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“मूल्य आधारित पत्रकारिता एवं राष्ट्रवाद का संवाहक”

दैनिक स्वदेश उत्तर भारत का प्रमुख हिंदी दैनिक है। यह अपने जीवन के यशस्वी 68 वर्ष पूर्ण कर चुका है। ऐसे समय में जब तमाम वैचारिक पत्र-पत्रिकाएं व्यावसायिकता की अंधी दौड़ में बेदम हो चुकी है, स्वदेश ने बिना रुके अपने विश्वसनीय पाठको के संबल के चलते वैचारिक अधिष्ठान को जीवंतता प्रदान करते हुए अपनी गौरवमयी यात्रा जारी रखी है। लखनऊ से प्रारम्भ होने वाले स्वदेश को शुरुआत में ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय जैसे महान चिंतक का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ ।


नाना जी देशमुख, भाऊराव जी देवरस एवं रज्जू भैया जैसी विभूतियों ने स्वदेश को वैचारिक अधिष्ठान देकर पाला-पोसा. उत्तरप्रदेश से प्रारम्भ होने वाली यह वैचारिक यात्रा संघ पर प्रतिबंध के चलते स्थगित करनी पड़ी। वर्ष 1966 में, श्रद्धेय स्व. श्री सुदर्शन जी की प्रेरणा से मध्यप्रदेश के इंदौर से इसका पुनः प्रकाशन प्रारम्भ हुआ, तत्पश्चात अक्षय तृतीया तद्नुसार 27 अप्रैल 1971 को ग्वालियर से कै. श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया के आशीर्वाद से स्वदेश का प्रकाशन प्रारंभ हुआ, जो आज तक अखंड है। वर्तमान में स्वदेश ग्वालियर समूह के अंतर्गत ग्वालियर, भोपाल, गुना, झाँसी, आगरा एवं सतना साथ में सायंकालीन अखबार सांध्यवार्ता अखबार प्रकाशित किया जा रहा है, समूह संपादक श्री अतुल तारे हैं।

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