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सीबीआई और ईडी चिदंबरम को जमानत देने के खिलाफ, पहुंची हाईकोर्ट

Update: 2019-09-06 07:19 GMT

नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम को एयरसेल मैक्सिस केस में अग्रिम जमानत मिलने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दोनों एजेंसियां राउज़ एवेन्यू कोर्ट द्वारा मिली अग्रिम जमानत का विरोध कर रही हैं।

शुक्रवार को जब इस मामले में अदालत में सुनवाई हुई तो सीबीआई-ईडी की तरफ से रॉगेट्री लेटर दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। एजेंसी की तरफ से इस सुनवाई को 6 हफ्ते के लिए टालने का आग्रह किया गया था। अब इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस ओपी सैनी ने इस सुनवाई को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया है।

आपको बता दें कि गुरुवार को कोर्ट ने पी. चिदंबरम और कार्ति चिदंबरम को गवाहों व सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करने और जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए थे। अदालत के इस आदेश के बाद सीबीआई या ईडी एयरसेल-मैक्सिस केस में दोनों को गिरफ्तार नहीं कर सकती हैं। हालांकि, पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम INX मीडिया केस में अभी न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद हैं। INX मीडिया केस में पूर्व वित्त मंत्री को CBI ने 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था, तब से 5 सितंबर तक पूर्व वित्त मंत्री सीबीआई हिरासत में थे। 5 सितंबर को कोर्ट ने पी. चिदंबरम को न्यायिक हिरासत में 19 सितंबर तक तिहाड़ जेल भेज दिया गया है।

आपको बता दें कि मामला फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (FIPB) से जुड़ा है। 2006 में एयरसेल-मैक्सिस डील को पी. चिदंबरम ने बतौर वित्त मंत्री मंजूरी दी थी। पूर्व वित्त मंत्री पर आरोप है कि उनके पास 600 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट प्रपोजल्स को ही मंजूरी देने का अधिकार था।

इससे अलग किसी बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी देने के लिए उन्हें आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति से मंजूरी लेनी जरूरी थी। एयरसेल-मैक्सिस डील केस 3500 करोड़ की FDI की मंजूरी का था। इसके बाद एयरसेल-मैक्सिस एफडीआई मामले में पी. चिदंबरम ने वित्त मंत्री रहते हुए कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स की मंजूरी के बिना मंजूरी दे दी।

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