CG NEWS: निजी अस्पतालों की मनमानी पर ब्रेक, अब जांच होंगी एक तय रेट पर

CG NEWS: निजी अस्पतालों की मनमानी पर ब्रेक, अब जांच होंगी एक तय रेट पर
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सरकार की तैयारी से हेल्थ चेकअप होगा सस्ता, गरीब मरीजों को सीधी राहत

राज्य सरकार निजी अस्पतालों में सभी जांचों की मानकीकृत दरें तय करने की दिशा में काम कर रही है। इसका उद्देश्य निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक लैब्स की मनमानी पर रोक लगाना और स्वास्थ्य जांच को आम लोगों के लिए सुलभ बनाना है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सरकारी दरों को निजी अस्पतालों में भी लागू करने की तैयारी है, जिससे गरीब और बीपीएल मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

राजधानी समेत पूरे प्रदेश में निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक लैब्स द्वारा की जा रही मनमानी पर अब जल्द लगाम लग सकती है। हेल्थ चेकअप के नाम पर मरीजों से की जा रही बेतहाशा वसूली को रोकने के लिए राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। स्वास्थ्य विभाग प्रदेश के सरकारी और निजी अस्पतालों में सभी प्रकार की जांच जैसे ब्लड टेस्ट, एक्स-रे, सोनोग्राफी, सीटी स्कैन और एमआरआई के लिए एक समान और मानकीकृत दरें तय करने की दिशा में काम कर रहा है।

निजी अस्पतालों में मरीजों को नहीं मिलती पूरी जानकारी

वर्तमान में स्थिति यह है कि सरकारी अस्पतालों में अनेक जांचें या तो मुफ्त होती हैं या बेहद कम शुल्क पर उपलब्ध रहती हैं, लेकिन मरीजों की अत्यधिक भीड़, लंबा इंतजार और कई जगहों पर मशीनों के खराब रहने के कारण लोगों को मजबूरी में निजी अस्पतालों और लैब्स का सहारा लेना पड़ता है। निजी संस्थानों में यही जांच कई गुना महंगी हो जाती हैं, जिससे आम और मध्यम वर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है।

कई मामलों में मरीजों को यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया जाता कि कौन-सी जांच वास्तव में जरूरी है और कौन-सी केवल व्यावसायिक लाभ के लिए कराई जा रही है। इससे मरीज अनावश्यक खर्च उठाने को मजबूर हो जाते हैं।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यदि जांच की दरें तय कर दी जाएं और उन्हें निजी अस्पतालों में भी अनिवार्य रूप से लागू किया जाए, तो मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है। प्रस्तावित योजना के तहत प्रदेश में सभी प्रमुख जांचों के लिए एक मानकीकृत रेट लिस्ट तैयार की जाएगी। इन दरों पर सरकारी और निजी, दोनों तरह के अस्पतालों और लैब्स को जांच करनी होगी।

आकर्षक प्रलोभनों पर चला डंडा

दरअसल, राजधानी में निजी अस्पतालों की मनमानी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हाल ही में सड्डू क्षेत्र में संचालित एक निजी अस्पताल का मामला उजागर हुआ, जहां हेल्थ चेकअप के नाम पर मरीजों को दुबई टूर और टू-व्हीलर जीतने जैसे आकर्षक प्रलोभन दिए जा रहे थे। इस तरह के ऑफर्स के जरिए मरीजों को महंगे और अनावश्यक पैकेज बेचने का प्रयास किया जा रहा था. इस मामले को स्वदेश ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता बढ़ी है।

निजी अस्पतालों में भी लागू होंगी सरकारी दरें

योजना लागू होने के बाद मरीज प्रदेश के किसी भी अस्पताल या लैब में जाकर तय सरकारी दरों पर जांच करा सकेंगे। इसके लिए उन्हें केवल सरकारी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे खासतौर पर गरीब, बीपीएल और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को बड़ा फायदा मिलेगा, जो महंगी जांचों के कारण इलाज टालने को मजबूर हो जाते हैं।

पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से न केवल इलाज सस्ता होगा, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता भी आएगी। निजी अस्पतालों द्वारा मनमाने पैकेज, फर्जी ऑफर और अनावश्यक जांच कराने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।

इसके साथ ही निजी अस्पताल और लैब संचालकों से बातचीत कर दरें इस तरह तय की जाएंगी, ताकि वे भी इस व्यवस्था का विरोध न करें और मरीजों को बेहतर सेवा मिल सके। स्वास्थ्य विभाग का स्पष्ट कहना है कि इलाज मुनाफे का जरिया नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम होना चाहिए।

यदि यह योजना जमीन पर उतरती है, तो यह प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक बड़ा और ऐतिहासिक सुधार साबित हो सकती है।

सीएमएचओ रायपुर डॉ. मिथिलेश चौधरी ने बताया कि सरकार जरूरतमंद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में सरकारी सिस्टम को मजबूत करने के साथ-साथ निजी अस्पतालों में जांच की दरें तय करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

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