सीटी स्कैन में संक्रमित निकल रहे मरीजों का नहीं है कोई रिकार्ड

खुले में घूम रहे कोरोना संक्रमित मरीज

Update: 2020-09-22 01:00 GMT

ग्वालियर, न.सं.। जिले में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच अब ऐसे कई संक्रमित मरीज लोगों के बीच घूम रहे हैं जिनका कोई भी रिकार्ड स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन के पास नहीं है। कोरोना का पता लगाने के लिए अब तक जितनी भी तरह की जांच हो रही हैं उनमें स्वाब का सैंपल लिया जा रहा है और उनमें कोरोना संक्रमित तो पता चलता है, लेकिन यह नहीं पता चल पाता कि फेफड़े में कितना इंफेक्शन फैल गया है। कोरोना मरीजों को सांस लेने में दिक्कत की वजह फेफड़े में इंफेक्शन ही है। इसका पता नहीं चलने से मरीजों की हालत और गंभीर होती जाती है। इसी के चलते अब कोरोना संक्रमित मरीजों की सीटी स्कैन कराई जा रही है। जिससे फेफड़े का इंफेक्शन तुरंत पता चल जाए और मरीज को उपचार दिया जाए। लेकिन इस सीटी स्कैन की रिपोर्ट का अब निजी अस्पताल के संचालक दुरुपयोग करते हुए मरीजों को भर्ती कर रहे हैं। जबकि कई मरीज को सीटी स्कैन की रिपोर्ट में संक्रमित निकलने के बाद घर में ही उपचार लेकर आराम से घूम रहे हैं।

नियमानुसार अगर किसी मरीज को सीटी स्कैन में संक्रमण निकलता है तो उसे आरटीपीसीआर, रेपिड या ट्रू नेट पर कोरोना की जांच करानी चाहिए। इसमें आरटीपीसीआर को जांच के लिए सबसे प्रमाणिक माना गया है। जिस कारण शहर में कई संक्रमित ऐसे घूम रहे हैं, जिनका कोई रिकार्ड न तो स्वास्थ्य विभाग के पास है और न ही प्रशासन के पास। अगर सीटी स्कैन में संक्रमित निकलने वाले सभी मरीजों की जांच कराई जाए तो शहर में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा डरा देने वाला सामने आएगा।

विद्या एमआरआई सेन्टर पर लग रहे नम्बर

सीटी स्कैन सेन्टरों की बात करें तो विद्या एमआरआई पर ही सबसे ज्यादा सीटी स्कैन हो रहे हैं। विद्या एमआरआई पर मरीज को चेस्ट सीटी कराने के लिए इन दिनों नम्बर लगाना पड़ता है। इतना ही नहीं एमआरआई सेन्टर पर कई मरीजों को संक्रमण भी निकलता है, जिन्हें आराम से रिपोर्ट भी थमा दी जाती है।

आईसोलेट से बचने के लिए नहीं करा रहे जांच

आरटीपीसीआर, रेपिड या ट्र्रू नेट पर अगर कोई मरीज संक्रमित निकलता है तो उसका रिकार्ड स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन के पास पहुंच जाता है। साथ ही संक्रमित के घर के बाहर बैरीगेट और क्वारेंटाइन का पर्चा भी चस्पा कर दिया जाता है। इसी डर से लोग जांच कराने से बच रहे हैं और सीटी स्कैन करा कर उपचार ले रहे हैं।

चिकित्सकों की भी मिलीभगत

इस मामले में सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस पूरे खेल में शहर के कई बड़े चिकित्सक भी शामिल हैं। चिकित्सक भी कोरोना की जांच कराने की जगह सीटी स्कैन करा रहे हैं। क्योंकि सीटी स्कैन पर चिकित्सकों का मोटा कमीशन होता है। इतना ही नहीं शहर में कई ऐसे निजी अस्पताल भी हैं जो सीटी स्कैन कराकर मरीज को अपने अस्पताल में भर्ती कर लाखों का बिल बना रहे हैं।

सीएमएचओ नहीं करते कार्रवाई

सीएमएचओ के पास कई बार शिकायतें पहुंच चुकी हैं कि कई निजी अस्पताल जो कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती करने के लिए पात्रता नहीं रखते वह अस्पताल में गलत तरीके से मरीजों को भर्ती कर रहे हैं। उसके बाद भी सीएमएचओ डॉ. वी.के. गुप्ता इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिस कारण जिले की स्थिति बिगड़ती जा रही है।

इनका कहना है

सीटी स्कैन में अगर किसी मरीज को संक्रमण निकल रहा है तो उसकी आवश्यक रूप से कोरोना की जांच कराने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

-कौशलेन्द्र विक्रम ङ्क्षसह, जिलाधीश

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