बजट से पहले बाजार में हाहाकार:सोना 13 हजार और चांदी 26 हजार टूटी

बजट से पहले बाजार में हाहाकार:सोना 13 हजार और चांदी 26 हजार टूटी
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बजट से ठीक पहले बाजार में माहौल पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। शेयर बाजार दबाव में है और इसी बीच कमोडिटी मार्केट से भी बड़ा झटका मिला है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना और चांदी में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसका असर गोल्ड-सिल्वर ETFs से लेकर मेटल सेक्टर के शेयरों तक साफ दिख रहा है।

तीसरे दिन भी जारी गिरावट, निवेशकों में बेचैनी

कमोडिटी बाजार में सोना और चांदी लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में फिसले हैं। मौजूदा गिरावट इतनी तेज है कि ज्यादातर निवेशक गोल्ड और सिल्वर ETFs से निकलते दिख रहे हैं।

इसी का असर यह रहा कि निप्पॉन इंडिया सिल्वर ETF और निप्पॉन इंडिया गोल्ड ETF में करीब 11 फीसदी तक की गिरावट आई और दोनों में लोअर सर्किट लग गया।

मेटल सेक्टर में भारी बिकवाली

सोना-चांदी की गिरावट का सीधा असर मेटल सेक्टर पर भी पड़ा है। कारोबार के दौरान कई दिग्गज शेयरों में तेज टूट देखने को मिली।

  • वेदांता के शेयर करीब 10 फीसदी टूटे
  • हिंदुस्तान जिंक में 10 फीसदी की गिरावट
  • हिंदुस्तान कॉपर के शेयर 18 फीसदी से ज्यादा फिसले
  • हिंदुस्तान एल्युमिनियम करीब 5 फीसदी नीचे
  • हिंडाल्को में लगभग 7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई
  • हिंदुस्तान कॉपर में आई तेज गिरावट ने खासतौर पर निवेशकों को चौंका दिया है।

MCX पर क्या चल रहे हैं भाव

मल्टी कमोडिटी मार्केट में सोना फिलहाल ₹1.40 लाख के नीचे कारोबार कर रहा है। वहीं चांदी करीब ₹2.70 लाख के आसपास बनी हुई है। बाजार में यह गिरावट लगातार तीसरे सत्र में देखने को मिली है, जिससे निवेशक असमंजस में हैं कि आगे क्या रुख अपनाया जाए.

रिकॉर्ड हाई से बड़ी फिसलन

गौर करने वाली बात यह है कि पिछले कारोबारी सत्र में ही चांदी अपने रिकॉर्ड हाई से करीब ₹1.28 लाख टूट गई थी। वहीं सोना भी ₹31 हजार से ज्यादा की गिरावट दर्ज कर चुका है। इतनी बड़ी टूट ने बाजार की धारणा को पूरी तरह बदल दिया है.

बजट पर टिकी निगाहें

इधर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज अपना नौवां केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। बाजार को उम्मीद है कि बजट में सोने और चांदी को लेकर कुछ अहम फैसले हो सकते हैं।

ज्वेलर्स की मांग है कि सोना-चांदी पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी घटाई जाए, ताकि दाम नीचे आएं और ग्राहकों की खरीदारी लौट सके। अब निवेशकों और कारोबारियों, दोनों की नजरें बजट घोषणाओं पर टिकी हैं.

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