LIC का दमदार प्रदर्शन, 9 महीने में मुनाफा 16.68% बढ़ा

LIC का दमदार प्रदर्शन, 9 महीने में मुनाफा 16.68% बढ़ा
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देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी एलआईसी (LIC) ने चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में एक बार फिर मजबूत वित्तीय स्थिति का संकेत दिया है। मुनाफे से लेकर प्रीमियम आय तक, ज्यादातर मोर्चों पर कंपनी ने स्थिर और भरोसेमंद ग्रोथ दर्ज की है। मुंबई से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 को समाप्त नौ माह की अवधि में एलआईसी का कर पश्चात लाभ 16.68 प्रतिशत बढ़ गया है।

कर पश्चात लाभ में 16.68 प्रतिशत की छलांग

एलआईसी का कर पश्चात लाभ (पीएटी) 31 दिसंबर 2025 को समाप्त नौ महीनों में बढ़कर 33,998 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 29,138 करोड़ रुपये था। इस तरह निगम के मुनाफे में 16.68 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

एपीई और प्रीमियम आय में भी मजबूती

इस अवधि में समग्र एपीई 15.88 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 44,007 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। व्यक्तिगत व्यवसाय एपीई 11.95 प्रतिशत बढ़कर 27,552 करोड़ रुपये रहा, जबकि समूह व्यवसाय एपीई 23.14 प्रतिशत की तेजी के साथ 16,455 करोड़ रुपये हो गया।

निवेश पर स्थिर रिटर्न

अवास्तविक लाभ को छोड़कर पॉलिसीधारकों की निधियों पर निवेश से प्राप्त प्रतिफल 8.77 प्रतिशत रहा। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 8.82 प्रतिशत था, यानी रिटर्न लगभग स्थिर बना हुआ है।

बाजार हिस्सेदारी में एलआईसी की बादशाहत बरकरार

एफवाईपीआई (आईआरडीएआई मानकों के अनुसार) के आधार पर व्यक्तिगत व्यवसाय में एलआईसी की बाजार हिस्सेदारी 35.84 प्रतिशत रही, जबकि समूह व्यवसाय में यह 71.36 प्रतिशत तक पहुंच गई। कुल जीवन बीमा बाजार में एलआईसी की हिस्सेदारी 57.07 प्रतिशत रही, जिससे उसकी अग्रणी स्थिति कायम है।

कुल प्रीमियम आय में 9 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी

31 दिसंबर 2025 को समाप्त नौ महीनों में एलआईसी की कुल प्रीमियम आय 3,71,293 करोड़ रुपये रही। पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 3,40,563 करोड़ रुपये थी, यानी 9.02 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

व्यक्तिगत और नवीनीकरण प्रीमियम में इजाफा

इस अवधि में व्यक्तिगत नव व्यवसाय प्रीमियम आय 44,941 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 5.89 प्रतिशत अधिक है। वहीं व्यक्तिगत नवीनीकरण प्रीमियम आय 6.75 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,91,050 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

पॉलिसियों की संख्या में हल्की गिरावट

नौ महीनों की अवधि में व्यक्तिगत सेगमेंट में कुल 1,16,63,856 पॉलिसियां बेची गईं। हालांकि पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले इसमें 0.40 प्रतिशत की मामूली कमी दर्ज की गई है।

सरकार की नीतियों का दिखा सकारात्मक असर

एलआईसी के सीईओ एवं एमडी आर. दुरैस्वामी ने कहा कि जीवन बीमा उद्योग में उपभोक्ताओं और कंपनियों दोनों ने सरकार की पहलों, खासकर जीएसटी 2.0, के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया है। एलआईसी ने वॉल्यूम ग्रोथ के साथ-साथ उत्पाद और वितरण चैनलों में विविधीकरण पर भी फोकस किया है।

बीमा सखी योजना से ग्रामीण भारत पर फोकस

डिजिटल परियोजनाओं के साथ-साथ एलआईसी ने ‘बीमा सखी योजना’ के जरिए महिला एजेंटों को सशक्त बनाने पर जोर दिया है। 31 दिसंबर 2025 तक 2,97,028 महिलाओं को बीमा सखी के रूप में नियुक्त किया जा चुका है, जिससे ग्रामीण इलाकों में बीमा की पहुंच बढ़ी है।

LIC का 9 माह का प्रदर्शन ऐसा रहा

  • 31 दिसंबर 2025 को समाप्त नौ माह के लिए प्रदर्शन (नी माह वित्त वर्ष 2026) तक ऐसा रहा कर-पक्षात लाभ 16.68 प्रतिशत बढ़कर रु. 33.998 करोड़ हो गया।
  • व्यक्तिगत व्यवसाय असहभागी (नॉन पार) एपीई 47,44 प्रतिशत बढ़कर रु. 10,045 करोड़ हो गया।
  • व्यक्तिगत व्यवसाय में असहभागी (नॉन पार) एपीई का हिस्सा वित वर्ष 26 के नौ माह में 36.46 प्रतिशत रहा, जबकि वित्त वर्ष 25 के नौ माह में यह 27.68 प्रतिशत था।
  • व्यक्तिगत व्यवसाथ एपीई 11.95 प्रतिशत से बढ़कर रु. 27,552 करोड़ हो गया और समूह व्यवसाय एपीई 23.14 प्रतिशत से बढ़कर रु. 16,455 करोड़ ही गया।
  • समग्र एपीई 15.88 प्रतिशत से बढ़कर रु. 44,007 करोड़ ही गया।
  • नव व्यवसाय का मूल्य (वीएनबी) 27.96 प्रतिशत से बढ़कर रु. 8.288 करोड़ हो गया। वीएनबी मार्जिन (नेट) 170 बीपीएस की वृद्धि के साथ 18.8 प्रतिशत हो गया।
  • नव व्यवसाय प्रीमियम आय (व्यक्तिगत) 5.89 प्रतिशत से बढ़कर रु. 44.941 करोड हो गई।
  • सकल समूह व्यवसाय प्रीमियम आय 13.56 प्रतिशत से बढ़कर रु. 1,35,302 करोड़ हो गई।
  • सकल प्रीमियम आय 9.02 प्रतिशत से बढ़कर रु. 3,71,293 करोड़ हो गई।
  • व्यक्तिगत नव व्यवसाय प्रीमियम में बैंकएश्योरेंस और वैकल्पिक चैनलों का हिस्सा वित्त वर्ष 2025 के नौ माह के 4.73 प्रतिशत से बढ़कर वित वर्ष 2026 के नौ माह के लिए 7.45 प्रतिशत हो गया।
  • एयूएम 8.01 प्रतिशत बढ़कर रु. 59,16,680 करोड़ हो गया।
  • सॉल्वेंसी अनुपात 2.02 से बढ़कर 2.19 हो गया।
  • व्यय अनुपात वित वर्ष 2025 के नौ माह के 12.97 प्रतिशत से वित्त वर्ष 2026 के नौ माह के लिए 132 बीपीएस घटकर

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