बस्तर में नक्सलवाद को बड़ा झटका, 51 इनामी नक्सलियों ने किया सरेंडर

बस्तर में नक्सलवाद को बड़ा झटका, 51 इनामी नक्सलियों ने किया सरेंडर
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बीजापुर और सुकमा में 1.61 करोड़ के इनामी 51 नक्सलियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।

रायपुरः छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को बड़ी सफलता मिली है। बीजापुर और सुकमा जिलों में कुल 51 इनामी नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। इन पर कुल 1.61 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। यह सरेंडर सुरक्षा बलों के लगातार दबाव और पुनर्वास नीति का असर माना जा रहा है।

सुकमा में 21 नक्सलियों ने डाले हथियार

शनिवार 7 फरवरी को सुकमा जिले में 21 माओवादी कैडरों ने पुलिस अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया। इनमें 7 पुरुष और 14 महिलाएं शामिल हैं। इन सभी पर कुल 76 लाख रुपये का इनाम घोषित था। सरेंडर करने वालों में डीवीसी सदस्य सोढ़ी महेश, पोडियम राजू और कारम ममता जैसे नाम शामिल हैं, जिन पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था।

ऑटोमैटिक हथियार और विस्फोटक सौंपे

आत्मसमर्पित नक्सली अपने साथ एके-47, इंसास राइफल, बीजीएल लॉन्चर जैसे ऑटोमैटिक हथियार लेकर पहुंचे। इसके अलावा बड़ी मात्रा में गोलाबारूद और विस्फोटक सामग्री भी सुरक्षा बलों को सौंपी गई। ये नक्सली बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों में सक्रिय थे।

कई संगठनों से जुड़े थे कैडर

सुकमा एसपी किरण चव्हाण के मुताबिक आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली दरभा डिवीजन, दक्षिण बस्तर डिवीजन, केकेबीएन डिवीजन (ओडिशा) और इंद्रावती एरिया कमेटी से जुड़े थे। इनमें 3 डीवीसीएम, 5 एसीएम और 13 पार्टी सदस्य शामिल हैं।

हिंसक वारदातों में थी भूमिका

सरेंडर करने वाले नक्सली सुरक्षा बलों पर हमले, ग्रामीण इलाकों में हिंसा, सड़क और निर्माण कार्यों में बाधा, हथियार परिवहन, संगठन विस्तार और प्रशिक्षण जैसी गंभीर नक्सली गतिविधियों में शामिल रहे हैं।

बीजापुर में 30 माओवादियों ने छोड़ी हिंसा

बीजापुर जिले में भी ‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ नीति के तहत साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े 30 सक्रिय माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें 20 महिलाएं और 10 पुरुष शामिल हैं। इन सभी पर कुल 85 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

जिलेटिन और कार्डेक्स वायर भी किए जमा

आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने एक बंडल कार्डेक्स वायर और 50 जिलेटिन स्टिक सुरक्षा बलों को सौंपी। शासन की पुनर्वास योजना के तहत प्रत्येक कैडर को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई।

नक्सल संगठन की जड़ें कमजोर

बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि ‘पूना मारगेम’ अभियान से माओवादी संगठन की जड़ें कमजोर हो रही हैं। उन्होंने शेष नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटें।

31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त बस्तर का लक्ष्य

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने की डेडलाइन तय की है। पिछले डेढ़ साल में 23 बड़े नक्सली मारे गए हैं और कई शीर्ष कैडर सरेंडर कर चुके हैं। अब संगठन में केवल कुछ ही शीर्ष नेता बचे हैं, जिनकी तलाश जारी है।

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