सेबी ने म्यूचुअल फंड के खर्चों पर कसा शिकंजा, निवेशकों को होगा बड़ा फायदा

सेबी ने म्यूचुअल फंड निवेशकों के हित में शुक्रवार को बड़ा फैसला लिया. इसके तहत फंड हाउस के ब्रोकरेज जैसे खर्चों पर लगाम लगाई गई है। साथ ही खर्चों को लेकर स्पष्टता लाने को कहा गया है, ताकि फंड उद्योग में पारदर्शिता बढ़े.
बाजार नियामक सेबी ने म्यूचुअल फंड के नियमों में बड़े पैमाने पर बदलाव की अधिसूचना जारी कर दी। नए नियमों से खर्चों की संरचना बदलेगी, जानकारी देने के तरीके और सख्त होंगे, साथ ही फंड हाउस की गवर्नेंस भी मजबूत होगी। ये सारे बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे।
नए नियमों की सबसे खास बात यह है कि अब म्यूचुअल फंड स्कीम्स अपना आधार व्यय अनुपात (BER) प्रदर्शन के आधार पर ले सकेंगी, लेकिन इसके लिए सेबी की तय शर्तों का पालन करना होगा। सेबी ने साफ कहा है कि ऐसी योजनाओं को खर्च के ढांचे और इसकी जानकारी देने के नियमों का हमेशा पालन करना होगा।
अब तक जो कुल खर्च अनुपात (TER) था, उसमें सब कुछ मिला-जुला रहता था। अब आधार व्यय अनुपात केवल एसेट मैनेजमेंट कंपनी की प्रबंधन फीस तक सीमित होगा। ब्रोकरेज, सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT), स्टैंप ड्यूटी और एक्सचेंज फीस जैसी चीजें अलग से दिखानी होंगी। इससे निवेशकों को असल खर्च का सही-साफ पता चलेगा।
ब्रोकरेज पर भी ऊपरी सीमा कम कर दी गई है। नकद बाजार में ब्रोकरेज की सीमा अब 6 पैसा रह गई है, जो पहले करीब 8.59 पैसा थी। वायदा एवं विकल्प में यह 2 पैसा हो गई है, पहले 3.89 पैसा थी। इससे बड़े फंड्स पर असर पड़ सकता है।
सेबी के इस कदम से फंड उद्योग में पारदर्शिता बढ़ेगी। एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी के एमडी और सीईओ नवनीत मुनोट ने कहा कि बड़े फंड्स पर असर तो पड़ेगा, लेकिन यह बाजार नियामक का पारदर्शिता बढ़ाने का एक और अच्छा कदम है। ट्रस्टी और फंड हाउस के बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा।
