राज्य लोक सेवा आयोगों की सेलेक्शन प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने का सुझाव
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य लोक सेवा आयोगों और राज्य सेलेक्शन बोर्डों द्वारा आयोजित सेलेक्शन प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने का सुझाव दिया है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस आरएफ नरीमन की बेंच ने कहा कि जहां तक संभव हो वीडियोग्राफी करायी जाए।
दरअसल मेघालय हाईकोर्ट ने पाया था मेघालय में सरकारी प्राइमरी स्कूलों में सहायक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता की गईं। हाईकोर्ट के इस आदेश को चुनौती देते हुए मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने कहा कि कई राज्यों में ऐसी घटनाएं हमारे सामने आ रही हैं। कोर्ट ने कर्नाटक के एक अन्य मामले में हाल ही में एक आदेश का हवाला दिया। अविनाश सी और अन्य बनाम कर्नाटक राज्य और अन्य में इसी बेंच ने कहा था कि चयन प्रक्रिया को रद्द करने के निर्णय में केवल तभी दखल दिया जा सकता है अगर यह स्पष्ट रूप से मनमाना, दुर्भावनापूर्ण या अवैध हो।
कर्नाटक के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर सेलेक्शन प्रोसेस में किसी भी तरह की गड़बड़ी पाई जाती है, तो इसे रद्द करने का विकल्प खुला रहता है। कोर्ट ने कहा कि हम ये मानते हैं कि सार्वजनिक पदों पर सेलेक्शन के लिए यह जरुरी है कि जहां तक संभव हो सेलेक्शन प्रोसेस को खासकर राज्य लोक सेवा आयोगों और राज्य सेलेक्शन बोर्डों की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी हो। यह जरुरी है कि परीक्षा केन्द्रों के साथ-साथ इंटरव्यू केन्द्रों में सीसीटीवी कैमरों को जहां तक संभव हो स्थापित किया जाए। इन सीसीटीवी कैमरों के फुटेज तीन सदस्यों की स्वतंत्र समिति द्वारा देखे जाएं और उस समिति की रिपोर्ट संबंधित वेबसाइट पर रखी जा सकती है।