बांग्लादेश: हिन्दू द्वेष पर चुनाव जीतने की बात?

Protest in MP Against Attacks on Bangladeshi Hindus
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Protest in MP Against Attacks on Bangladeshi Hindus 

बांग्लादेश चुनाव से पहले हिंदू विरोधी हिंसा और बयानबाज़ी पर सवाल। क्या नफरत को चुनावी रणनीति बनाया जा रहा है?

सोनाली मिश्रा

बांग्लादेश में चुनाव अब निकट आ गए हैं और कुछ ही दिनों में वहाँ पर सरकार का गठन हो जाएगा. परंतु इन चुनावों के मौसम में जो सबसे खतरनाक प्रवृत्ति उभरकर आ रही है वह है हिंदुओं से घृणा या हिंदुओं की हत्या। पिछले कुछ दिनों में ही दस से अधिक हिंदुओं की हत्या हो चुकी है। बहाना कुछ भी हो सकता है, कारण कुछ भी हो सकता है, परंतु हिंदुओं की हत्याएं हो रही हैं, यह सच है। ये घृणा चुनावों के कारण और भी बढ़ रही हैं। हाल ही में आई खुफिया रिपोर्ट के अनुसार कई नेताओं और कट्टरपंथी तत्वों के बीच बैठक हुई, जिसमें चुनावों के दौरान हिन्दू विरोधी भावनाओं को भड़काने के लिए कहा गया।

भारत विरोधी भावनाएं ही समझ नहीं आती हैं तो ऐसे में हिन्दू विरोधी भावनाएं तो और भी समझ से परे हैं। ये हिन्दू वहीं के नागरिक हैं। ये हिन्दू कहीं बाहर से नहीं आए हैं, बल्कि वह भूमि उनके पुरखों, उनके देवों की भूमि है, परंतु उनके प्रति घृणा फैलाकर चुनाव जीता जाएगा यह कल्पना से परे की बात लगती है? जिस मुल्क में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है, उस मुल्क में चुनावी मुद्दा हिन्दू या भारत बने, यह और भी हैरानी की बात है। यह कौन से भीड़ है, जिसके मन में हिंदुओं और उस भारत के प्रति घृणा भरी हुई है, जिसने उसे भाषाई भेदभाव से बचाते हुए एक नई पहचान दिलाई थी।

क्या यह भीड़ वह है जो 1906 की पहचान बनाए रखना चाहती है अर्थात मुस्लिम लीग की? जो खुफिया रिपोर्ट है, मीडिया के अनुसार उसमें लिखा गया है कि कट्टरपंथी तत्व नफरत और फर्जी खबरों का सहारा लेकर हिंदुओं के खिलाफ फेक नैरेटिव बनाने की योजना बना रहे हैं,। और इनमें हिंदुओं पर चोरी अन्य अपराधों के झूठे आरोप लगाना शामिल है ताकि स्थानीय आबादी को उनके खिलाफ हिंसा के लिए उकसाया जा सके। ये इसलिए क्योंकि जिससे मजहबी घृणा के आधार पर हिंदुओं को मारा जा रहा है, उसे साबित न किया जा सके। जबकि उनपर निशाना उनके धर्म के आधार पर ही लगाया जा रहा है। हाल ही में एक उम्मीदवार जो चुनावी मैदान में है, उसने साफ कहा कि हिंदुओं को मारना बांग्लादेश के चुनावों में एक विजयी रणनीति हो सकती है।

नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस के शासनकाल में हिंदुओं के प्रति हिंसा बढ़ी है और साथ ही जिहादी कट्टरता का विस्तार हुआ है। महिलाओं के प्रति हिंसा बढ़ी है और राजनीतिक परिदृश्य से उन्हें गायब ही कर दिया गया है। उनपर हिजाब आदि का दबाव डाला जा रहा है, कई घटनाएं सामने आई हैं। और उस पर महिला हिन्दू हो, तो उसका शिकार तो और भी आसान है। हिन्दू पुरुषों को मारा जा रहा है और महिलाओं और लड़कियों को यौन हिंसा का शिकार बनाया जा रहा है। कुछ मामले सामने आ जाते हैं तो वहीं काफी मामले जो सुदूर गावों में होते हैं, वे सामने नहीं आ पाते हैं। कट्टर जिहादी ताकतें हिंदुओं और महिलाओं को लगातार निशाना बना रही हैं, परंतु यही कहा जा रहा है कि सब ठीक है।

भारत ने चूंकि शेख हसीना को शरण दी हुई है, इसलिए भारत को और अंतत: वहाँ के हिंदुओं को दुश्मन आम लोगों के बीच घोषित किया जा रहा है। यह भी देखने वाली बात होगी कि चुनावों के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति क्या होगी?


लेखिका- सोनाली मिश्रा

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