3 दिन से धरने पर बैठे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस, मेला प्रशासन बोला 24 घंटे में साबित करें पद

प्रयागराज माघ मेले में धरने पर बैठे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को प्रशासन ने नोटिस देकर 24 घंटे में शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा है।

Update: 2026-01-20 09:15 GMT

प्रयागराज। माघ मेले की ठंडी रातों में चल रहा विवाद अब और गरमा गया है. पिछले तीन दिनों से धरने पर बैठे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मेला प्रशासन ने नोटिस थमा दिया है. नोटिस में उनसे 24 घंटे के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि वे किस आधार पर खुद को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य बता रहे हैं ।

आधी रात पहुंचा प्रशासन, सुबह चस्पा हुआ नोटिस

सोमवार देर रात, करीब 12 बजे, माघ मेला में कानूनगो अनिल कुमार शंकराचार्य के शिविर पहुंचे। नोटिस देने की कोशिश की, लेकिन शिष्यों ने लेने से इनकार कर दिया. उनका कहना था कि इतनी रात में कोई जिम्मेदार मौजूद नहीं है, सुबह आइए । मंगलवार सुबह कानूनगो फिर पहुंचे और इस बार नोटिस सीधे शिविर के गेट पर चस्पा कर दिया. यह नोटिस मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी बताया जा रहा है. मौके पर मौजूद कुछ श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसा दृश्य उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था ।

ज्योतिषपीठ विवाद बना आधार

नोटिस में साफ लिखा है कि ज्योतिषपीठ में शंकराचार्य पद को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2022 को आदेश दिया था कि अंतिम फैसले तक किसी को भी शंकराचार्य घोषित नहीं किया जाएगा, न ही पट्टाभिषेक होगा प्रशासन का कहना है कि इसके बावजूद अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर के बोर्ड पर खुद को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य लिखा है, जो कोर्ट के आदेश की अवहेलना मानी जा रही है. इसी आधार पर 24 घंटे में जवाब मांगा गया है कि वे यह पद कैसे उपयोग कर रहे हैं

अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार

सोमवार को ही की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, शंकराचार्य वही होता है जिसे बाकी पीठ मानती हैं। दो पीठ हमें शंकराचार्य मानती हैं पिछले माघ मेले में हम साथ स्नान भी कर चुके हैं, अब और किस प्रमाण की जरूरत है उन्होंने यह भी कहा कि क्या अब प्रशासन तय करेगा कि कौन शंकराचार्य है. यहां तक कि भारत के राष्ट्रपति को भी यह अधिकार नहीं है, शंकराचार्य का निर्णय शंकराचार्य ही करेगा यह परंपरा है ।

माफी तक आश्रम में नहीं जाएंगे

शंकराचार्य अपने फैसले पर अड़े हुए हैं. उन्होंने साफ कहा है कि जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगता, वे आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे। कल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यहां तक कहा कि वे हर माघ मेले में प्रयागराज आएंगे, लेकिन शिविर में नहीं फुटपाथ पर रहेंगे ।

Tags:    

Similar News