उड़ता पंजाब के बाद अब उड़ता छत्तीसगढ़…

बदलते रास्ते, बढ़ता नशा और युवा पीढ़ी पर मंडराता खतरा
पुलिस की लगातार कार्रवाई से घबराए नशा तस्कर अब नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। चिट्टा, एमडीएमए, गांजा और नशीली दवाओं की सप्लाई अब पहले से ज्यादा संगठित, तकनीकी और खतरनाक हो चुकी है। वीडियो कॉल, सोशल मीडिया और “पत्थर में दबाकर, पैसे छोड़ो–आकर ले जाओ” जैसे तरीकों से चल रहा यह कारोबार छत्तीसगढ़ के लिए गंभीर चेतावनी है। सवाल यह है कि क्या छत्तीसगढ़ भी उसी राह पर बढ़ रहा है, जिस पर कभी पंजाब पहुँचा था?
पुरानी घटनाएं, गहरे होते संकेत
रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर, बस्तर और महासमुंद जैसे इलाकों से लगातार नशे की खेप पकड़ी गई है। कई मामलों में कॉलेज छात्र, बेरोजगार युवक और नाबालिग भी इस नेटवर्क में शामिल पाए गए। स्कूलों के आसपास नशे की बिक्री और ग्रामीण इलाकों तक गांजे की पहुँच ने खतरे को और गंभीर बना दिया है।
राज्य में नशे का जाल और हो रहा मजबूत
जांच एजेंसियों और पुलिस कार्रवाई से सामने आया है कि पाकिस्तान से पंजाब के रास्ते हेरोइन और सिंथेटिक ड्रग्स भारत में दाखिल हो रहे हैं। इसके बाद यह नेटवर्क मध्य भारत तक फैल रहा है। दूसरी ओर ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल से गांजे की सप्लाई पहले से जारी है। इन दोनों रूट्स के मिलने से छत्तीसगढ़ नशा तस्करी की एक अहम कड़ी बनता जा रहा है।
वीडियो कॉल से तय होती है डील
अब नशे का कारोबार आमने-सामने नहीं चलता। तस्कर वीडियो कॉल, सोशल मीडिया चैट और एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। लोकेशन भेजी जाती है, पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर होते हैं और नशा पत्थरों, झाड़ियों या सुनसान जगहों में दबाकर रख दिया जाता है। खरीदार को सिर्फ एक मैसेज मिलता है“आकर ले जाओ।”
ट्रांजिट से कंज्यूमर स्टेट बनने का खतरा
पहले छत्तीसगढ़ को केवल ट्रांजिट स्टेट माना जाता था, लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं। गाँव, कस्बे, शहरी बस्तियाँ, स्कूल और कॉलेज हर जगह नशे की खपत बढ़ रही है। यह साफ संकेत है कि राज्य धीरे-धीरे कंज्यूमर स्टेट बनता जा रहा है। इसका सबसे बड़ा असर युवाओं और किशोरों पर पड़ रहा है।
भट्टी में झोंका गया नशा
कार्रवाई सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रही। महासमुंद में 9 वर्षों में जब्त 938 किलो से अधिक गांजा एक साथ नष्ट किया गया। बिलासपुर में 12 टन गांजे से बिजली बनाई गई और 5 मेगावॉट ऊर्जा का उत्पादन हुआ। सूरजपुर में 4 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का गांजा और डोडा पावर प्लांट में जलाया गया। रायपुर में 24 हजार किलो गांजा एक ही दिन में नष्ट किया गया। ये प्रयोग न केवल सुरक्षित नष्टीकरण के उदाहरण बने, बल्कि सरकारी खर्च भी घटा।
बुलडोजर कार्रवाई, तस्करों के ठिकाने ध्वस्त
रायपुर के डेरापारा समेत कई इलाकों में अवैध कमाई से बने मकानों पर बुलडोजर चलाया गया। जांच में सामने आया कि इन्हीं ठिकानों से गांजा और शराब की बिक्री होती थी। जमीन नगर निगम की थी और बिजली चोरी की जा रही थी। कार्रवाई ने साफ संदेश दिया कि नशे के नेटवर्क को जड़ से उखाड़ा जाएगा।
पंजाब से सबक, छत्तीसगढ़ के पास मौका
पंजाब ने नशे की भारी कीमत चुकाई, तब जाकर समाज एकजुट हुआ। छत्तीसगढ़ के पास अभी मौका है कि वह समय रहते चेत जाए। वरना डर यही है कि उड़ता पंजाब के बाद कहीं उड़ता छत्तीसगढ़ न बन जाए।
नशे के कारोबारियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और परिवारों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है।
-डॉ. लाल उमेद सिंह, एसएसपी रायपुर
