छत्तीसगढ़ चावल निर्यातकों को बड़ी सौगात: मंडी शुल्क में छूट की अवधि 1 साल बढ़ाई गई

इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में मुख्यमंत्री साय ने की घोषणा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शनिवार को राजधानी रायपुर के निजी रिसॉर्ट में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने चावल निर्यातकों के लिए बड़ी सौगात की घोषणा की। मंडी शुल्क में छूट की अवधि एक साल बढ़ा दी गई है।
इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के दौरान मुख्यमंत्री साय की यह घोषणा चावल निर्यातकों और किसानों दोनों के लिए लाभकारी साबित होगी। साथ ही इस अवसर पर कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के क्षेत्रीय कार्यालय का शुभारंभ भी किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है, और दतिवाड़ा में ऑर्गेनिक चावल की खेती हो रही है, जिसे और प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, एपीडा के चेयरमैन अभिषेक देव, छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कांति लाल और राम गर्ग सहित देशभर से आए मिलर्स, चावल व्यवसायी और अन्य स्टेकहोल्डर्स उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ से चावल के निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट का यह दूसरा संस्करण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस आयोजन में 12 देशों के बायर्स और 6 देशों के एम्बेसी प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति से छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त होगी। उन्होंने सभी विदेशी मेहमानों का स्वागत और अभिनंदन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने छत्तीसगढ़ को सोच-समझकर ‘धान का कटोरा’ कहा था, और आज प्रदेश इस नाम की सार्थकता सिद्ध कर रहा है। चावल छत्तीसगढ़ के खानपान का अभिन्न हिस्सा रहा है और यहां हजारों किस्मों की धान की प्रजातियां उगाई जाती हैं।
सारगुजा अंचल के सुगंधित जीराफूल और दुबराज जैसी वादली का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनकी खुशबू दूर से ही पहचान में आ जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ से चावल के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
चावल निर्यातक लंबे समय से मंडी शुल्क में छूट की मांग कर रहे थे। पिछले साल भी सरकार ने यह सुविधा दी थी, और दिसंबर 2025 में इसकी अवधि समाप्त हो रही थी।
चावल पर केंद्रित प्रदर्शनी
मुख्यमंत्री ने चावल पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जिसमें विभिन्न किस्मों और उत्पादन क्षेत्रों, नवाचारों और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचारों से धान की पैदावार बढ़ेगी, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
