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डॉ. गोविंद सिंह : जमीन से जुड़ा एक अपराजेय योद्धा

डॉ. गोविंद सिंह : जमीन से जुड़ा एक अपराजेय योद्धा
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राजनीति में सदाशयता जहां आत्मीयता का मार्ग प्रशस्त करती है वहीं झूठ व जातिगत परतों को भी एक झटके में उतार फेंकने का काम करती है। जिन चिरागों से अंधेरा दूर होता है, उन चिरागों की रोशनी से उजास भरने का काम एक सच्चा राजनीतिज्ञ ही कर सकता है। अंधेरे में प्रकाश की किरण की तरह जनमानस के हृदय में अपना स्थान बनाने वाले डॉ. गोविन्द सिंह किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने जमीन से जुड़ी राजनीति करते हुए सामान्य कार्यकर्ता की तरह सत्ता के कई पदों को सुशोभित किया है। वे जब भी चुनाव लड़ते हैं तो सारी विरोधी शक्तियां एकजुट होकर उन्हें पराजित करने के लिए एकत्र होती हैं किन्तु उनका व्यवहार, उनकी कर्मठता, उनकी ध्येयनिष्ठता उन्हें सफलता के उस सोपान पर प्रतिष्ठित करती है जहां से इस (लहार विधानसभा) अजेय दुर्ग को देखने का दुस्साहस कोई नहीं करता।

छोटी कद काठी, विरल केश, गठे हुए बदन के डॉ. गोविन्द सिंह बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। श्रेय जिनके लिए कभी प्रेय नहीं रहा। प्रदेश कांग्रेस के वे एकमात्र ऐसे इकलौते विधायक हैं जिनके क्षेत्र की सारी चार नगर परिषदें जनपद, मण्डी, मार्र्केटिंग आदि पर तो कांग्र्रेस काबिज रही ही है लेकिन जिला पंचायत और जिला योजना समिति में भी कांंग्रेस खासकर डॉ. गोविन्द सिंह का कब्जा होना उनकी सक्रियता को प्रदर्शित करता है। अपने पन्द्रह साल के वनवास में कांग्रेस जहां अस्त-व्यस्त और जीर्ण-शीर्ण हो गई थी तब प्रदेश का भिण्ड जिला ही एक मात्र ऐसा जिला था जहां कांग्रेस के डॉ. गोविन्द सिंह ही संजीवनी प्रदान कर रहे थे। भाजपा के पन्द्रह साल के शासन में डॉ. गोविन्द सिंह की राजनीति दिनानुदिन चमक लेती रही और उन पन्द्रह वर्षों में भाजपा का शीर्ष नेतृत्व क्षेत्र में कोई एक ऐसा विकल्प तैयार नहीं कर सका जो लहार के इस अजेय दुर्ग को ढहा सके। इन पन्द्रह वर्षों के शासन में वे भाजपाा से दो-चार हाथ सदैव करते रहे। न किसी के सामने झुके और ना ही अपने काम के लिए किसी से कहा। वे विधानसभा में हमेशा मुखर रहे और अपनी काबिलियत की दम पर ही न सिर्फ क्षेत्र का विकास कराते रहे वरन् कार्यकर्ताओं के भी काम कराते रहे। स्पष्टवादिता उनका स्वभाव है और स्वाभिमान उनके अंदर कूट-कूट कर भरा है। झुकना तो उन्होंने कभी सीखा ही नहीं और वफादारी इतनी कि जो उनके निरंतर संपर्क और साहचर्य में है उसके सुख-दु:ख में अनवरत सहभागिता करते रहे। यही कारण है कि वे अपने चुनाव में किसी को बुलाते नहीं, लोग स्वयं जाते हैं।

डॉ. गोविन्द सिंह चौबीस घंटे के नेता हैं। उनका प्रचार और जनसंपर्क लगातार पांच वर्ष तक चलता है। ज्यादातर समय वे क्षेत्र में ही रहते हैं। क्षेत्र में शोक हो या मंगल डॉ. सिंह हर उस जगह पहुंचते हैं। डॉ. सिंह की एक विशेषता यह भी है कि उनके चुनाव अभियान में जो व्यक्ति एक दिन का समय देकर आता है उसका भी एहसान मानने और पटाने का प्रयास करते हैं उनका यही गुण उन्हें अन्य राजनेताओं से पृथक करता है और उन्हें अजेय बनाता है। प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर के आयुर्वेद महाविद्यालय से बीएएमएस की डिग्री प्राप्त कर डॉ. सिंह छात्र राजनीति में सक्रिय रहे। वे वहां छात्रसंघ के अध्यक्ष भी रहे। उन दिनों के युवा राजनीतिज्ञ शरद यादव उनके समकालीन रहे हैं। विद्या अर्जित कर वे अपने गृह जनपद लहार आए और पहले मार्केटिंग और फिर नगर परिषद के अध्यक्ष रहे। वे जनता दल से पहले विधानसभा का चुनाव लड़े और हार गए। डॉ. गोविन्द सिंह विधानसभा का चुनाव जरूर हारे पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

मनुष्य का इतिहास सत और असत, अंधकार और प्रकाश के सतत् संघर्ष की कहानी है। नेकी और बदी के बीच एक मुसलसल जंग हमेशा से छिड़ी रही है। पिछले चार दशकों में तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद राजनीति के वैचारिक परिदृश्य में कांग्रेस की विचारधारा को जीवंत रखने का और उसे विमर्श के केन्द्र में सतत् बनाए रखने का काम मध्यप्रदेश में यदि कहीं भी हुआ तो वह भिण्ड जिले की लहार विधानसभा के सम्मानित विधायक डॉ. गोविन्द सिंह द्वारा किया गया। वरिष्ठता और पराक्रम के आधार पर आज वे मध्यप्रदेश के मंत्रिमण्डल में स्थान ले रहे हैं। यह प्रदेश व भिण्ड जिले के लिए गौरवशाली क्षण है।

सातवीं बार सदन में पहुंचे

कांग्रेस के 114 विधायकों में डॉ. गोविन्द सिंह इकलौते ऐसे विधायक हैं जो लगातार सातवीं बार विधानसभा में पहुंचे। पूरी कांग्रेस में उनके मुकाबले में वरिष्ठ विधायक और कोई नहीं है। उनकी वरिष्ठता सदन में मुखरता और सदन में पूरे समय तक बैठना ही उन्हें आसंदी की ओर आकर्षित करने की वजह बन गई। विधानसभा अध्यक्ष के लिए उनका नाम चला है तो सिर्फ इसी कारण कि वे कांग्रेस खेमे में सबसे वरिष्ठ हैं और संसदीय ज्ञान, सदन की मर्यादा का भी उन्हें अनुभव है। यदि वे विधानसभा के अध्यक्ष बनते हैं जैसी कि अटकलें है तो वे अपनी कार्यकुशलता से हमेशा याद किए जाते रहेंगे।

Updated : 25 Dec 2018 8:06 AM GMT
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सुबोध अग्निहोत्री

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