भंग होने का खतरा उतपन्न हो सकता है।

Updated : 2020-06-02T22:30:26+05:30
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स्वदेश वेब डेस्क

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