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वर्षगांठ पर सरकार ने गिनाए नोटबंदी के सात फायदे

Update: 2017-11-08 00:00 GMT

 

नई दिल्ली। लंबे समय से चलन में रहे पांच सौ रुपये और हजार रुपये के करेंसी नोट की वैधता खत्म करने के सरकार के 8 नवम्बर, 2016 के फैसले की पहली वर्षगांठ पर सरकार ने इसके फायदे गिनाए। भारत सरकार ने इसे एक ऐतिहासिक फैसला बताते हुए एक कदम से कई फायदे वाला निर्णय बताया। सरकार ने नोटबंदी से कुल सात ऐसे फायदे बताए जो ऐतिहासिक साबित हुए। जिसमें कालेधन को लेकर खुलासा, आतंक-नक्सल फंडिंग पर मार, आर्थिक तंत्र की सफाई, गरीबों के कल्याण के लिए काम, कर व्यवस्था एवं कर संग्रह में सुधार, डिजिटल पेमेंट व्यवस्था में वृद्धि और बैंकों में सस्ता एवं आसान कर्ज, स्थानीय निकायों को धन सहित अन्य फायदे शामिल हैं। 

केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि नोटबंदी के फैसले से सरकार ने अबतक का सबसे बड़ा कालेधन को लेकर खुलासा किया है। ये नोटबंदी ही थी, जिसके चलते सरकार को देश के अंदर मौजूद कालेधन का पता चला। इससे पहले किसी भी पूर्ववर्ती सरकार ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया था, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था में मौजूद कालेधन का पता लगाया जा सके। 

इसी तरह नोटबंदी से देश में आतंक एवं नक्सल फंडिंग को गहरी चोट पहुंची। जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों, पत्थरबाजों और देशद्रोही घटनाओं पर रोक लगाने में खासी सफलता हासिल हुई। सेना और पुलिस पर कश्मीरी युवाओं द्वारा पत्थरबाजी की घटनाओं में बड़ी संख्या में कमी आई। इसी तरह देश के पूर्वी हिस्सों में फैले नक्सल प्रभावित इलाकों में हिंसक घटनाओं में कमी देखी गई। नोटबंदी के चलते आतंकी एवं नक्सलियों की वित्तीय कमर टूट गई। 

सरकार के मुताबिक नोटबंदी से भारत के वित्तीय ढांचे की सफाई करने का मौका मिला। नोटबंदी से देश के आर्थिक तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार, कालाधन, बेईमानी जैसी गंदगी सामने आई, जिसे साफ करना शुरु कर दिया गया है। इसी तरह आर्थिक तंत्र में सफाई के चलते व्यवस्था बेहतर हुई और गरीबों के लिए कल्याण कार्यों को गति मिली। 

सरकार ने बताया कि नोटबंदी से भारत के टैक्स सिस्टम को बेहतर करने में मदद मिली। नोटबंदी ने भारत के टैक्स सिस्टम की खामियों को उजागर किया। जिससे मौजूदा सरकार के लिए टैक्स सिस्टम में सुधार के प्रयास शुरू किए गए। नोटबंदी के चलते ही डिजिटल पेमेंट व्यवस्था ने जोर पकड़ा और ज्यादा से ज्यादा लोग कैशलेस इकॉनामी की ओर अग्रसर हुए। इतना ही नहीं नोटबंदी के बाद बैंकों के पास बड़ी मात्रा में नकदी आई, जिससे जरूरतमंदों के लिए बैंकों से कर्ज लेना आसान और सस्ता हो गया। 

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