40 लाख खर्च, चार साल में दम तोड़ गया रायपुर का मॉडल स्पोर्ट्स जोन

युवाओं के खेल मैदान बने असामाजिक अड्डे, निगम की मॉडल योजना फ्लॉप
राजधानी रायपुर में युवाओं को खेल के लिए आधुनिक, सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक्सप्रेस-वे ब्रिज के नीचे विकसित किए गए मॉडल स्पोर्ट्स जोन आज बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा के प्रतीक बन चुके हैं। नगर निगम द्वारा लगभग 40 लाख रुपए की लागत से तैयार किए गए ये खेल परिसर अब न तो खेल योग्य बचे हैं और न ही सुरक्षित।
शाम होते ही बढ़ती अराजकता
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, शाम ढलते ही इन स्पोर्ट्स जोनों में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा शुरू हो जाता है। कई स्थानों पर मैदानों को पार्किंग में बदल दिया गया है। शराब की खाली बोतलें, प्लास्टिक के गिलास और कचरा फैला रहता है, जिससे बच्चों और युवाओं के लिए यहां खेलना असुरक्षित हो गया है।
मॉडल योजना भी साबित हुई बेकार
प्रत्येक स्पोर्ट्स जोन को लगभग 4,000 वर्गफीट क्षेत्र में विकसित किया गया था, ताकि एक साथ कई खेल गतिविधियां संचालित की जा सकें। नगर निगम ने यह अवधारणा मुंबई के सानपाड़ा फ्लाईओवर के नीचे बने सफल खेल परिसरों से ली थी। दिसंबर 2022 में यह मॉडल देशभर में सराहा गया था, लेकिन रायपुर में जिम्मेदारी तय न होने और लापरवाही के चलते यह योजना सरकारी धन की बर्बादी और प्रशासनिक उदासीनता का उदाहरण बनती जा रही है।
यह है स्थिति
मॉडल स्पोर्ट्स जोन बना सरकारी उपेक्षा का प्रतीक
खेल की जगह कचरा और शराब की बोतलें
मुंबई मॉडल रायपुर में फेल, जिम्मेदारी के अभाव में बर्बाद मैदान
रखरखाव समिति का वादा भी हवा में
रखरखाव समिति का वादा भी अधूरा
नगर निगम ने इन स्पोर्ट्स जोनों के संचालन, सुरक्षा और रखरखाव के लिए अलग-अलग समितियां गठित करने की घोषणा की थी, ताकि मैदानों की सफाई, खेल उपकरणों की देखरेख और नियमित खेल गतिविधियां सुनिश्चित की जा सकें।
लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज तक ऐसी कोई समिति गठित नहीं की गई। परिणामस्वरूप मैदान खुले पड़े हैं, कोर्ट अनुपयोगी हो चुके हैं और खेल उपकरण धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त हो रहे हैं।
जिन स्थानों पर क्रिकेट, बैडमिंटन, बास्केटबॉल और वॉलीबॉल जैसे खेलों के माध्यम से युवाओं की प्रतिभा निखारने की परिकल्पना की गई थी, वहां आज टूटी हुई लोहे की जालियां, उखड़ी सतह और बिखरा कचरा नजर आता है।
नगर निगम ने इन खेल परिसरों के निर्माण से पहले दावा किया था कि अवैध ठेले, गुमटियां और कब्जे हटाकर यहां युवाओं के लिए सुव्यवस्थित खेल मैदान विकसित किए जाएंगे। शुरुआत में इस योजना को सराहना भी मिली, लेकिन संचालन, निगरानी और रखरखाव की ठोस व्यवस्था न होने के कारण यह महत्वाकांक्षी योजना चार साल में ही दम तोड़ती नजर आ रही है।
