विश्व शिक्षा दिवस पर अफगानिस्तान की महिलाओं का छलका दर्द: साढ़े चार साल से शिक्षा से वंचित

अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से वहाँ पर महिलाओं की स्थिति के विषय में अब बहुत कुछ कहा नहीं जा रहा है, ऐसा लगता है कि जैसे चर्चा और राजनीति में से अफगानी महिलाएं जैसे पूरी तरह से विलुप्त हो चुकी हैं। अब उनके विषय में न ही बात होती है और न ही यह चर्चा होती है कि कैसे उनके जीवन में शिक्षा वापस लाई जाए। न ही उनके अधिकारों के लिए विश्व में कहीं पर भी आंदोलन भी होते है? वे लड़ाई लड़ रही हैं, परंतु उनकी लड़ाई में वे अकेली ही हैं। कक्षा 5 के बाद उनके लिए उनके देश में शिक्षा नहीं है और उसके साथ ही उनके साथ वह व्यवहार है, जिसकी कहीं पर तुलना ही नहीं है। वे रो रही हैं, परंतु उनके आँसू नहीं दिखते हैं।
अभी हाल ही में अफगानी सरकार के एजुकेशन मिनिस्टर का पुराना वीडियो फिर से सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, जिसमें यह स्पष्ट कहा जा रहा है कि शरिया के अनुसार ही महिलाओं की तालीम दी जाएगी और वे देख रहे हैं कि कैसे इस्लामिक और अफगानी तहज़ीब के हिसाब से महिलाओं को तालीम दी जाए! हालांकि इस वीडियो को नए दावे के साथ साझा किया जा रहा है। बात सही कही जा रही है, परंतु वीडियो पुराना है। बहरहाल दर्द पुराना और ताजा है। अफगानिस्तान में लड़कियों की स्थितियाँ क्या हैं, वह किसी से छिपी नहीं है। वे बिना परदे के बाहर नहीं निकल सकती हैं, उन्हें सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह से बेदखल कर दिया गया है। बाजार, रेस्टोरेंट आदि हर जगह पर जाने को लेकर उनपर पाबंदी है।
यूनाइटेड नेशंस ने भी अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर इस बात पर चिंता जताई कि अफगानिस्तान में लड़कियों को शिक्षा से वंचित रखा जा रहा है। संस्था ने चेतावनी भी दी कि अगर ये पाबंदियाँ लगातार चलती रहीं तो वे लड़कियों का ही भविष्य अंधकार में नहीं डालेंगी, बल्कि देश के विकास और स्थिरता को भी प्रभावित करेंगी। यूनिसेफ और यूनेस्को ने शनिवार को एक संयुक्त बयान में कहा कि अफगानिस्तान ही पूरे विश्व में एकमात्र ऐसा देश है, जहां पर महिलाओं और लड़कियों की तालीम पर पाबंदी है।
यह विडंबना ही है कि लगभग साढ़े चार साल से अफगानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध है, परंतु भारत में वह वर्ग जो तालिबान के सत्ता में आने से प्रसन्न और गदगद था, वह अभी भी एकदम मौन है। इन लड़कियों के लिए कक्षा पाँच के बाद शिक्षा के दरवाजे पूरी तरह से बंद हैं। यूनिवर्सिटीज़ बंद हैं इनके लिए, मगर इनकी पीड़ा सुनी नहीं जा रही है। एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें कुछ तालिबानी खाली कक्षाओं में नाचते हुए नजर आ रहे हैं। उस वीडियो के विषय में यह कहा जा रहा है कि यह वीडियो लड़कियों की खाली कक्षाओं में जश्न मनाते हुए तालीबानियों का है।
मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले पत्रकार और विदेशों में रह रही अफगानी महिलाएं सोशल मीडिया पर आवाज उठा रही हैं। वे अपनी बात कह रही हैं, हाँ, वह बात दूसरी है कि उनकी बात को सुना कम जा रहा है।
लेखिका - सोनाली मिश्रा
