आर्थिक सर्वेक्षण -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत का प्रतिबिंब

संसद में बजट सत्र में आर्थिक सर्वेक्षण रूपी दर्पण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत का प्रतिबिंब स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हो रहा है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उच्चारित मंत्र-सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि।मंत्रपूते सदा देवि महालक्ष्मि नमोस्तुते। अर्थात- माँ लक्ष्मी हमें सिद्धि और विवेक देती हैं, समृद्धि और कल्याण भी देती हैं। धन की देवी माँ लक्ष्मी के इस मंत्र को आत्मसात करते हुए केंद्रीय वित्त एवं कारपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार बजट प्रस्तुत करने जा रही हैं।वह भारतीय संसद के इतिहास में पहली महिला वित्त मंत्री हैं, जो निर्बाध रूप से संसद में नौवीं बार बजट प्रस्तुत करने जा रही हैं। उन्होंने बजट सत्र के दौरान संसद में वर्ष 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किये।
वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी और जीवीए वृद्धि के लिए प्रथम अग्रिम अनुमान क्रमश: 7.4 और 7.3 प्रतिशत ।विकास दर निरन्तर चौथी बार विश्व में सर्वाधिक है।पिछले सर्वेक्षण में 6.3-6.8% का अनुमान था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुशल आर्थिक नीतियों का सुफल है कि यह आर्थिक सर्वेक्षण अपने ही पूर्वानुमानों को ध्वस्त कर रहे हैं। भारत की रिफॉर्म एक्सप्रेस,विकास के पथ पर सरपट दौड़ते हुए,विकसित भारत के गंतव्य रूपी लक्ष्य पर पहुँचने को लालायित है। भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बना हुआ है।भारत की वृद्धि का अनुमान लगभग 7.4 प्रतिशत, जबकि वित्त वर्ष 2027 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.8 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत का अनुमान है।वित्त वर्ष 2025 में केन्द्र की राजस्व प्राप्ति जीडीपी के 11.6 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। राजकोषीय घाटा 4.4 प्रतिशत का अनुमान है पिछले वर्ष राजकोषीय घाटा अनुमान 4.8 प्रतिशत था।अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में राजकोषीय घाटे में कमी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं निर्मला सीतारमन के कुशल वित्तीय प्रबंधन का सुफल है।
बैंक एनपीए में बहु-दशकीय गिरावट 2.2 प्रतिशत तक हुई है।यह मोदी सरकार के पूर्व में किए गए राष्ट्रीय बैंक जैसे ओरिएंटल बैंक, आंध्रा बैंक, इलाहाबाद बैंक आदि के विलय के निर्णय की सफलता को भी प्रदर्शित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्त्वपूर्ण आर्थिक सुधार जन धन योजना के अंतर्गत मार्च 2025 तक 55 करोड़ 2 लाख बैंक खाते खोले गए हैं।ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्र में 36 करोड़ 63 लाख खाते खुले हैं। सितम्बर 2025 में विशिष्ट निवेशकों की संख्या12 करोड़ से अधिक हुई, इनमें लगभग 25 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं । वर्ष 2005 से 2024 के दौरान भारत का वैश्विक व्यापार निर्यात एक प्रतिशत से लगभग दोगुना होकर 1.8 प्रतिशत हुआ है। वित्त वर्ष 2025 में सेवा निर्यात अब तक का सर्वाधिक 387.6 बिलियन अमरीकी डॉलर हुआ है।13.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
वित्त वर्ष 2025 के दौरान भारत विश्व में सबसे बड़ा जमा प्राप्ति वाला देश बना है।135.4 बिलियन अमरीकी डॉलर का आंकड़ा छुआ है।16 जनवरी, 2026 को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 701.4 बिलियन अमरीकी डॉलर हुआ है।इसमें 11 महीने का आयात और विदेशी कर्ज का 94 प्रतिशत शामिल है।अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान औसत घरेलू मुद्रास्फीति 1.7 प्रतिशत रही है।एतिहासिक निम्न स्तर पर है। कृषि वर्ष 2024-25 के दौरान भारत का खाद्यान्न उत्पादन 3577.3 लाख मीट्रिक टन एलएमटी पर पहुंचा है। पिछले वर्ष के मुकाबले 254.3 एलएमटी की वृद्धि हुई है।यह वृद्धि चावल, गेहूं, मक्का और मोटे अनाज श्री अन्न के उत्पादन में बढोत्तरी के कारण हुई है।खाद्य अनाज उत्पादन में वृद्धि के अतिरिक्त बागवानी, जो कृषि जीवीए का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा है, कृषि वृद्धि का एक प्रमुख चालक बनकर उभरी है। 2024-25 में बागवानी उत्पादन 362.08 मिलियन टन (एमटी) तक पहुंच गया है।पीएम किसान सम्मान योजना के शुरू होने से अब तक पात्र किसानों को 4.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई है।
वर्ष 2047 तक विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए मनरेगा के स्थान पर ग्रामीण रोजगार को संरेखित करते हुए विकसित भारत-जी राम जी की स्थापना की गई है। वित्त वर्ष 2026 की पहली और दूसरी तिमाही में विनिर्माण वृद्धि क्रमश: 7.72 प्रतिशत और 9.13 प्रतिशत रही, यह ढांचागत सुधार को प्रदर्शित करता है।14 क्षेत्रों में उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के अंतर्गत 2 लाख करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश हुआ है।सितम्बर 2025 तक उत्पादन,बिक्री 18.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक हुई और 12.6 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं।भारत सेमीकंडक्टर मिशन से घरेलू क्षमता बढ़ी है।10 परियोजनाओं में लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ है ।
रेलवे के हाईस्पीड कॉरिडोर में वित्त वर्ष 2014 में 550 किलोमीटर की तुलना में वित्त वर्ष 2026, दिसंबर 2025 तक 5,364 किलोमीटर हुआ, वित्त वर्ष 2026 में 3500 किलोमीटर की वृद्धि हुई है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू उड़ान बाजार, हवाई अड्डों की संख्या 2014 में 74 से 2025 में 164 हुई है। डिस्कॉम के लिए ऐतिहासिक परिवर्तन वित्त वर्ष 2025 में पहली बार 20,701 करोड़ रुपये का सकारात्मक पीएटी दर्ज किया गया है। ओवरऑल नवीकरणीय ऊर्जा और स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता के क्षेत्र में भारत की विश्व स्तर पर तीसरी रैंक है। भारत स्वायत्त सैटेलाइट डॉकिंग (स्पेडैक्स) क्षमता प्राप्त करने वाला चौथा देश बना है। शिक्षा के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक चरण में कुल नामांकन अनुपात,जीईआर क्रमश: 90.9, 90.3 और 78.7 रहा है।भारत में इस समय 23 आईआईटी, 21 आईआईएम और 20 एम्स विद्यमान हैं।जंजीबार और अबूधाबी में दो अंतर्राष्ट्रीय आईआईटी कैम्पस स्थापित हैं।
1990 के बाद भारत में मातृ और शिशु मृत्यु दर में गिरावट, वैश्विक औसत से कम हुई है।यह उपलब्धि अनुकरणीय है। प्रशंसनीय है। जनवरी 2026 तक ई-श्रम पोर्टल पर 31 करोड़ से अधिक असंगठित कामगार पंजीकृत हैं।54 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। वित्त वर्ष 2025 में राष्ट्रीय करियर सेवा पोर्टल पर रिक्तियों की संख्या 2.8 करोड़ से अधिक हुई है। वित्त वर्ष 2026 में सितंबर तक 2.3 करोड़ की संख्या पार की है। नीति आयोग द्वारा मापित बहु-आयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) 2005-06 में 55.3 प्रतिशत से 2022-23 में 11.28 प्रतिशत हुई है।उल्लेखनीय कमी आई है। समीक्षा के अनुसार महत्वपूर्ण वृद्धि के लिए अनुशासित स्वदेशी का आह्वान, महत्वपूर्ण क्षमता प्राप्त करने के लिए त्रिस्तरीय रणनीति तैयार, निवेश लागत मूल्य में कमी, उन्नत विनिर्माण में मजबूती और आत्मनिर्भरता से रणनीतिक अपरिहार्यता की ओर प्रगति का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। इस आर्थिक सर्वेक्षण में अर्थव्यवस्था के चिंतन के साथ-साथ मानवीय स्वास्थ्य के प्रति भी दिशा दी गई है।
लेखक-सत्येंद्र जैन,आर्थिक चिंतक है
