शराब पी तो भरना होगा 5 हजार रुपए का जुर्माना: मुरिया समाज ने पेश की मिसाल

शराब पर लगाई पाबंदी, 3 माह तक सामाजिक बहिष्कार का भी प्रावधान
जगदलपुर:वैसे तो आदिवासी समुदाय और शराब का सदियों पुराना नाता है, मगर आज की आदिवासी पीढ़ी जाग उठी है और कुरीतियों से दूर हो रही है। इसका एक शानदार उदाहरण मुरिया आदिवासी समुदाय ने पेश किया है।
मुरिया आदिवासी समुदाय ने समाज में शराबखोरी के चलन पर कड़ाई से पाबंदी लगा दी है। सार्वजनिक रूप से शराब पीने वाले सामाजिक सदस्यों पर पाँच हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा और तीन माह तक समाज से उन्हें बहिष्कृत रखा जाएगा।
शराब आदिवासी जीवन का अभिन्न हिस्सा माना जाता है. शादी-ब्याह, जन्म-मरण से लेकर पूजा-अनुष्ठान तक आदिवासी अक्सर शराब का इस्तेमाल करते आए हैं।
सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा को लेकर कड़ा संदेश
इस अवसर पर समाज के प्रमुखों, वरिष्ठजनों और बड़ी संख्या में युवाओं की उपस्थिति में मुरिया समाज की रीति-नीति, परंपरा, सामाजिक अनुशासन और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा को लेकर स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया गया.
मुरिया समाज बस्तर की प्राचीनतम आदिवासी संस्कृतियों में से एक है। इस समाज की पहचान संघर्ष, स्वाभिमान, सामूहिक चेतना और अनुशासन से रही है. सदियों से इस समाज ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रखा है और प्रत्येक पीढ़ी को सामाजिक जिम्मेदारी और मर्यादा का पाठ पढ़ाया है।
नशा मुरिया समाज का सबसे बड़ा दुश्मन
मिलन समारोह को संबोधित करते हुए मुरिया समाज के युवा आदिवासी नेता हेमंत कश्यप ने दो टूक शब्दों में कहा कि नशा मुरिया समाज का सबसे बड़ा दुश्मन है. जो युवा आज नशे में डूबेगा, वह कल अपने समाज की पहचान मिटा देगा।
उन्होंने कहा, “हमारे पूर्वजों ने हमें परंपरा, जमीन और स्वाभिमान सौंपा है, न कि नशे की जंजीरें। मुरिया समाज में नशे और उपद्रव के लिए अब कोई जगह नहीं है. समाज द्वारा लिया गया यह निर्णय किसी को डराने के लिए नहीं, बल्कि युवाओं को नशे की बर्बादी से बचाने और समाज को सशक्त बनाने के उद्देश्य से लिया गया है.
मिलन समारोह का समापन नशा-मुक्त मुरिया समाज, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक स्वाभिमान की रक्षा के दृढ़ संकल्प के साथ किया गया.इस अवसर पर नील कुमार बघेल, छेदीनाथ कश्यप, दीनानाथ कश्यप, बंशीधर कश्यप, भोलानाथ, महादेव नाइक, बुदरू, बोंग, भक्तू, धरम सिंह मौर्य, मदन सिंह बघेल, विश्वनाथ कश्यप, फूलसिंह, विक्रम, प्रथम कश्यप, ताराबाई कश्यप, पार्वती मौर्य, सावित्री कश्यप, लच्छन दई कश्यप सहित 52 मुरिया परिवारों के सैकड़ों सदस्य उपस्थित रहे।
