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नरेंद्र से नरेंद्र तक

नरेंद्र से नरेंद्र तक

हमने स्वामी विवेकानन्द को नहीं देखा।11 सितंबर 1893 का विश्व धर्म सम्मेलन हम सब का मस्तक आज भी गर्व से ऊंचा करता है।क्या 23 सितंबर 2019 को एक बार फिर हमें विश्व धर्म सम्मेलन की नए स्वरूप में याद नहीं दिला रहा ? मै श्री नरेंद्र मोदी की तुलना स्वामी विवेकानंद से नहीं कर रहा हूं।तुलना होनी भी नहीं चाहिए।हर समय काल में दिव्य विभूतियां जन्म लेती हैं।आज यह एक सच्चाई है कि श्री मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व गुरु के सिंहासन ओर है।अमेरिका के हुस्ट न ने बीती सुबह एक इतिहास की रचना की।यह सामान्य घटना नहीं है कि एन आर जी स्टेडियम में उपस्थित 50 हजार अमेरिकन नागरिक भारतीय संसद के सम्मान में श्री मोदी के आव्हान पर एक साथखड़े हुए।यह असाधारण घटना ही है कि सूदूर अमेरिका के विविध प्रांतों से 15 15 घंटे की यात्रा करके मोदी को सुनने आए थे।यह कोई दिहाड़ी के मजदूर नहीं थे।विपक्ष विधवा विलाप कर सकता है कि यह एक प्रायोजित कार्यक्रम है ओर बेशक है भी।पर क्या यह प्रायोजित करना आज की तारीख में किस राजनेता के वश में है।माना अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी मोदी के बहाने आगामी चुनाव को देखते हुए भारतीय समुदाय को साधने का प्रयास कर रहे हैं।पर आखिर ऐसा क्या है कि यही जरूरत इजरायल के राष्ट्रपति भी अपने देश में अनुभव कर रहे हैं।आखिर क्या वजह है कि आज अरब के देश मोदी के सम्मान में नतमस्तक है। और यह जब सुखद दृश्य है तब मोदी कह क्या रहे हैं।वह बात कर रहे हैं 130 करोड़ भारतीय पुर शार्थ की।वह बात कर रहे हैं वसुधैव कुटुंब की।वह बात कर रहे हैं अनेकता में एकात्मता के भारतीय दर्शन की।

वह बात कर रहे हैं पर्यावरण पर सनातन दृष्टिकोण की।वह दाहोस में पश्चिम के दिग्गज राष्ट्र अध्यक्षों के बीच उनकी दोहन की प्रवृत्ति को निशाने पर लेने का साहस भी दिखाते है वहीं वह भारत किस प्रकार आज जागृत है इसकी गर्जना भी अमेरिका में करते हैं।वह यह विश्वास के साथ आज समझाने में सफल है कि मुंबई पर हुआ हमला हो वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुआ हमला एक ही है।आतंक पर आज विश्व का जो दृष्टिकोण बदल रहा है जो स्वर बदले है वह आज भारत की ही विजय है।21 जून को अरब देशों सहित विश्व आज योग दिवस पर क्या भारत माता के आगे शीष नहीं नवा रहा।याद अा रहे हैं आज स्वामी विवेकानंद जिनकी देव वाणी थी कि ज्यादा नहीं 150 वर्ष बाद भारत का उदय निश्चित है।याद अा रहे हैं आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक स्वर्गीय सुदर्शन जी,वह कहते थे 2021 आते आते भारत विश्व गुरु होगा।

क्या यह आज संकेत नहीं मिल रहे हैं।विधर्मी शक्तियों को रोने दें वह हतभागी हैं।पर क्या आज 130 करोड़ भारतीय मोदी के सम्मान में खड़े होकर करतल ध्वनि नहीं कर रहे हैं।मै तो सुन रहा हूं ओर शायद आप भी।

Updated : 24 Sep 2019 2:45 AM GMT
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अतुल तारे

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