व्यावसायिक इमारत को आवासीय अनुमति देने का कारनामा

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बिल्डर को दिया करोड़ों का लाभ, छह भूखण्डों को जोड़कर बनी है इमारत

ग्वालियर| शहर के सबसे पॉश क्षेत्र सिटी सेन्टर में छह भूखण्डों को जोड़कर लगभग सात हजार वर्ग फीट क्षेत्रफल में एक बिल्डर द्वारा कमर्शियल इमारत खड़ी कर ली गई है। चूंकि कर्मिशयल इमारत को समझौता करने में बिल्डर को बड़ा नुकसान होता अत: उसे करोड़ों रुपए का लाभ पहुंचाने की नीयत से आवासीय समझौता की रसीद कटवा दी गई है, और तो और यह इमारत छह भूखण्डों पर बनाई गई है जो कि नियमों का सरेआम उल्लंघन हैं। इतना बड़ा गेम बजाने के बाद निगम के इंजीनियर इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार टाऊनशिप चलाने वाले अरविंद अग्रवाल द्वारा सिटी सेंटर क्षेत्र के साईट नम्बर एक में क्रमश: छह भूखण्ड बी-एक से लेकर बी-छह अपने पिता और पार्टनर नीता तायल पत्नी अनिल तायल के नाम से खरीदने के बाद लगभग सात हजार वर्ग फीट में एक बड़ी कमर्शियल इमारत खड़ी कर दी गई। चूंकि नगर निगम से इसकी भवन अनुज्ञा ली गई थी लेकिन मौके पर इस अनुज्ञा का उल्लंघन किया गया तो निगम ने नोटिस जारी किए। इस बीच बिल्डर ने इंजीनियरों और वरिष्ठ अधिकारियों से सांठ-गांठ कर इस कमर्शियल इमारत को आवासीय के रूप में समझौता करने का ताना-बाना बुना। इसके पश्चात 18 फरवरी को इस समझौते पर क्षेत्रीय कार्यालय क्रमांक 11 के जेडओ राकेश कश्यप और भवन अधिकारी ग्वालियर पूर्व महेन्द्र अग्रवाल एवं क्लस्टर अधिकारी सतेन्द्र यादव ने अपने-अपने हस्ताक्षर कर नोटशीट को आगे बढ़ाकर निगमायुक्त विनोद शर्मा से भी हस्ताक्षर करा लिए, जबकि मौके कमर्शियल इमारत खड़ी हुई है जिसमें एक जूते का शोरूम हिन्द बूट हाउस भी शामिल है। कायदे से समझौते के पूर्व निगम अधिकारियों को मुआयना करना चाहिए लेकिन सब कुछ जानते हुए भी बिल्डर को फायदा पहुंचाने के लिए यह कार्रवाई की गई।
यह नियम भी तोड़ा
भूमि विकास अधिनियम और टाउन एण्ड कन्ट्री प्लानिंग के तहत सिटी सेन्टर क्षेत्र में मास्टर प्लान लागू रहते अलग-अलग भूखण्डों को एक साथ नहीं बनाया जा सकता लेकिन निगम अधिकारियोें को अपने मकड़जाल में फंसाकर बिल्डर ने छह भूखण्डों पर कमर्शियल इमारत तानकर सारे नियम कायदे तोड़कर दिखा दिए।

मई 2017 में तत्कालीन निगमायुक्त अनय द्विवेदी के पास शिकायत पहुंचने पर इस इमारत के शटर भवन अधिकारी द्वारा तुडवाए गए थे बाद में इस इमारत को तोडने के आदेश हुए थे। लेकिन तुडाई तो छोडिए निगम अधिकारियों ने आवासीय का समझौता कर बिल्डर को बड़ा लाभ पहुंचा दिया। बताते हैं कि ग्वालियर पूर्व के भवन अधिकारी को कई जांचों के बाद इस पद से टाउन एण्ड कंट्री प्लानिंग भोपाल द्वारा नवम्बर 2017 में हटाया जा चुका है। लेकिन निगमायुक्त को भ्रम में रखकर उनके द्वारा बिल्डरों को लाभ पहुंचाने का काम किया जा रहा है।
मई 2017 में तत्कालीन निगमायुक्त अनय द्विवेदी के पास शिकायत पहुंचने पर इस इमारत के शटर भवन अधिकारी द्वारा तुडवाए गए थे बाद में इस इमारत को तोडने के आदेश हुए थे। लेकिन तुडाई तो छोडिए निगम अधिकारियों ने आवासीय का समझौता कर बिल्डर को बड़ा लाभ पहुंचा दिया। बताते हैं कि ग्वालियर पूर्व के भवन अधिकारी को कई जांचों के बाद इस पद से टाउन एण्ड कंट्री प्लानिंग भोपाल द्वारा नवम्बर 2017 में हटाया जा चुका है। लेकिन निगमायुक्त को भ्रम में रखकर उनके द्वारा बिल्डरों को लाभ पहुंचाने का काम किया जा रहा है।

ऐसे हुआ समझौता
सूत्रों के अनुसार प्रकरण क्रमांक जेड 11 डब्ल्यू30/0353/2015/3गुणा3 में बी+जी+टू की अनुमति 20 जनवरी 2016 के तारतम्य में अरविंद अग्रवाल पुत्र कृष्ण गोपाल अग्रवाल को 274.34 वर्ग मीटर में स्वयं के आवास उपयोग हेतु समझौते की अनुमति दी गई। इसी तरह जेड 11 डब्ल्यू30/0354/2015/3गुणा3 में 396 वर्ग मीटर व जेड 11 डब्ल्यू30/0322/2015/3गुणा3 में 261 वर्ग मीटर के अलावा तीन अन्य भूखण्डों पर भी आवासीय उपयोग हेतु समझौता करते हुए क्रमश: 61800 रुपए 58506 रुपए, 59472 रुपए प्रश्मन शुल्क जमा कराया गया। इन आदेशों में कहा गया है कि एफएआर से शत प्रतिशत अधिक सीमा तक प्रश्मन किए जाने का प्रावधान है। ऐसे में यह सवाल उठ खड़ा हो रहा है कि यह इमारत पूरे क्षेत्रफल में निर्मित है फिर 10 फीसदी का समझौता कि स नियम के अनुसार कर दिया गया।

इनका कहना है
‘सिटी सेन्टर में अरविंद अग्रवाल की बिल्डिंग का समझौता नहीं हुआ है, इसकी परमीशन पहले से ही है। बाकी जानकारी मैं शाम को दे पाऊंगा। ’

महेन्द्र अग्रवाल
भवन अधिकारी, ग्वालियर पूर्व

‘मैंने समझोते की फाइल पर इस शर्त के साथ हस्ताक्षर किए थे कि भवन स्वामी को आवासीय उपयोग करना होगा। यदि मौके पर कमर्शियल इमारत है तो संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए। ’

राकेश कश्यप
तत्कालीन क्षेत्राधिकारी
क्षेत्र क्रमांक 11

‘पांच हजार वर्ग मीटर तक क्लबिंग की पावर टाऊन एण्ड कंट्री प्लानिंग को है इससे अधिक की अनुमति देने का अधिकार किसी को नहीं है। कमर्शियल इमारत पर आवासीय की अनुमति देना भी नियम कायदों का उल्लंघन है। ’

व्ही.के. शर्मा
संयुक्त संचालक
टाऊन एण्ड कंट्री प्लानिंग

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