छत्तीसगढ़ के 47 गांवों में लोकतंत्र का जश्न, पहली बार बना गणतंत्र दिवस, फहराया तिरंगा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में सोमवार को लोकतंत्र की एक नई सुबह देखी गई। दशकों से नक्सलवाद की छाया में रहे बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों के 47 गांवों में पहली बार गणतंत्र दिवस का जश्न मनाया गया और तिरंगा फहराया गया। यह कदम उस परिवर्तन की उम्मीद जगाता है, जो बस्तर के लोगों के जीवन में शांति और विकास लेकर आया है।
पिछले साल 53 गांवों में भी झंडा फहराया गया था। छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र की संयुक्त सुरक्षा प्रयासों, माओवाद विरोधी अभियान और स्थानीय समुदायों के सहयोग से सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है। इन क्षेत्रों में अब स्थायी प्रशासनिक उपस्थिति के साथ 100 से अधिक सुरक्षा शिविर सक्रिय हैं।
नक्सल प्रभावित इलाकों में लोकतंत्र पर जता रहे भरोसा
पहली बार तिरंगा फहराने वाले गांवों के लोग इस राष्ट्रीय पर्व में खुशी से भाग लेकर यह दिखाते हैं कि वे लोकतंत्र और कानून पर भरोसा कर रहे हैं। कभी संवेदनशील माने जाने वाले ये इलाके अब विकास की नई राह पर बढ़ रहे हैं। सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं और बैंकिंग सुविधाएं जैसे बुनियादी विकास के संकेत यहां साफ दिख रहे हैं। खासकर जगरगुंडा क्षेत्र में हाल ही में बैंकिंग सेवाओं की बहाली इस बदलाव का सबूत है।
अंधकार से निकलकर विकास की मुख्यधारा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि बस्तर को हिंसा के अंधकार से निकालकर विकास की मुख्यधारा में लाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में यह क्षेत्र शांति, विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों के मजबूत आधार पर आगे बढ़ रहा है। इस साल 26 जनवरी को इन 47 गांवों में फहराया गया तिरंगा बस्तर की नई उम्मीदों और शांति का प्रतीक है।
