दीन सबन को लखत है, दीनन लखे न कोय, जो दीनन को लखत है दीनदयाल सम होय

दीन सबन को लखत है, दीनन लखे न कोय, जो दीनन को लखत है दीनदयाल सम होय
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मनोज दुबे

पूज्य पंडित दीनदयाल जी की 58वी पुण्यतिथि पर

यह पंक्तियां अपने जीवन से समर्पण को परिभाषित करने बाले सेवा और संकल्प की प्रतिमूर्ति पूज्य पंडित दीनदयाल जी उपाध्याय के ऊपर सटीक बैठती हैं। जनकल्याण और जनसेवा के पर्याय पूज्य पंडित जी की पुण्यतिथि पर उनके स्मरण और वंदन के साथ मन में जनसेवा का संकल्प दृढ़ होता है। दीन, दुखी, शोषित और वंचित के कल्याण और उत्थान के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित करने बाले पूज्य दीनदयाल जी जब यह कहते है कि *मुझे नही पता भगवान कंदराओं में तपस्या करने, मंदिर में घण्टी बजाने और आरती उतारने से मिलेंगे या नही, मुझे यह भी नही पता भगवान व्रत, उपासना आदि से मिलेंगे या नही, मगर मुझे इतना अवश्य पता है कि भगवान किसी गरीब की आंख का आँसू पोंछ देने से उन आँखी में तुम्हे अवश्य मिलेंगे* तो ह्रदय की हर धड़कन,जीवन का क्षण क्षण एवं शरीर का कण कण जनसेवा के लिए समर्पित करने की ध्वनि से गुंजायमान होने लगता है।

अजातशत्रु पूज्य पंडित जी के जीवन पर यदि दृष्टि डालें तो हमारे चिंतन में आता है कि जिस व्यक्ति का अपना कोई घर नही वह हर घर में जन जन की श्रद्धा के केंद्र बन कर उपस्तिथ है, जिनको स्वयं बीमारी के उपचार का अभाव रहा उनके नाम से आज करोड़ो लोगो को उपचार मिलता है, जिनके नाम से आज भारत में समग्र जनकल्याण की गंगा प्रवाहित है । ऐसे पूज्य दीनदयाल जी का जीवन हमें और विश्व को जनकल्याण,गरीब, शोषित, वंचित की सेवा का संकल्प लेने को प्रेरित करता है। आज देश और अन्य प्रदेशों की भाजपा नीत सरकार पंडित जी की नीतियों पर चलते हुए 140 करोड़ देशवासियों के जनकल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रही है।

आज पंडित जी के विचारों पर चल कर देश की मोदी सरकार भारत को खुशहाल, सम्रद्ध, शक्तिशाली और वैभवशाली बनाने निरन्तर कार्य कर रही है, प्रधानमंत्री माननीय मोदी जी पंडित जी के विचार को धारण कर उनके संस्कार और विचार के सच्चे संवाहक बन कर कार्य कर रहे हैं। भारत सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री माननीय मोदी जी ने भारत के सिंहासन को जनकल्याण हेतु आसन समझ कर पंडित जी के विचार को आधार बना कर भारत के जन जन की सेवा कर भारत में सर्वस्पर्शी जनकल्याण की एक नई इबारत लिखी है।

आज हम पंडित जी की पुण्यतिथि समर्पण दिवस के रूप में मना रहे हैं वास्तव में समर्पण का यदि कोई पर्यायवाची हैं एवं समर्पण को अपने जीवन आचरण से कोई परिभाषित करते है तो वे हैं महामना पूज्य पंडित दीनदयाल जी उपाध्याय । प्रतिकूल परिस्तिथि और कंटकीर्ण मार्ग पर नंगे पैर चलने के साहस का सामर्थ्य रखने बाले, देश के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने बाले पूज्य पंडित जी का जीवन *तन समर्पित मन समर्पित और यह जीवन समर्पित चाहता हूँ मातृभू तुझे कुछ और भी दूं के भाव को सार्थक कर माँ भारती की सेवा को समर्पित रहा।

पंडित जी के माँ भारती के प्रति समर्पण भाव को एक घटना से समझा जा सकता है एक बार पंडित दीनदयाल जी एक महत्वपूर्ण बैठक लेने जा रहे थे सायकल पर पीछे बैठे पंडित जी का पांव सायकल के पहिये में उलझ कर घायल हो गया, खून निकलता देख सायकल चला रहे कार्यकर्ता ने उन्हें अस्पताल चलने की सलाह दी मगर पंडित जी ने एक कपड़ा अपने घाव पर बांध लिया और बोले पहले हम बैठक करेंगे तुम बैठक स्थल पर चलो। बैठक हो जाने के बाद लोगो ने देखा उनके घाव पर बंधा कपड़ा खून से भर गया तब कार्यकर्ता उन्हें किसी क्लिनिक पर ले कर पहुंचे डॉक्टर ने घाव का कपड़ा खोला और कहा किबयह तो बड़ा घाव है आपको इसकी चिंता पहले करनी थी तब माँ भारती के लाल पंडित दीनदयाल जी ने उत्तर दिया *मेरी माँ भारती के शरीर पर जो घाव लगे हैं वह इस छोटे से घाव से बहुत बड़े हैं मैं उन घावों के उपचार की चिंता कर रहा हूँ और आप मेरे पैर पर लगे छोटे से मेरे इस घाव की चिंता की बात करते हो।

माँ भारती की सेवा में ऐसे समर्पित व्यक्तित्व थे पूज्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी।

हम सबको एकात्म मानववाद का दर्शन देने बाले पंडित दीनदयाल जी के विचार के द्वारा ही भारत का समग्र विकास हो कर भारत पुनः विश्वगुरु कहलायेगा। आज पूज्य पंडित जी की पुण्यतिथि पर हम सब राष्ट्र के लिए समर्पण का संकल्प लें सेवा का व्रत धारा,अर्पित जीवन सारा के आचरण को उद्देश्य बना कर, चरैवेति चरैवेति का मूलमंत्र धारण कर कार्य करें और पंडित जी को श्रद्धासुमन अर्पित करें तब जा कर हम उनके सपनों को साकार कर परमवैभवशाली भारत का निर्माण कर सकेंगे। शुचिता एवं समर्पण के पर्याय पूज्य पंडित जी का पुण्य स्मरण कर उनके वंदन में यही कहा जा सकता है कि युगों युगों में धरती पर कोई एक मसीहा आता है जीवन दीनों की सेवा को कर समर्पित, वह पंडित दीनदयाल कहलाता है। आज आवश्यकता है हम सभी की सेवा का आधार पंडित जी का विचार धारण कर हम सभी उनके संस्कार विचार के संवाहक बन अंत्योदय में सहायक बनें ।

पूज्य पंडित जी के चरणों में बारम्बार नमन

अर्पित श्रद्धासुमन

मनोज दुबे, गुना

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